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अनुराग कश्यप बोले- मैंने सरकार पर विश्‍वास किया लेकिन मुझे अकेला छोड़ दिया, जब सरकार चुप रहेगी तो मैं बोलूंगा

फिल्‍म डायरेक्‍टर अनुराग कश्‍यप ने ट्रॉल करने वाले लोगों को जवाब देते हुए कहा कि वे उन सब मुद्दों पर बोलेंगे जिन पर सरकार चुप्‍पी साध लेती है।
कश्‍यप ने लिखा कि जो लोग किसी वाकये पर चुप्‍पी साधने वाली बात याद दिलाकर सवाल उठाते हैं उन्‍हें बोलने की जरुरत नहीं है।

फिल्‍म डायरेक्‍टर अनुराग कश्‍यप ने ट्रॉल करने वाले लोगों को जवाब देते हुए कहा कि वे उन सब मुद्दों पर बोलेंगे जिन पर सरकार चुप्‍पी साध लेती है। उनका यह जवाब हाल ही में फिल्‍म डायरेक्‍टर संजय लीला भंसाली की जयपुर में पद्मावती की शूटिंग के दौरान पिटाई के संदर्भ में हैं। कश्‍यप ने भंसाली के पक्ष में आवाज बुलंद की थी और पिटाई करने वालों को हिंदू उग्रवादी बताया था। उन्‍होंने फेसबुक पोस्‍ट में लिखा कि उड़ता पंजाब के दौरान उनके साथ जैसा व्‍यवहार हुआ उसने उन्‍हें बोलने को मजबूर किया। इससे पहले वे सरकार पर विश्‍वास करते रहे। कश्‍यप ने लिखा कि जो लोग किसी वाकये पर चुप्‍पी साधने वाली बात याद दिलाकर सवाल उठाते हैं उन्‍हें बोलने की जरुरत नहीं है। उन्‍हें पता है कि कब बोलना है। गौरतलब है कि अनुराग कश्‍यप पहले भी कई मुद्दों पर सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेर चुके हैं।

कश्‍यप ने लिखा, ” उस समय तुम कहां थे, यह बात पूछने वाले काफी लोग हो गए हैं। उनके लिए एक ही जवाब है, मैं यहीं था और मुझे बोलने की जरुरत नहीं थी क्‍योंकि जिन लोगों को बोलना था उन्‍होंने आवाज उठाई थी। फिर चाहे जायरा(वसीम, दंगल एक्‍ट्रेस) का मामला हो, जब सरकार और इसके लोगों ने तुरंत आवाज उठाई और इसकी निंदा की या विवेक(‍विवेक अग्निहोत्री) की फिल्‍म(बुद्धा इन ए ट्रेफिक जाम) इसे सरकार का समर्थन था। तब सरकार चुप्‍पी साध लेती है या उपेक्षा करती है तो मैं बोलता हूं क्‍योंकि उस समय किसी व्‍यक्ति को बोलने की जरुरत होती है।”

उन्‍होंने आगे कहा, ”एफटीआईआई विवाद के समय मुझे चुप रहने का मलाल है क्‍योंकि मैं हमारी सरकार के साथ काम कर रहा था और मुझे विश्‍वास दिलाया गया कि वे स्थिति को बदलने पर काम कर रहे हैं और मैं उनका विश्‍वास किया। मुझे यह बातें सीधे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के जूनियर मंत्री ने कही थी कि आपको इसमें शामिल होने की जरुरत नहीं। हम मामले को सुलझा रहे हैं। मैंने विश्‍वास किया। बाद में सेंसरशिप के मुद्दे पर भी मैंने विश्‍वास किया और चुप रहा। उड़ता पंजाब के दौरान मेरा रास्‍ता बंद हो गया और सब चुप हो गए। उस समय मैंने कुचलने का तरीका देखा और मैं भी एक खिलौना बन गया। तब मैं जागा। और उसके बाद से मैं यहीं हूं और वह बोल रहा हूं जो नहीं बोला गया। यहीं मैं हूं और यहीं मैं रहूंगा। इसलिए आप सभी अपने ‘जब फलां-फलां हो रहा था तब कहां थे के सवाल लेकर निकल जाइए।’ धन्‍यवाद।”

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