March 25, 2017

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फरहान अख्तर ने अपनी बेटियों को लिखा ओपेन लेटर, उठाए Rape और Sexual Violence जैसे गंभीर मुद्दे

मुझे तुम्हारी फेसबुक पोस्ट से यह पता चलता है कि तुम इस दुनिया में उड़ने के लिए अपने पंख फैलाती हो, तुम परेशान होती हो और खींजती हो।

Author नई दिल्ली | October 3, 2016 14:00 pm
बॉलीवुड अभिनेता फरहान अख्तर।

हाल ही में फिल्म ‘रॉक ऑन’ के सीक्वल ‘रॉक ऑन 2’ में नजर आए बॉलीवुड अभिनेता और संगीतकार फरहान अख्तर ने अपनी बेटियों के लिए एक खुला पत्र लिखा है। फरहान के इस पत्र को देश की बेटियों के लिए पत्र कहा जाना भी गलत नहीं होगा। इस लेटर में उन्होंने समाज में महिलाओं के प्रति फैली कुरीतियों और हो रहे सेक्सुअल वॉयलेंस के बारे में बात की है। यह पत्र भावनाओं से ओत-प्रोत और महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाता है। फरहान ने यह पत्र अंग्रेजी भाषा में लिखा है जिसे जनसत्ता आपके लिए हिंदी में पेश कर रहा है। तो आइए पढ़ाते हैं आपको फरहान का लिखा यह पत्र हिंदी में।

प्यारी बेटियों,
मैं तुम्हें सेक्सुअल वॉयलेंस या रेप जैसे मुद्दे पर कुछ कैसे लिख सकता हूं? मेरा स्वभाव, एक पिता का स्वभाव है, सुरक्षा और पालन-पोषण के लिए, लेकिन यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर हमें सामने आना चाहिए और बात करनी चाहिए। तो प्यारी बेटियों, अपनी टीम की एक जिंदादिल लॉयर की 2013 में हुई दर्दनाक हत्या के बाद मेरे द्वारा लिखी एक कविता की कुछ लाइनों से इस बात को शुरू करते हैं। तब तुम बहुत छोटी थीं, सिर्फ 12 की, और मैं बस चाहता था कि तुम मुस्कुराती रहो, निर्भीक रहो, और अजेय रहो, जैसे तुम थीं। तब रेप की कोशिश करने, हत्या करने जैसे वीभत्स मुद्दों को उठाना मेरे लिए आसान नहीं था। अब तुम 16 की हो गई हो और मैं तुम्हारे मन में आने वाले सवालों को पढ़ सकता हूं। हां, वे सभी सवाल जो मेरे मन में भी आते हैं।

यह कैसा देश है जहां मैं रह रहा हूं?
जो उसके प्यार करने के अधिकार को छीन लेता है
उसके साथ एक लोहे की रॉड से बर्बर व्यवहार करता है
बेखौफ उसके साथ बलात्कार करता है
क्या उसके आंसुओं के साथ न्याय होगा…
…मैं अपनी बेटियों को क्या बताऊं?
कि वह किसी भेड़ की तरह हलाल कर दिए जाने के लिए बड़ी हो रही हैं
हमें बदलाव लाना होगा.
रीबूट, रिफॉर्म, रिअरेंज
और कभी हार नहीं माननी होगी
कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमारा सर कितना घूमता है
बस इस सवाल को पूछते रहिए
मैं यह किस देश में रह रहा हूं?

मैं जानता हूं हमारा सर घूमेगा। मैं जानता हूं हमारे युवा दिमाग इस पर बहुत सोचते हैं कि हम महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। हमने कोशिश की है, जैसे माता-पिता करते हैं, तुम्हे समानता के बारे में सिखाने की, कि कभी भी लड़का और लड़की के बीच फर्क नहीं किया जाना चाहिए, कि तुम्हें चुनाव का अधिकार होना चाहिए; यहां तक कि अच्छे और बुरे तरीके से छुए जाने के बारे में भी। हमने विवाद खड़े किए हैं। माता-पिता के तौर पर, हमने तुम्हे बताया है, यदि तुम किसी के द्वारा खुद को छुए जाने को लेकर सहज नहीं हो तो वह बुरी तरीके से छुआ जाना है, और तुम्हें किसी को भी इसकी इजाजत नहीं देनी चाहिए। तुम्हें उस शख्स से कहना चाहिए कि मुझे यह पसंद नहीं है। ऐसा मत सोचो कि क्योंकि तुम छोटी हो तो किसी को तुम्हारे साथ कुछ करने की अनुमति मिल गई है। मैंने तुमसे कहा है कि यदि तुम्हें यहां तक कि मुझसे भी हग करने का मन नहीं है तो मुझे भी तुम्हें छूना नहीं चाहिए। तुम्हारे शरीर पर सिर्फ तुम्हारा और तुम्हारा अधिकार है।

मुझे तुम्हारी फेसबुक पोस्ट से यह पता चलता है कि तुम इस दुनिया में उड़ने के लिए अपने पंख फैलाती हो, तुम परेशान होती हो और खींजती हो। मैं जो पहनना चाहती हूं, मैं वह क्यों नहीं पहन सकती? मैं अपनी पहचान का चुनाव क्यों नहीं कर सकती? मैं आजाद दुनिया में रहने के सही मायने में आजाद क्यों नहीं रह सकती? हां, बॉलीवुड में भी एक पिता होने के नाते मैं अपने सर को रेत में नहीं धंसा सकता क्योंकि चारों और कुछ सच्चाईयां हैं। हम एक असुरक्षित, व्यापक तौर पर असमान दुनिया में रहते हैं। हमने तुमसे कभी नहीं कहा कि क्या मत पहनो या बाहर मत जाओ। अगर तुम नीले रंग के बाल रखना चाहो तो वह भी रख सकती हो। तुम एक आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और होशपूर्ण महिला बनने जा रही हो। तुमने मुझे हमारी इंडस्ट्री द्वारा बनाई जा रही फिल्मों के बारे में ताया है, कि किस तरह कभी-कभी स्त्रियों को किसी चीज की तरह दिखाया जाता है और मैं हमेशा जवाब तलाशता रहता हूं। मुझे तुमसे महिलाओं और लैंगिक समानता जैसे मुद्दों पर बात करके अच्छा लगता है।

गौरतलब है कि अब से कुछ दिनों पहले फिल्म पिंक की रिलीज से पहले एक्टर अमिताभ बच्चन ने भी अपनी पोती नव्या नवेली के नाम एक खुला पत्र लिखा था जिसे लोगों ने व्यापक तौर पर पसंद किया था। बाद में इस बात का खुलासा अमिताभ ने एक फिल्म के प्रमोशन के दौरान किया कि वह लेटर फिल्म के प्रमोशन का हिस्सा था। इस बात का विचार उन्हें फिल्म के निर्माता शूजीत सरकार ने दिया था कि उन्हें एक ऐसा पत्र लिखना चाहिए जिससे न सिर्फ लोगों को फिल्म की समरी का आइडिया हो बल्कि लोगों को इससे प्रेरणा भी मिले।

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अभिनेता फरहान अख्तर द्वारा लिखे गए पत्र का बाकी अंश…

Yes, in Bollywood — and Zoya and I are conscious of crudity and vulgarity — the eye of the camera often goes on overdrive. As an industry, we are guilty of normalising the invasion of a woman’s space, the woman’s body. Those watching our movies think it is ‘normal’ to harass a college or a village girl even when the girl is saying she’s not interested. You must also have seen movies in which the entire supporting cast conspires to help the ‘hero’ know the girl he’s interested in. They get together to help him (not her); they block her path wherever she goes. They conspire to bring them face to face, to the point where he’ll hold her, catch her dress, even jump on top of her in some instances. Such behaviour — which flies in the face of consent that I’ve always tried to talk to you about — has been normalised by movies. Stalking , unfortunately, has become a mutated form of cinematic romance.
As a filmmaker, I need to be wary of such visualisation. We can’t put a blindfold around our eyes and say, I’m doing this for entertainment, or believe that it has no influence on the audiences. Our fans gather around us in the hundreds, even thousands, and they’re there because of our work, because they idolise us, because they’re in love with our screen image. That bestows on us a great sense of responsibility. I too, dear daughter, function in a field where, like you, I’m constantly battling for freedom of speech, of expression, of creative expression.
Rape and sexual harassment have often figured in movies. Earlier, the ‘bad guy’ was always the villain but think about it, the villain who used to be the stalker in college, for example, has now been replaced by the hero. Step back and see and what you’ll realise is that the creep you hated in movies is the one who is ‘getting’ the girl. Worse, the girl ends up believing that he’s stalking her because he loves her and she ends up thinking, ‘he must really love me’.
You and I have always had open conversations. We’ve always understood the importance of communication. I do worry about you when you’re out as any father would do. But like all fathers, I want you to remember that through your journey in life, you have a friend in me. You must always chase your dreams and live your life with freedom. Of course, be safe. You know what safe is. Have your wits about you. Be smart and be in control of yourself.
And as you ask yourself the question, what is this country that I live in, always remember:
I understand you little girl
Your rage, your surprise
Your confusion about the beast in human disguise
I stand with you, little girl, I stand with you
Yours,
Dad

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First Published on October 3, 2016 1:46 pm

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