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आप समर्थक बदल सकते हैं समीकरण

नोएडा में हार-जीत में एक समीकरण अहम हो सकता है। यह समीकरण ऐसे मतदाताओं पर लागू होगा, जो भाजपा, बसपा, सपा और कांग्रेस के अलावा अन्य राजनीतिक विचारधारा के समर्थक हैं।
Author नोएडा | February 11, 2017 01:01 am
(PTI)

नोएडा में हार-जीत में एक समीकरण अहम हो सकता है। यह समीकरण ऐसे मतदाताओं पर लागू होगा, जो भाजपा, बसपा, सपा और कांग्रेस के अलावा अन्य राजनीतिक विचारधारा के समर्थक हैं। ऐसे करीब 25-30 हजार मतदाता हैं। यहां बात हो रही है आम आदमी पार्टी के समर्थकों की। भले ही इस विधानसभा चुनाव में आप ने अपने उम्मीदवार नहीं खड़े किए हैं। वहीं, नोएडा के दिल्ली से सटा होने की वजह बड़ी संख्या में आप के समर्थक यहां के वोटर हैं। पहली बार 2012 लोकसभा चुनाव में आप ने चुनाव लड़ा था। पूरी लोकसभा में कुल 32358 मत लेकर आप प्रत्याशी चौथे नंबर पर रहे थे। लोकसभा चुनाव के दौरान आप को नोएडा विधानसभा इलाके से 24105 मत मिले थे। जिसने तभी यह साबित कर दिया था कि सपा, बसपा और कांग्रेस के मुकाबले में आप ज्यादा पीछे नहीं है।

आज नोएडा सीट के लिए होने वाले मतदान में भाजपा छोड़कर अन्य दोनों प्रमुख प्रत्याशी रणनीति के तहत आप समर्थक मतदाताओं को अपने पक्ष में मतदान कराने की जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि चुनाव प्रचार बंद होने के बाद से ही अंदरखाने आप समर्थक वोटरों से सपा और बसपा प्रत्याशी या उसने नजदीकी संपर्क में लगे हुए हैं। आप की विचारधारा शुरू से भाजपा विरोधी रही है। इस वजह से आप समर्थक मतदाता भाजपा छोड़कर अन्य प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान कर सकते हैं।

2012 में गौतमबुद्ध नगर लोकसभा चुनाव में आप उम्मीदवार और सेक्टर-52 के निवासी केपी सिंह ने साफ किया है कि उनके समर्थक भाजपा छोड़कर किसी भी उम्मीदवार का समर्थन करने को स्वतंत्र हैं। पार्टी ने समर्थकों को भाजपा छोड़कर किसी का भी साथ देने की अपील कर रखी है। ऐसे में सपा, बसपा प्रत्याशी आप समर्थक मतदाताओं को अपनी तरफ खींचना चाह रहे हैं। आप के गौतमबुद्ध नगर प्रवक्ता संजीव निगम ने कहा है कि हम अपने समर्थकों को किसी विशेष दल या उम्मीदवार पक्ष में मतदान करने के लिए नहीं कहेंगे।

2012 विधानसभा और 2014 में उपचुनाव में भाजपा नोएडा सीट से जीती है। ज्यादातर बाहरी मतदाता और ब्राह्मण बाहुल्य नोएडा सीट पर भाजपा के अलावा उसके सहयोगी संगठन आरएसएस, विहिप, बजरंग दल का भी बड़ा कैडर है। जिसका फायदा इस मर्तबा भी भाजपा के पक्ष में जाने की उम्मीद है। 2012 विधान सभा और 2014 उपचुनाव में आप ने नोएडा सीट पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे।

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