December 04, 2016

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अब विदेशी साइट से मूवी या गाने डाउनलोड करने पर देना होगा 15 फीसदी टैक्स

सुनील ने कहा सेवा देने वाली वेबसाइट्स इस टैक्स को ग्राहक से लेंगे जो इनको डाउनलोड करेगा इसलिए इससे अब ग्राहकों को बड़ी रकम चुकानी पड़ेगी।

1 दिसंबर से विदेशी साइट से मूवी डाउनलोड करने पर देना होगा सर्विस टैक्स।

अगली बार अगर आप किसी विदेशी साइट से मूवी या फिर गाना डाउनलोड करते समय या फिर किसी विदेशी साइट से कुछ स्टोरेज खरीदते समय थोड़ा ध्यान जरूर रखें। एक दिसंबर से आपको इस सर्विस के लिए 15 फीसदी टैक्स देना पड़ सकता है। घरेलू सप्लायर का कहना है कि भारत में जिन लोगों ने घरेलू वेबसाइट से मूवी डाउनलोड की हैं उन्हें इससे छूट मिली है जबकि विदेशी साइट से डाउनलोड करने वालों पर टैक्स लगेगा। सरकार, स्थानीय निकायों या सरकारी एजेंसी को इससे छूट मिलेगी। ओवरसीज सप्लायर को बिजनेस टू बिजनेस ट्रांसेक्शन के आधार पर टैक्स देना होगा। हालांकि इसमें भी इंफॉरमेशन बेस्ड डाटाबेस (इंटरनेशनल टैक्स जर्नल के सब्सक्रिप्शन) में छूट मिलेगी। अपने चौंकाने वाले फैसले में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ एक्साइज एंड कस्टम (सीबीईसी) ने एक नियमावली बना दी है जिनमें साफ लिखा है कि किन सर्विस पर आपको टैक्स देना होगा।

इस नियम की मुख्य बात यही है कि अगर सेवा प्रदाता देश के बाहर हो तो उस सेवा को विदेशी मानते हुए टैक्स देना होगा। हालांकि अकेले शख्स, सरकार, स्थानीय निकाय या सरकारी एजेंसी को टैक्स से छूट मिलेगी। एक दिसंबर से सेवा प्रदाता के विदेशी होने पर आपको सर्विस टैक्स देना होगा। इसका मतलब यह हुआ कि हर डाउनलोड के लिए आपको टैक्स देना होगा। इससे विदेशी कंपनियों को कई तरह से फायदा होगा। इससे उन्हें विज्ञापन देने, क्लाउड होस्टिंग, गाने, ई-बुक और गेम जैसी सेवाएं देने वाली कंपनियों पर प्रभाव पड़ेगा। इनकम टैक्स विशेषज्ञ सुनील गाभावालिये ने कहा- अब हर विदेशी सेवा देने वाली कंपनी को भारत में खुद को रजिस्टर करता हुए सर्विस टैक्स देना होगा।

सुनील ने कहा सेवा देने वाली वेबसाइट्स इस टैक्स को ग्राहक से लेंगे जो इनको डाउनलोड करेगा इसलिए इससे अब ग्राहकों को बड़ी रकम चुकानी पड़ेगी। सीबीईसी की नोटिफिकेशन के अनुसार सर्विस टैक्स के अंतर्गत विज्ञापन. क्लाउड सर्विस, ई-बुक्स, मूवी, म्यूजिक, सॉफ्टवेयर और तमाम दूसरी सर्विस आएंगी। इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट के जरिए आने वाले डिजिटल कंटेंट, डिजिटल डाटा सेटोरेज और ऑनलाइन गेम भी इसमें शामिल हैं। इंडस्ट्री के लोगों का कहना है कि इस तरह के टैक्स की पेमेंट करते समय कुछ प्रैक्टिकल दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है अगर सरेविस देने वाला भारत में नहीं रहता है।

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First Published on November 14, 2016 4:29 pm

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