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अमोल पालेकर की पत्‍नी का सनी लियोनी के नाम खत- मेरा शरीर, मेरी मर्जी

संध्‍या गोखले ने पत्र में सनी लियोनी का इंटरव्यू लेने वाले पत्रकार की जमकर खिंचाई की है। साथ ही सनी को कुछ टिप्‍स भी दिए हैं।
सनी लियोनी ने कुछ दिनों पहले एक निजी टीवी चैनल को इंटरव्यू दिया था, जिसे लेकर काफी विवाद हो गया था।

बॉलीवुड के वेटरन एक्‍टर अमोल पालेकर की पत्‍नी संध्‍या गोखले ने सनी लियोनी को पत्र लिखा है। आपको बता दें कि कुछ समय पहले सनी लियोनी ने एक निजी टीवी चैनल को इंटरव्यू दिया था, जिसमें पत्रकार ने उनसे कुछ चुभते सवाल पूछे थे, जिसे लेकर उन्‍हें काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था। संध्‍या ने उसी इंटरव्यू के संबंध में यह लेटर लिखा है और पूरे मामले को अच्‍छे से हैंडल करने के लिए सनी लियोनी की तारीफ भी की है। साथ ही उन्‍होंने कुछ टिप्‍स भी दिए हैं, जिनकी मदद से सनी लिसोनी उस मामले को और अच्‍छे तरीके से हैंडल कर सकती थीं।

संध्‍या ने लिखा, ‘मैं यह पत्र इसलिए लिख रही हूं, क्‍योंकि नेशनल टीवी पर एक अपरिपक्‍व पत्रकार की कोशिश को आपने नाकाम कर दिया। आपसे जो पहला सवाल पूछा गया वह था, ‘क्‍या आपको अपने अतीत पर पछतावा है?’ दरअसल पत्रकार का मकसद सिर्फ टीआरपी था।

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संध्‍या ने आगे लिखा, ‘वह पत्रकार ज्‍यादा स्‍मार्ट नहीं था। वह आमिर खान से आगे किसी का नाम ले पाया। ऐसे में तुम्‍हें एंड्रिया ड्वोरकिन, कैथरीन मैक्निोन जैसे नाम लेने चाहिए थे। तुम्‍हें पत्रकार से पूछना चाहिए था, ‘अगर हम महिलाएं “मेरा शरीर, मेरी मर्जी” में विश्‍वास करते हैं तो फिर पोर्नोग्राफी रेगुलेटरी लिमिट के भीतर रहकर क्‍यों नहीं हो सकती है।

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  1. A
    Ajay Patel
    Feb 12, 2016 at 2:18 pm
    घर बैठे बिना एक भी पैसा लगाय आप जॉब कर सकते है! न ही कुछ बेचना है न ही खरीदना ! बस Facebook aur WhatsApp अच्छे से चलना आता हो।। और आप के पास एक Android phone हो । तो लिखे JOB और भेज दे (9713043269) Whats App के इस नंबर पर।
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  2. N
    nadeem
    Feb 12, 2016 at 6:22 am
    साइबेरियन नस्ल के 35 फुट नीचे बर्फ में दबे इंसान को भी सूंघकर खोज लेते हैं.............और मफलर नस्ल के हजारों किलोमीटर दूर वोट बैंक की बदबू को सूंघ लेते हैं !!
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  3. दिनेश
    May 19, 2014 at 1:58 pm
    ये संभव नहीं है की बाजपा संघ के विचार को आगे बढाएं वोट केवल विकास नामक अवधारणा को मिला है जो भी जनमत से गद्दारी करता है वो भारत में फिर कभी सिर नहीं उठा पता जनता एक बार भर्मित हो सकती है मुर्ख नहीं
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  4. D
    Dilip
    May 20, 2014 at 5:10 pm
    मनमोहन ने कब कहा कि इस देश के संसाधनों पर पहला हक़ मुसलमानों का है, कृपया बताएं। दूसरी बात, पहले या दूसरे हक़ की बात है तो वो यह है कि वो हक़ आदिवासियों का है। और एक बात, क्या आप यह सुनना चाहते थे कि इस देश पर पहला हक़ हिंदुओं का है?
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  5. A
    Amitabh
    May 20, 2014 at 1:02 am
    लेखक पूर्वाग्रह से त्रसत है. जनता ने जैसी चुना aur जिताया वह भी लेखक को पूंजीपतिओं का खेल लगता है. धिक्कार है ऐसी सोच पर.
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  6. R
    rajan
    May 19, 2014 at 11:23 am
    जब मनमोहन ने कहा की इस देश के संसाधनो पर पेहला हक मुसलमानो का है और जब मुलायुम ने कहा की इस देश का 80% विकास किसान और मुसलमानो ने किया है उसी दिन इन दोनो नेतायो ने अपनी क़ब्र खोद लि थी नतीजा सिर्फ आज आया है. कांग्रेस का हारना इस लिये भी जरूरी हो गया था क्योंकि उसने सम्प्रदायिक हिंसा निषेध बिल के द्वारा हिन्दुयों के गले मे फांसी का फनदा डालने की पूरी तय्यारी कर लि थी...........
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  7. R
    Rehan
    May 20, 2014 at 4:36 pm
    "--- इसके पीछे हम जैसों का मोदी-विरोध है जो 2002 में गोधरा कांड के बाद गुजरात में भड़के दंगों के चलते शुरू हुआ। " विचार-धारा ठीक है, पर एक बात पर सदा ही टिके रहना जड़ता का प्रतीक है. लेखक को यह समझाने की आवश्कता नहीं है कि जड़ता मृत्यु का सूचक है - चाहे वह व्यक्ति की हो अथवा बात की. गोधरा से बाहर निकलिए. रोजी-रोटी की बात कीजिये. जोड़ने की बात कीजिये.
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