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फिल्म रिव्यू: फिल्लौरी- इश्क की मारी भूतनी की कहानी

यह फिल्म टिम बर्टन की फंतासी फिल्म ‘कॉर्प्स ब्राइड’ से प्रेरित है।
Author March 25, 2017 02:35 am
फिल्लौरी फिल्म के एक सीन में अनुष्का शर्मा और दिलजीत दोसांझ।

कलाकार – अनुष्का शर्मा, सूरज शर्मा, दिलजीत दोसांझ, मेहरीन कौर पीरजादा

निर्देशक – अंशाई लाल

भूतनी नाम से अक्सर आदमी को डर लगता है। कोई कह दे कि फलां पेड़ पर भूतनी रहती है तो आदमी उसके आसपास से गुजरते हुए हनुमान चालीसा जरूर पढ़ेगा। पर ै‘फिल्लौरी’ देखने के बाद आपका नजरिया बदल सकता है क्योंकि यहां दिखाई गई भूतनी डरानेवाली नहीं बल्कि इश्क की मारी है, जो कभी किसी की मोहब्बत में डूबी हुई थी और अभी भी प्यार चाहती है। वैसे कहा यह जा रहा है कि यह फिल्म टिम बर्टन की फंतासी फिल्म ‘कॉर्प्स ब्राइड’ से प्रेरित है। इसमें फंतासी के तत्व हैं, लेकिन रोमांस और हंसी भी है। कह सकते हैं कि यह हास्य-प्रेम-फंतासी प्रधान फिल्म है। हालांकि इसी चक्कर में कई जगहों पर ढीली भी हो गई है। लेकिन अपने गानों की वजह से ये कुछ तो लोकप्रिय होगी। ‘दम दम उड़ती है दुआ सौ पंख लगा के तेरे नाम के’ बोल वाला गाना तो वैसे भी अपने झंडे संगीत उद्योग में गाड़ चुका है। ‘वाट्स अप’ नाम का गाना भी कई जगहों पर धूम मचा रहा है।

खैर, ‘इस पेड़ पर भूतनी रहती है’ वाला जुमला ही इस फिल्म के केंद्र में है। कनन (सूरज शर्मा) नाम का एक नौजवान विदेश से भारत यानी पंजाब आता है। शादी करने के लिए। अनु नाम की एक लड़की से उसकी शादी तय है। लेकिन उसकी कुंडली में मांगलिक योग है जिसके कारण शादी अशुभ हो सकती है। ऐसे में ज्योतिषी या पंडित काम आते हैं। वैसे उनका पेशा ही है अशुभ को शुभ में बदलना। तो कनन के परिवार को राय दी जाती है कि पहले उसकी शादी एक पेड़ से करा दी जाए और बाद में अनु से। परिवार वाले कनन की शादी एक पेड़ से करा देते हैं। अब किसे मालूम है कि उस पेड़ पर एक भूतनी (अनुष्का शर्मा) का वास है। दुनियावाले जो भी समझते रहें, भूतनी तो यही मानेगी कि लड़के की शादी उससे हुई है, किसी पेड़ से नहीं और वह ऐसा मानेगी भी क्यों नहीं, क्योंकि कभी वह भी जीती जागती लड़की थी और उसका नाम शशि था। वह कभी रूप लाल फिलौरी नाम के एक गवैये (दिलजीत दोसांझ) से प्रेम करती थी। लगभग 98 साल पहले। पर दोनों का मिलन नहीं हो सका और शशि अतृप्त आत्मा बनके पेड़ पर वास कर रही थी।

फिल्म में दो दुनिया है। एक है वर्तमान की जिसमें कनन और अनु (मेहरीन कौर पीरजादा) हैं और दूसरी है शशि और फिलौरी की। दोनों दुनिया समानांतर चलती है और इश्क की पेचीदगियां दिखाती है। फिल्म का मुख्य जोर इस बात पर हो जाता है कि शशि अपने प्रेमी से शादी क्यों नहीं कर सकी। पर इन समानांतर दुनियाओं के मेल से जो जादू पैदा होना चाहिए था वह नहीं होता। फिल्म कुछ हिस्सों में मनमोहक लगती है और कुछ में बोर करती है। पटकथा कमजोर है। इसी कारण किसी कलाकार का चरित्र पूर्णता में नहीं उभरता। बीच में ही कहीं टूट जाता है।

 

 

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