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फिल्म रिव्यू: अनारकली आॅफ आरा- समाज के भदेसपन को सामने लाने वाली फिल्म

इस फिल्म के निर्देशक अविनाश दास पत्रकार रहे हैं और इस तरह बॉलीवुड के प्रतिष्ठान के बाहर के आदमी हैं।
Author March 25, 2017 02:26 am
बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर की फिल्म अनारकली ऑफ आरा के तीन सीन ऑनलाइन हुए लीक।

कलाकार – स्वरा भास्कर, पंकज त्रिपाठी, संजय मिश्रा, विजय कुमार, इश्तियाक

निर्देशक – अविनाश दास

इस फिल्म के निर्देशक अविनाश दास पत्रकार रहे हैं और इस तरह बॉलीवुड के प्रतिष्ठान के बाहर के आदमी हैं। इस फिल्म को बना के उन्होंने दिखा दिया है कि अगर कल्पनाशीलता हो और कुछ नया करने का जूनून, तो प्रतिष्ठान से बाहर का आदमी भी कुछ बेहतर कर सकता है। ये छोटे बजट की एक ऐसी फिल्म है जो उस समाज के भदेसपन को सामने लाती है, जो देश के छोटे शहरों और कस्बों में फैला हुआ है और जहां की उन औरतों की दुनिया अभी भी ज्यादा नहीं बदली है जो नाचने-गाने के पेशे में हैं और जो शादी ब्याह से लेकर दूसरे कार्यक्रमों में अपनी कला का प्रदर्शन करती हैं। उनके लिए नारीवाद नहीं आया है और न ही उनको कलाकार समझा जाता है। स्थानीय ताकतवर लोग, जिसमें पुलिसवाले से लेकर शिक्षा संस्थानों और राजनीति में दबंग भी होते हैं, ऐसी औरतों और लड़कियों को सिर्फ और सिर्फ दिल बहलाने की चीज समझते हैं। बिना इसकी परवाह किए कि ऐसी लड़कियों और औरतों के पास भी कोई नाजुक दिल होता है। संवेदनशील भी। या इनका कोई कानूनी अधिकार है।

स्वरा भास्कर ने ऐसी ही लड़की अनारकली की भूमिका निभाई है जो आरा (बिहार) की है और शहर में अपने नाच-गाने से लोगों का मनोरंजन करती है। उसकी मां भी इसी पेशे में थी। स्थानीय मानसिकता ऐसी है कि ऐसी लड़कियों के बारे में धारणा बना ली जाती है कि वे ‘पेशा करती’ हैं और पेशा करने का व्यावहारिक मतलब ये निकाला जाता है कि इनका शारीरिक इस्तेमाल भी किया जा सकता है। आरा की अनारकली को भी स्थानीय बाबू कुबेर सिंह विश्वविद्यालय का कुलपति धर्मेंद्र चौहान (संजय मिश्रा) एक कार्यक्रम में देखता है और उस पर लट्टू हो जाता है। वह उस मंच पर चढ़ जाता है जहां अनारकली अपना कार्यक्रम पेश कर रही होती है और उससे बदतमीजी करता है। पर अनारकली को ये पसंद नहीं। वो विरोध करती है और मामला आगे बढ़ता है तो अनारकली को शहर छोड़ना पड़ता है। पुलिस और प्रशासन धर्मेंद्र के साथ है। क्या अनारकली ऐसे में अपनी इज्जत बचा पाएगी? क्या उसकी इज्जत को समाज के ताकतवर लोग भी इज्जत समझेंगे?

फिल्म प्रहसन की शैली में है और इसी कारण चरित्र भी मजाकिया अंदाज में विकसित हुए है और इसी कारण हंसने का भरपूर इंतजाम इसमें है। इसके बिना किसी कुलपति को एक लफंगे की तरह पेश भी नहीं किया जा सकता था। बहरहाल, स्वरा भास्कर ने शानदार भूमिका निभाते हुए ऐसी लड़की के किरदार को सामने लाया है जिसे समाज में तो पेशा करने वाली कहा जाता है पर जिसके भीतर भी आत्माभिमान होता है और इसकी रक्षा के लिए वह दूर तक जा सकती है। संजय मिश्रा, विजय कुमार (दारोगा की भूमिका में), पंकज त्रिपाठी, इश्तियाक ने भी बहुत अच्छा काम किया है। फिल्म में भोजपुरी मिजाज वाले गाने भी उस मानसिकता को दिखानेवाले हैं जो स्थानीय स्तर पर हिट माने जाते हैं पर जिनमें एक स्त्री विरोधी मानसिकता उभरती है।

 

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