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क्या दो रुपए के सिक्के ने वाकई में बदली कॉमेडियन महमूद की जिंदगी

क्या वाकई में ऐसा कुछ हुआ था। अगर हां, तो किसने उन्हें वह सिक्का दिया। यह जानने के लिए आइए थोड़ा पीछे चलते हैं। हम बात कर रहे हैं 1940 से...

महमूद एक जमाने में कॉमेडी फिल्मों के किंग थे। दिखने में मस्त-मौला और खुश थे। लेकिन जिंदगी के शुरुआती दिन बड़े गम भरे रहे। आप सोच भी नहीं सकते कि इतना खुशमिजाज शख्स कठिन दौर से गुजरा होगा। इसी से जुड़ा एक किस्सा महमूद को लेकर प्रचलित है। कहा जाता है कि उनकी जिंदगी बदलने में दो रुपए के सिक्के का हाथ था।

क्या वाकई में ऐसा कुछ हुआ था। अगर हां, तो किसने उन्हें वह सिक्का दिया। यह जानने के लिए आइए थोड़ा पीछे चलते हैं। हम बात कर रहे हैं 1940 से 1950 की। तब स्टेज डांसिंग और एक्टिंग में एक नाम था मुमताज अली। उनका करियर चरम पर था। सो काम मिलने पर दिक्कत होती थी।

घर में छह बच्चे थे। उन सब का पेट भी पालना था। यही कारण था कि बड़ी बेटी मीनू मुमताज फिल्मों में डांस करने लगीं। कुछ पैसे वह कमा कर लातीं और घर चलाने में सहयोग करतीं। छुटपुट मदद से लेकिन छह लोगों का बसर न हो पाता।

यही सब देखकर मुमताज के बेटे महमूद अली काम करने लगे। वह छोटे-मोटे करते थे। तब उन्होंने अभिनेत्री मीना कुमार को टेनिस की कोचिंग दी थी। डायरेक्टर पीएल संतोषी के ड्राइवर के तौर पर काम किया। शादी के बाद गुजारा कठिन हुआ। महमूद को तब ख्याल आया कि फिल्म में काम किया जाए। लेकिन यह राह उतनी भी आसान नहीं थी। इस बीच वह कई स्टूडियो के बाहर मशहूर कलाकारों की मिमिकरी करने लगे, जिससे उन्हें कुछ मिल जाते।

एक दिन वह भूख से बेहद परेशान थे। एक बाबा के पास गए। उनसे खाने के लिए दो रुपए मांगे। वह बोले, फिल्मों में किस्मत आजमा रहे हो क्या। इसके बाद उन्होंने उन्हें दो का सिक्का दिया। कहा- ऊपर वाले को याद करो। सब ठीक हो जाएगा। इस घटना के बाद मदमूद की मानिए जिंदगी ही बदल गई। उन्हें फिल्में मिलने लगीं और वे चलने भी लगीं। बहुत लोग कहते हैं कि यह सब उसी सिक्के का कमाल था। वह उनके लिए लकी साबित हुआ।

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