December 10, 2016

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आधुनिक सिनेमा का मानवीय चेहरा

दुनिया में मनुष्य के सम्मान जनक जीवन और बचे हुए रिश्तों की खोज में विश्व सिनेमा उन गली-कूचों से गुजर रहा है जहां वह पहले नहीं गया।

Author November 28, 2016 06:06 am
फिल्म का एक दृश्य।

भारत के 47वें अंतरराष्टÑीय फिल्म समारोह गोवा के विश्व सिनेमा खंड में दिखाई जा रही अधिकार फिल्में राजनीति और विचार की पृष्ठभूमि में मानवीय सरोकारों के साथ खड़ी है। बदलती हुई दुनिया में मनुष्य के सम्मान जनक जीवन और बचे हुए रिश्तों की खोज में विश्व सिनेमा उन गली-कूचों से गुजर रहा है जहां वह पहले नहीं गया। अब राजनीति और इतिहास जरूरी संदर्भ है जिसकी खिड़की से दुनियाभर के फिल्मकार वर्तमान को दिखा रहे हैं।

पुनरावलोकन में अब्बास किरोस्तामी (ईरान) और आंद्रे वाजदा (पोलैंड) की बात छोड़ भी दें जो कि अब हमारे बीच नहीं रहे, रोमानिया के क्रिस्टीयान मुंजीयू (ग्रेजुएशन), फिलीपींस के लव डायज, ईरान के असगर फरहादी (द सेल्समैन), फिनलैंड के जोहू कौसमानेन (द हैपीएस्ट डे इन द लाइफ आॅफ ओली मैकी, कनाडा के जेवियर दोलान (इट्स ओनली दि एंड आॅफ दि वर्ल्ड), अमरीका के जिम जारमुश (पैटरसन), मिश्र के मोहम्मद दिआब (क्लैश), कंबोडिया के रिथी पान्ह (एग्जाइल), ब्रिटेन के केन लोच (आइ, डेनिएल ब्लेक) आदि विश्व प्रसिद्ध फिल्मकार की तलाश उस मनुष्य की खोज है जो अपने-अपने देशों में कहीं खो गया है।डेनमार्क के निकोलस विंडिंग रेन (द नियोन डेमोन) जहां वर्चुअल रियलिटी के तकनीकी आविष्कार में जा रहे हैं तो द़ कोरिया के हॉग वान चान (आफिस) और एओन सॉग हो (ट्रेन टू बुशान) तकनीकी कौशल से थ्रिलर रच रहे हैं। यह काम हॉलीवुड बहुत पहले कर चुका है पर नए फिल्मकारों के पास अपने अपने देशों की सच्ची कहानियां हैं।

ईरानी फिल्मकारों के पास पूर्वजों से हासिल अपना सिनेमाई व्याकरण और अंतरराष्टÑीय ख्याति है जो उन्हें बहुत दूर तक ले जाती है। अब्बास किरोस्तामी, माजिद मजिदी, मोहसिन मखमलबॉफ जफर पनाही और हाल में निकी करीमी और असगर फरहादी की अपार सफलता ने नए फिल्मकारों के लिए रास्ते आसान कर दिए हैं। गोवा फिल्मोत्सव में यह अकारण नहीं है कि दर्शक ईरानी सिनेमा के दीवाने बने रहते हैं। रोमानिया के क्रिस्टीयान मुंजीयू की फिल्म ‘ग्रेजुएशन’ एक लाचार पिता के संघर्ष की कहानी है जिसकी बेटी का लंदन में आगे की पढ़ाई के लिए चयन हो चुका है पर स्कूल में उसे उतने नंबर नहीं हैं जितने होने चाहिए। वह पिता किसी करह स्कूल टीचर को पटाना चाहता है। बाप-बेटी के बीच बढ़ता टकराव अलग तनाव पैदा करता है। क्रिस्टीयान मुंजीयू की फिल्म ‘फोर मंथ थ्री वीक्स एंड टू डेज’ 2007 में गोवा फिल्मोत्सव की उद्घाटन फिल्म थी।

कंबोडिया के रिथी पान्ह की डाक्यूमेंटरी ‘एग्जाइल’ बिना एक शब्द कहे कई वजहों से देश निकाला सह रहे लोगों की चीख है। रिथी पान्ह फ्रांस में रहते हैं और कंबोडिया में तानाशाही के खिलाफ लगातार फिल्में बना रहे हैं। यह फिल्म अपने कलात्मक सुंदरता में अद्वितीय है। जिस तरह से अपने देश को तरस रहे नायक की यादों के साथ हम यात्रा करते हैं। जल, जमीन, अग्नि, हवा, आकाश, पशु, पंछी, पेड़, घास, घर और चलते लोगों को अविस्मरणीय तरीके से कैमरा दिखाता है। उनकी फिल्म ‘द मिसिंग पिक्चर’ पिछले साल दुनियाभर में चर्चित हुई थी जिसमें पुतलों के माध्यम से तानाशाही झेलते कंबोडिया की कहानियों को फिल्माया गया था। मिश्र के मोहम्मद दिआब की ‘क्लैश’ काहिरा में इस्लामी क्रांति के बाद की उथल पुथल भरे दिनों मे पुलिस ट्रक में कैद कुछ नागरिकों के संघर्ष के चौबीस घंटे का सिनेमाई बयान है।

डेनमार्क के निकोलस विंडिंग रेन की ‘द नियोन डेमोन’ मॉडलिंग की उत्तर आधुनिक दुनिया में मनुष्य और छवियों के तकनीकी घालमेल को दार्शनिक सिने-भाषा में प्रस्तुत करती है। स्त्रियों के शरीर की आभासी छवियों के बाजार की गलाकाट प्रतिस्पर्धा में अंतत: औरत ही मरती है। फिनलैंड के जोहू कौसमानेन की ब्लैक एंड वाइट फिल्म ‘द हैपीएस्ट डे इन द लाइफ आॅफ ओली मैकी’ एक मुक्केबाज की उदास और अकेली जिंदगी की कहानी है जो अपार सफलता के बाद भी खुश नहीं है। जिस दिन वह अपने जीवन का सबसे महंगा मुकाबला हार जाता है वह दिन उसके जीवन का सबसे खुशनुमा दिन बन जाता है क्योंकि उसे उसका प्यार मिलता है। उसे लगता है कि जीवन में असली खुशी सफलता से नहीं प्रेम से आती है।

कनाडा के जेवियर दोलान की फ्रेंच फिल्म ‘इट्स ओनली दि एंड आॅफ दि वर्ल्ड’ एक बार फिर स्मृतियों मे बसे प्रेम की खोज में चलती है जहां रिश्ते दार्शनिक धरातल पर पहुंच जाते हैं। उन रिश्तों की जटिलता कई बार सिनेमा में कहानी को समुद्री तूफान की तरह तितर बितर कर देती है। तब अविश्वसनीय लगने वाले अनुभव की तार्किक व्याख्या संभव नहीं रह जाती। जेवियर दोलान अपनी पिछली फिल्म ‘मम्मी’ से दुनियाभर में चर्चित हुए थे।

 

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First Published on November 28, 2016 6:01 am

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