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‘दोस्ताना’ के बाद से पड़ने लगी थी अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा की दोस्ती में दरार!

70 के दशक में अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा की दोस्ती बॉलीवुड में मिसाल के तौर पर स्थापित थी। दोनों एक दूसरे के फैमिली फ्रेंड भी थे। लेकिन गुजरते वक़्त के साथ दोनों के रिश्तों में कुछ इस तरह कड़वाहट घुली कि दोनों एक दूसरे को देखने तक से कतराने लगे।
Author नई दिल्ली | May 15, 2017 10:28 am
शत्रुघ्न सिंहा ने अपनी बायोग्राफी ‘एनीथिंग बट खामोश’ में अमिताभ से अपने रिश्तों में आई इस कड़वाहट का खुलासा किया है

बॉलीवुड की दुनिया में सितारों के बीच दोस्ती के रिश्ते इतने नाजुक होते हैं कि जरा सी बात पर भी उनके टूटने का खतरा बना रहता है। दोस्त जब प्रतिद्वंदी हो जाते हैं तो अधिकांशतः यहीं से दोनों के अलगाव की कहानी आकार लेना शुरु कर देती है। कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर या करण जौहर और काजोल के बीच की यह कड़वाहट कोई नई बात नहीं है। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री इस तरह की अनेक कड़वी कहानियों का इतिहास खुद में समेटे हुए है। 70 के दशक में अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा की दोस्ती बॉलीवुड में मिसाल के तौर पर स्थापित थी। दोनों एक दूसरे के फैमिली फ्रेंड भी थे। लेकिन गुजरते वक़्त के साथ दोनों के रिश्तों में कुछ इस तरह कड़वाहट घुली कि दोनों एक दूसरे को देखने तक से कतराने लगे।

अमिताभ और शत्रुघ्न सिन्हा ने बॉलीवुड की अनेक बेहतरीन फिल्मों में एक साथ काम किया है। ‘बाम्बे टू गोवा’, ‘परवाना’ और ‘दोस्ताना’ जैसी सुपरहिट फिल्में साथ करने वाले दोनों दोस्तों के बीच किस बात को लेकर कब झगड़ा हुआ, हुआ या नहीं हुआ इसके बारे में किसी को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। ऐसा माना जाता है कि 1980 में आई दोस्ताना फिल्म के बाद से ही दोनों के रिश्तों में दरार आनी शुरु हो गई थी। ‘दोस्ताना’ दोनों उभरते हुए अभिनेताओं के लिए एक बड़ी सफलता थी लेकिन उनकी अगली फिल्म ‘शान’ में अमिताभ बच्चन का किरदार शत्रुघ्न सिन्हा के मुकाबले ज्यादा मजबूत रहा। इसके बाद ‘काला पत्थर’ और ‘अमीर आदमी गरीब आदमी’ में भी दोनों साथ नजर आए लेकिन अमिताभ के लगातार बढ़ते कद ने दोनों के बीच दूरियों की खाई खोदनी शुरु कर दी। दोनों एक दूसरे के प्रोजेक्ट से अलग रहने लगे।

शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी बायोग्राफी ‘एनीथिंग बट खामोश’ में अमिताभ से अपने रिश्तों में आई इस कड़वाहट का खुलासा किया है। अपनी किताब में शत्रुघ्न सिन्हा ने लिखा है कि “उस वक्त लोग यह कहते थे कि अमिताभ और मेरी ऑन स्क्रीन जोड़ी सुपरहिट है लेकिन अमिताभ मेरे साथ काम नहीं करना चाहते थे। अमिताभ को लगता था कि नसीब, काला पत्थर, शान और दोस्ताना में शत्रुघ्न सिन्हा मुझ पर भारी पड़ गए थे, लेकिन इससे मुझे कभी फर्क नहीं पड़ा”। एक इंटरव्यू में शत्रुघ्न सिन्हा ने यह बात स्वीकार कि है कि उन्होने दो फिल्मों के एडवांस इसलिए वापस कर दिए थे क्योंकि उस फिल्म में अमिताभ उनके साथ थे।

अपनी आत्मकथा ‘एनीथिंग बट खामोश’ के लांच होने के मौके पर शत्रुघन सिन्हा ने कहा था कि उन्होने अमिताभ से बिगड़े रिश्ते के बारे में किताब में इसलिए लिखा है क्योंकि वह इस किताब को लिखने में पूरी इमानदारी चाहते थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार अमिताभ बच्चन ने एक कार्यक्रम में कहा था कि “शत्रुघ्न मुझसे छोटे हैं और मेरा ऐसा मानना है कि जो लोग छोटे हैं उनके पास बड़ों को कुछ भी कहने का अधिकार होता है”। उन्होने कहा था कि “दोस्ती के रिश्ते में लेन-देन नहीं होना चाहिए और ये दोस्ती के लिए बहुत आवश्यक चीज है। दोस्ती में नाराज होना, गालियाँ देना ये सब चलता रहता है”। अमिताभ बच्चन का यह बयान शत्रुघ्न सिन्हा के उस की उस बात की प्रतिक्रिया मानी जा सकती है जो उन्होने अपनी आत्मकथा में लिखा था कि “अमिताभ को मेरे काम को मिलने वाली तालियों से समस्या थी”। सिन्हा ने लिखा है कि “अमिताभ मुझे मिलने वाली प्रतिक्रियाओं को देखते थे और यही कारण था कि वह अपनी बहुत सी फिल्मों में मुझे नहीं चाहते थे”।

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