December 03, 2016

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नायाब फिल्मों की यादें छोड़ संपन्न हुआ फिल्म समारोह

भारत के 47 वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह की समापन फिल्म किम जी वुन की दि एज आॅफ शैडोज, आॅस्कर अवार्ड के लिए भी नामांकित हुई है।

Author December 1, 2016 06:03 am
तुर्की के फिल्मकार मुस्तफा कारा ‘कोल्ड आॅफ कालंदर’ के लिए यूनेस्को गॉधी मेडल पुरस्कार लेते हुए। साथ मे हैं केंद्रीय सूचना और प्रसारण राज्यमंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़, यूनेस्को की प्रतिनिधि लोला पौगी गाजौन और एसएस राजामौली।

दक्षिण कोरिया के किम जी वुन की फिल्म दि एज आॅफ शैडोज के प्रदर्शन और रंगारंग पुरस्कार वितरण समारोह के साथ भारत के 47 वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह गोवा का समापन हो गया। फिल्म बाहुबली के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित एसएस राजामौलि समापन समारोह के मुख्य अतिथि थे। ईरान के रजा मीरकरीमी की डॉटर को सर्वश्रेष्ठ फिल्म (स्वर्ण मयूर और चालीस लाख रुपए) और इसी फिल्म के फरहद असलानी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (रजत मयूर और दस लाख रुपए) का पुरस्कार मिला। डॉटर अजीजी नाम के अड़ियल पिता और उनकी आजाद खयाल बेटी सेतरेह के बीच टकराहटों में चलती है। यह टकराव ईरान की नई पीढ़ी में इन दिनों साफ-साफ देखा जा रहा है। सेतरेह अपने पिता की मर्जी के खिलाफ तेहरान जाने का फैसला करती है। एक अड़ियल किंतु मजबूर पिता के रूप मे फरहद असलानी का अभिनय काफी सराहा गया है।

सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार (रजत मयूर और दस लाख रुपए) लातविया की एलिना वास्का को फिल्म मैलो मड में बेहतरीन अभिनय के लिए दिया गया। एलिना वास्का ने एक 17 साल की लड़की की भूमिका की है जो एक गांव मे अपनी दादी और छोटे भाई को पालते हुए मुश्किल जीवन जी रही है।सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार (रजत मयूर और पंद्रह लाख रुपए) तुर्की के बरीस काया और सोनेर कनेर को संयुक्त रूप से उनकी फिल्म रऊफ के लिए दिया गया। रऊफ एक ग्यारह साल के बच्चे की निगाह से दुनिया को समझने की कोशिश है जो अपने से बड़ी उम्र की एक औरत से प्यार करता है। बरीस काया ने पुरस्कार लेने के बाद भावुक होकर कहा कि वे सालों से भारत आने का सपना देखते थे। आज पुरस्कार लेकर जा रहे हैं। दक्षिण कोरिया के ली जून इक को उनकी फिल्म द थ्रोन के लिए स्पेशल जूरी पुरस्कार (रजत मयूर और पंद्रह लाख रुपए) से नवाजा गया। चिली की पेपा सेन मार्टिन को उनकी फिल्म रारा के लिए निर्देशक की पहली फिल्म का सेंटेनरी अवार्ड (रजत मयूर और दस लाख रुपए) दिया गया। शांति, सहिष्णुता और अहिंसा को समर्पित आइसीएफटी यूनेस्को गांधी मेडल तुर्की के मुस्तफा कारा की फिल्म कोल्ड आॅफ कालंदर को दिया गया।

भारत के 47 वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह की समापन फिल्म किम जी वुन की दि एज आॅफ शैडोज, आॅस्कर अवार्ड के लिए भी नामांकित हुई है। इस फिल्म को देखकर पता चलता है कि एक थ्रिलर भी सिनेमाई गुणवत्ता के उत्कर्ष पर जा सकता है। कोरिया के दो सुपर स्टार अभिनय में एक-दूसरे पर बीस पड़ते है- सोंग कॉग हो और गोंग यू । पटकथा इतनी सधी हुई कि भाषा न जानने के बावजूद दो घंटा बीस मिनट कब बीता, पता नहीं चलता। कला निर्देशक ने जिस कुशलता से 1920 के शंघाई और सिओल को रचा है, वह जादुई आकर्षण पैदा करता है। हम सांस रोककर देखते हंै कि अब क्या होगा। तभी कोई घटना तेज गति से पटकथा को घुमा देती है। शंघाई से सिओल जा रही ट्रेन में जापानी सेना का खोज अभियान काफी दिलचस्प है।

पटकथा बस इतनी है कि 1920 के दशक में कोरिया पर जापान का शासन था। जापानी सेना का एक कोरिआई कमांडर ली जूल चुल को कोरियाई क्रांतिकारियों के बीच घुसपैठ के सीक्रेट मिशन पर भेजा जाता है। वह क्रांतिकारियों के नेता किम वु जिम से मिलता है। इतिहास के उस नाजुक मोड़ पर दो विरोधी एक-दूसरे का मतलब समझते हुए भी करीब आते हैं। सिओल के जापानी मुख्यालय को बम से उड़ाने की योजना के साथ सारे क्रांतिकारी शंघाई में जुटते हैं, जहां जापानी सेना पहले से ही उनका इंतजार कर रही है। दोनों ओर से खुफिया सूचनाएं लीक होती हंै। कोई नहीं जान पाता कि यह काम कौन कर रहा है। संशय के माहौल में बम बनाने के सामान से लदा एक ट्रक सिओल की ओर जा रहा है। जिस ट्रेन से क्रांतिकारी सिओल जा रहे हैं, उसमें भी जापानी सेना के अधिकारी उनकी खोज में है। जापानी सेना का एक कोरिआई कमांडर ली जूल चुल ट्रेन मे कई बार क्रांतिकारियों ने नेता किम वु जिम को जापानियों से बचाता है। उस पर राष्ट्रद्रोह का अभियोग लगता है।

उसे एक महीने की जेल हो जाती है और नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाता है। उधर सिओल रेलवे स्टेशन पर जापानी सेना क्रांतिकारियों के नेता किम वु जिम को उनके कई साथियों के साथ पकड़ने में कामयाब होती है। एक महीने बाद जब ली जूल चुल जेल से बाहर आता है तो उसे लगता है कि सारी उम्र जापानियों की गुलामी का सिला मिला अपमान और तिरस्कार। उसे याद आता है कि एक रात क्रांतिकारियों के नेता किम वु जिम ने कहा था- हम इसलिए तुम पर भरोसा करते है कि यदि हम सब जापानियों के हाथों मारे गए तो तुम्हारे रूप मे हमारा एक आदमी बचा रहेगा जो हमारे स्वाधीनता संग्राम को जारी रखेगा। वह कोरियाई वेटरों की मदद से सेना के आफिसर्स क्लब में पहुंचता है, जहां जापानी सेना क्रांतिकारियों के खात्मे का जश्न मना रही है। वह टाइम बम से पूरे क्लब को उड़ा देता है। अंतिम दृश्य में हम उसे क्रांति की कमान एक कोरियाई युवक के हाथ मे सौंपकर जंगल की ओर इतमीनान और प्रायश्चित के संतोष के साथ जाते हुए देखते हंै।

 

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First Published on December 1, 2016 4:46 am

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