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दिलीप कुमार की फिल्म 40 बार देख धर्मेंद्र ने तब दांव पर लगा दिया था सब कुछ, छोड़ दिया था घर

बात साल 1957 की है। धर्मेंद्र पंजाब के अमृतसर में रहते थे। परिवार भी यहीं साथ था। जब वह नौवीं क्लास में...

धर्मेंद्र ने हिंदी सिनेमा में बेतहाशा नाम-पैसा और इज्जत कमाई है। आज वह जिस मुकाम पर वह हैं, उनके काम को बताने की जरूरत नहीं है। लेकिन एक्टर बनने का सपना पूरा करना उनके लिए इतना आसान नहीं था। शुरुआती दौर में उन्हें इसके लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाना पड़ा था। उन्हें इसके लिए घर छोड़कर मुंबई आना पड़ा था। लेकिन उनके अंदर एक्टर बनने का भूत सवार कैसे हुआ। वह मुंबई आने के लिए कैसे प्रेरित हुए, जानते हैं आप।

दरअसल, बात साल 1957 की है। धर्मेंद्र पंजाब के अमृतसर में रहते थे। परिवार भी यहीं साथ था। जब वह नौवीं क्लास में थे, तो पहली फिल्म देखी। एक्टर दिलीप कुमार की ‘शहीद’। वह इससे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इसे 40 बार देखा। पिता स्कूल में मास्टर थे। उन्हें ये सब पसंद कतई नहीं था। उन्हें बेटे के इरादे ठीक न लगे, तो उन्होंने उनकी शादी कराने के बारे में सोचा।

लड़की भी खोज ली गई। वह कोई और नहीं, बल्कि प्रकाश कौर थीं। धर्मेंद्र तब 19 साल के हो चुके थे। घर वालों की सहमति से दोनों को शादी के पवित्र बंधन में बांध दिया गया। लेकिन धर्मेंद्र शादी कर के वहीं बसना नहीं चाहते थे। वह तो फिल्मों दौड़ना, घूमना, उड़ना और वह सब करना चाहते थे, जो उन दिनों एक्टर्स फिल्मों में आकर करते थे।

सो एक दिन उन्होंने इस बारे में मां से बात की। उन्होंने बेटे को सलाह कि वह फिल्म वालों को अर्जी लिखे। ऊपर वाले की भी उन दिनों धर्मेंद्र पर महरबानी थी, लिहाजा एक नेशनल टैलेंट हंट में उन्हें चुना गया। यह वही मौका था, जब धर्मेंद्र को अपने घर-गांव को अलविदा कहना पड़ा था। मां-बाप, नई नवेली दुल्हन प्रकाश सबकी आंखें नम थीं। यहां तक कि उन्होंने एक्टिंग के सपने के लिए अपनी नौकरी भी छोड़ दी थी।

वह जब मुंबई पहुंचे तो यहां उन्हें मशहूर डायरेक्टर बिमल रॉय की फिल्म में ब्रेक मिला। 1500 रुपए महीने बतौर तनख्वाह और पांच सितारा होटल में रहने की व्यवस्था भी थी। धर्मेंद्र इस सबसे खुश थे। उन्हें लगा कि शायद वह अपनी मंजिल के करीब हैं। लेकिन बदकिस्मती से वह फिल्म ही नहीं बनी। वह इसके बाद स्ट्रग्लर्स के ठीये ‘मरीना लॉज’ पहुंचे। वहां एक खास बिस्तर बहुत मशहूर था। उसे लकी माना जाता था। कहा जाता था वह जिसे भी मिलता, वह स्टार बनता था। उसकी किस्मत चमक जाती थी।

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