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Happy Birth Day Kailash Kher: पिता की मौत के दिन भी कॉन्सर्ट में गाने पहुंचे थे कैलाश, पूरा किया था वादा

कैलाश खेर ने एक बार मां से तानपुरा खरीदने के लिए पैसे मांगे थे, उस वक्त पैसे नहीं थे। तो तीन साल तक पैसे बचाकर मां ने कैलाश को पैसे दिए जिससे कैलाश ने पहला म्यूजिक इंस्ट्रुमेंट खरीदा था।
‘शो मस्ट गो ऑन’ में बिलीव करते हैं कैलाश

अब भी जब मुंबई के अंधेरी रेलवे स्टेशन से गुजरते हैं तो नर्वस हो जाते हैं कैलाश खेर। ऐसा इसलिए क्योंकि स्ट्रगल के दौरान एक यही वो जगह थी जहां वो बिना पैसा दिए अपने दिन काट सकते थे। इस तरह के दिन और कई अच्छे बुरे अनुभव के बाद कैलाश खेर बने कैलाश। वो बताते हैं कि उन दिनों रेलवे स्टेशन पर एक चाय वाला उनका दोस्त हुआ करता था। अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बर्थडे बॉय कैलाश खेर ने बताया, मेरे कुछ दोस्त हैं जो मेरे करियर को ये मुकाम दिलाने में काफी मददगार रहे। मेरे एक दोस्त ने मेरा नाम म्यूजीशियन राम संपत को सुक्षाया था। वो उस वक्त नक्षत्र डायमंड के कमर्शियल के जिंगल के लिए एक नई आवाज ढूंढ रहे थे। इस जिंगल से भले ही कैलाश को कोई पहचान नहीं मिली। लेकिन इसकी वजह से उन्हें 5 हजार रुपए मिले थे। जो उस वक्त दिन काटने के लिए उनके लिए बेहद जरूरी थे।

 

अपने परिवार के बहुत करीब हैं कैलाश खेर अपने परिवार के बहुत करीब हैं कैलाश खेर

 

कैलाश के लिए जिंदगी एक दम से नहीं बदली। ऐड जिंगल से शुरुआत करने वाले कैलाश सही लोगों की संगत में आने लगे। ऐसे स्टूडियो में जाने लगे जहां जाना हर किसी का सपना होता है। कैलाश को फिल्म वैसा भी होता है पार्ट-2 के लिए एक गाना ऑफर हुआ। ‘अल्लाह के बंदे’ जी हां वो गाना जिसने कैलाश खेर को एक पहचान दिलाई इसी फिल्म से है। लेकिन फिल्म चली नहीं। कैलाश का बड़ा ब्रेक शाहरुख के बैनर ड्रीम्ज अनलिमिटेड प्रोडक्शन के बैनर तले फिल्म चलते-चलते को कह सकते हैं।

 

मुंबई में रेलवे स्टेशन था पहला घर मुंबई में रेलवे स्टेशन था पहला घर

 

कैलाश कहते हैं, जब आदेश श्रिवास्तव ने मुझे ‘तुझ पर गगन’ ऑफर किया तो मुझे लगा ये गाना मुझे पहचान दिलाएगा। लेकिन मुझे झटका लगा जब गाने की कैसेट मेरे हाथ में थमाई गई और उसमें उस गाने में सुखविंदर सिंह की आवाज थी। खेर ने बताया कि उस वक्त मैं स्ट्रगलर था। मेरी सारी उम्मीदें उस गाने से थीं। इसलिए मुझे बहुत बुरा लगा था।

 

पिता की मौत के दिन भी था प्रोग्राम, लेकिन कमिटमेंट भूले नहीं कैलाश पिता की मौत के दिन भी था प्रोग्राम, लेकिन कमिटमेंट भूले नहीं कैलाश

 

उन्होंने कहा, ईमानदारी से कहूं तो मैं ‘अल्लाह के बंदे’ गाने को भूल ही गया था। क्योंकि वो एक स्मॉल बजट फिल्म थी। मुझे उसके रिलीज होने पर भी शक था। मुझे नहीं पता था कि ये गाना मुझे रातों-रात एक नाम बना देगा। कैलाश अपनी आवाज को लेकर शुरुआत में बहुत नर्वस रहा करते थे। क्योंकि उनकी आवाज और सिंगिंग स्टाइल बहुत ही अलग था। उन्होंने बताया कि गाना सीखने के लिए वो अपने घर मेरठ से भाग कर दिल्ली आ गए थे। उन्होंने करीब 15 अलग-अलग लोगों से संगीत सीखा लेकिन सभी ने उन्हें बाहर निकाल दिया।

 

अपने पापा की पसंद से हुई है कैलाश की शादी अपने पापा की पसंद से हुई है कैलाश की शादी

 

सिंगिंग तक रास्ता बनाने से पहले कैलाश साड़ी एक्सपोर्ट बिजनेस भी कर चुके हैं। दिल्ली शिफ्ट हो चुते उनके परिवार ने उन्हें फैमिली फ्रेंड का बिजनेस ज्वाइन करने को कहा था। कैलाश ने वो काम भी शुरू किया था। लेकिन दो साल मेहनत करने के बाद भी सफल नहीं हुए। वो फ्रस्ट्रेशन में चले गए थे। इसके बाद वो फैसला कर चुके थे कि उन्हें मुंबई आना है। इस फैसले के बाद कैलाश ने कभी मुड़ कर नहीं देखा। वो कहते हैं , मुझे अब भी वो खयाल डरा देता है कि अगर तब भी कुछ नहीं होता तो मैं क्या करता।

 

शुरुआत में अपनी आवाज को लेकर नर्वस रहते थे कैलाश शुरुआत में अपनी आवाज को लेकर नर्वस रहते थे कैलाश

अपने पूरे स्ट्रगल टाइम में कैलाश को अपने परिवार का पूरा साथ मिला। उनकी शादी भी पिता की मर्जी से ही हुई थी। कैलाश के पिता ने उनके लिए एक लड़की ढूंढ ली थी। लेकिन अपने बिजी शेड्यूल की वजह से कैलाश कई बार शादी की डेट आगे बढ़ा चुके थे। कैलाश बताते हैं, मेरे बार-बार शादी पोस्टपोन करने से परेशान मेरे पिता ने एक फाइनल तारीख तय की और कहा कि अब मैं मर भी जाऊं तो इस तारीख को आगे मत बढ़ाना। बार-बार ऐसा करने से लड़की वालों को बहुत बुरा लगता होगा। इस वजह से मैंने 14 फरवरी को शादी की।

 

 'शो मस्ट गो ऑन' को सार्थक करते हैं कैलाश ‘शो मस्ट गो ऑन’ को सार्थक करते हैं कैलाश

कैलाश अपने पिता के बहुत करीब थे। उनकी जिंदगी का एक बड़ा इम्तेहान उनके पिता की मौत के दिन ही हुआ था। जी हां 21 नवंबर 2011 को उन्हें दिल्ली में एक प्रोग्राम के लिए आना था। उसी दिन उनके पिता की मौत हुई थी। लेकिन कैलाश प्रोग्राम के ऑर्गेनाइजर के साथ किया वादा पूरा करने के लिए दिल्ली पहुंच गए। कैलाश सही वक्त पर वहां पहुंचे और परफॉर्म किया। किसी को नहीं पता था कि कैलाश कितना बड़ा गम साथ लिए परफॉर्म कर रहे हैं। इसे कहते हैं कलाकार जिसने ‘शो मस्ट गो ऑन’ जैसे शब्दों को सिद्ध किया।

 

मुंबई में पहला दोस्त एक चाय वाला था मुंबई में पहला दोस्त एक चाय वाला था

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  1. A
    alok srivastava
    Jul 7, 2016 at 5:59 pm
    kailash खेर जी को बहुत हैप्पी birth dayउनके बर्थडे पैर=अलोक श्रीवास्तव
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    Reply
    1. नगेन्द्र भाटी
      Jul 7, 2016 at 8:58 am
      हैप्पी बड़े कैलश खैर ..... जमीन से जुडा इंसान है...भगवान इन्हे और तरक्की दे...
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      Reply
      1. S
        sanjay
        Jul 7, 2016 at 9:29 am
        What is your opinion? very nice
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        Reply