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पहली बार ऑडिशन में मधुबाला भी हो गई थीं फेल, फिर कैसे मिली थी ‘महल’

फिल्म महल के लिए एक्ट्रेस की तलाश हो रही थी। कमाल से तब कहा जा रहा कि सुरैया को उसके लिए लेना चाहिए। मगर वह...

फिल्म इंडस्ट्री में मधुबाला को कौन नहीं जानता। वह किसी इंट्रोडक्शन की मोहताज नहीं हैं। हाल ही दिल्ली के मैडम तुसाद म्यूजियम में उनका मोम का पुतला लगाया गया है। वह हुस्न की मल्लिका जरूर थीं। लेकिन पहली बार ऑडिशन देने गईं, तो रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। स्क्रीन टेस्ट में मधुबाला जैसी एक्ट्रेस का फेल होना। वाकई में अटपटा लगता है न। मगर यह बात सच है।

बात 1949 के आस-पास की है। फिल्मकार कमाल अमरोही तब एक फिल्म बनाने की तैयारी में जुटे थे। नाम था- महल। अच्छा, उधर मधुबाला भी अपने फिल्मी करियर की शुरुआत कर चुकी थीं। बतौर बाल बलाकार वह काम कर रही थीं। तभी कमाल ने उनके काम और नाम पर गौर किया।

फिल्म महल के लिए एक्ट्रेस की तलाश हो रही थी। कमाल से तब कहा जा रहा कि सुरैया को उसके लिए लेना चाहिए। मगर वह मधुबाला को देख चुके थे। उन्हें महल के लिए उससे बेहतरीन कोई विकल्प नहीं नजर आ रहा था। मधुबाला जब फिल्म के स्क्रीन टेस्ट देने पहुंचीं। सब कुछ व्यवस्थित तरीके से हुआ। मगर ऑडिशन में वह फेल हो गईं। तब उन्हें जिसने भी पर्दे पर देखा, यही कहा कि वह कैमरे के लायक हैं ही नहीं।

कमाल ने इस दौरान उम्मीद न छोड़ी। लोगों की बातों को अनसुना किया। वह कैमरामैन से बोले, जहां मैं कहूं वहीं लाइट डालो। फिर क्या था। कमाल साहब की बताई जगह पर लाइट दी गई। यहीं, मधुबाला के हुस्न के जलवे का कमाल चला। वह इसके बाद महल की ‘रानी’ बन गईं। यानी उन्हें इसके बाद फिल्म में रोल मिल गया था।

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