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कैलाश खेर बर्थडे: चार साल की उम्र में हो गए थे संगीत को समर्पित, डिप्रेशन में की थी आत्महत्या की कोशिश

बॉलीवुड में सूफी गानों से अपनी पहचान बनाने वाले सिंगर कैलाश खेरउत्तर प्रदेश में मेरठ के रहने वाले हैं। कैलाश ने 4 साल की उम्र से ही गाना शुरू कर दिया था।
Author नई दिल्ली | July 7, 2017 09:36 am
बॉलीवुड में सूफी गानों से अपनी पहचान बनाने वाले सिंगर कैलाश खेर उत्तर प्रदेश में मेरठ के रहने वाले हैं। कैलाश ने 4 साल की उम्र से ही गाना शुरू कर दिया था। उनके पिता कश्मीरी पंडित थे वह भी लोक गीतों को काफी पसंद किया करते थे

बॉलीवुड में सूफी गानों से अपनी पहचान बनाने वाले सिंगर कैलाश खेर उत्तर प्रदेश में मेरठ के रहने वाले हैं। कैलाश ने 4 साल की उम्र से ही गाना शुरू कर दिया था। उनके पिता कश्मीरी पंडित थे वह भी लोक गीतों को काफी पसंद किया करते थे। कैलाश के संगीत के हुनर के बारे में उनका परिवार और उनके दोस्त भी जानते थे। सब लोग उनकी तारीफ करते थे, वहीं कैलाश जैसे-जैसे बड़े होते गए वैसे ही उनके मन में संगीत के लिए और प्यार और भावनाएं जागने लगीं।

कैलाश की गायकी को लेकर अब उनका परिवार थोड़ा सख्त हो चला था। घर वाले नहीं चाहते थे कि वह संगीत की दुनिया में अपना करियर बनाएं। इस दौरान उनके लिए राहें आसान न थी। लेकिन फिर भी उन्होंने आस नहीं छोड़ी और कड़ी लगन और मेहनत के साथ संगीत को सीखने में जुटे रहे। जब वह 14 साल के थे उन्होंने फैसला किया कि उन्हें संगीत के लिए अपना घर बार छोड़ना होगा। और वह छोटी सी उम्र में ही अपने घर से चले गए। इस दौरान कैलाश कई जगह भटके, वहीं लोक संगीत में उनकी रुचि थी इसलिए वह जहां भी जाते वहां के लोक संगीत के बारे में जानकारियां जुटाने लगते।

इस काम में उनका मन लगने लगा था। अब इस दौरा कैलाश के पास खाने पीने के लिए पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने बच्चों को संगीत की शिक्षा देना शुरू किया। वह अब बच्चों को ट्यूशन देने लगे। इस दौरान वह हर बच्चे को संगीत सिखाने के लिए 150 रुपए लेते थे। वहीं कैलाश ने अपने एक दोस्त के साथ हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट का बिजनेस शुरू किया। लेकिन इसमें उन्हें बजाय फायदे के नुकसान उठाना पड़ा। यह कैलाश की जिंदगी का वो दौर था जब उन्होंने अपनी जिंदगी को खत्म करने के बारे में सोच लिया था। उन्होंने एक बार आत्महत्या करने का प्रयास भी किया था। इसके बाद वह काफी समय तक डिप्रेशन में रहे, वहीं इस दौरान वह मन की शांति के लिए ऋषिकेश चले गए।

2001 में मुंबई आने के बाद कैलाश को जो ऑफर मिलता उन्होंने उसे उन्होंने अपना लिया। इस दौरान उनके पास पैसे की भारी कमी थी। उनके पास स्टूडियो जाने तक के पैसे नहीं हुआ करते थे। कैलाश की जिंदगी में तब टर्निंग प्वाइंट आया जब वो म्यूजिक डायरेक्टर राम संपत से मिले। इस दौरान उन्होंने कैलाश को एड में जिंगस्ल गाने का मौका दिया।कैलाश को पहली बार फिल्म ‘अंदाज’ फिल्म में गाने का मौका मिला। इस फिल्म में कैलाश मे ‘रब्बा इश्क न होवे’ गाना गाया। इस गाने में अलग सी आवाज ने लोगों के मन में एक खास जगाह बनाई, यह गाना अपने वक्त में श्रोताओं को खूब पसंद आया। इसके बाद ‘वैसा भी होता है’ पार्ट 2 में कैलाश ने गाना ‘अल्लाह के बंदे’ गाया। इस गाने ने कैलाश को बहुत पॉपुलर बना दिया। इस गाने को गाने के बाद कैलाश की जिंदगी बदल गई। कैलाश ने इस दौरान कई फिल्मी गाने गए जैसे ‘ओ सिकंद’, ‘चांद सिफारिश’। इन गानों से कैलाश को एक नई पहचान मिली और उनके करियर में गाने सुपरहिट साबित हुए। इस दौरान कैलाश को फिल्मफेयर का बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड भी मिला।

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