ताज़ा खबर
 

उत्तराखंड चुनाव: भगवानपुर में देवर-भाभी के बीच रोचक मुकाबला

भगवानपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर मौजूदा विधायक ममता राकेश विधानसभा चुनाव लड़ रही है। वहीं उनके खिलाफ भाजपा की ओर से उनके देवर सुबोध राकेश चुनाव मैदान में है।
कांग्रेस और भाजपा।

उत्तराखंड के मैदानी जिले हरिद्वार के सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र भगवानपुर में देवर-भाभी के बीच रोचक मुकाबला हो रहा है। कल तक एक दूसरे के साथ मंच साझा करने वाले देवर-भाभी एक दूसरे के राजनीतिक विरोधी बने हुए हैं। दोनों एक दूसरे को राजनीतिक मैदान में पटकनी देने पर तुले हुए हैं।  भगवानपुर सुरक्षित सीट उत्तर प्रदेश की सीमा से लगती हुई है। यह विधानसभा क्षेत्र दलित समुदाय की राजनीति का गढ़ माना जाता है। भगवानपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर मौजूदा विधायक ममता राकेश विधानसभा चुनाव लड़ रही है। वहीं उनके खिलाफ भाजपा की ओर से उनके देवर सुबोध राकेश चुनाव मैदान में है। 2015 के उपचुनाव में इस सीट से ममता राकेश कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़के विधानसभा पहुंची थी। तब यह सीट ममता राकेश पति सुरेन्द्र राकेश की मृत्यु के कारण खाली हुई थी। सुरेन्द्र राकेश ने 2007 और 2012 में बसपा के टिकट पर इस विधानसभा सीट पर भाजपा और कांग्रेस को हरा कर अपना कब्जा जमाया था। सुरेन्द्र राकेश और उनके पिता कलीराम राकेश का भगवानपुर राजनीतिक गढ़ रहा है।

सुरेन्द्र राकेश 2012 में विधानसभा का चुनाव जीतने के बाद उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार में ताकतवर मंत्री बने। 2015 में बीमारी के चलते उनकी मृत्यु हो गई और उनकी राजनीतिक विरासत उनकी पत्नी ममता राकेश ने संभाली। ममता राकेश और उनके देवर सुबोध राकेश बसपा छोड़कर 2015 में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। 2015 के विधानसभा के उपचुनाव में सुबोध अपनी भाभी ममता की बजाय खुद कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते थे। परंतु मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सुबोध को समझा बुझा कर उनकी भाभी ममता को कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़वाया। और सुबोध को उत्तराखंड कांग्रेस का प्रदेश महामंत्री बना दिया था। इस बार सुबोध को जब यह लगा कि मुख्यमंत्री हरीश रावत उनकी भाभी ममता को ही भगवानपुर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ाएगें तो सुबोध कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। और उन्होेंने पिछले महीने अपनी भाभी ममता के खिलाफ भगवानपुर इंटर कॉलेज के मैदान में बड़ी जनसभा की जिसमें सुबोध को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट और हरिद्वार के सांसद पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने भाजपा में शामिल करवाया। सुबोध के साथ उनकी बहन और उनके अन्य परिजन भाजपा में शामिल हुए। इस तरह ममता के खिलाफ उनकी माँ, उनके दोनों देवर सुबोध, सुभाष व उनकी देवरानियों और उनकी ननदों सुदेश, लता, सरोज, ममता ने खुले आम मोर्चा खोल लिया।

भगवानपुर इंटर कॉलेज के मैदान में सुबोध के समर्थन में फिल्म अभिनेत्री हेमामालिनी ने रविवार को चुनावी रैली की। इस रैली में सुबोध का पूरा परिवार मौजूद था। सुबोध की माँ ने हेमामालिनी को बुके देकर स्वागत किया। ममता की ननद सुदेश और लता का कहना है कि भाभी ने हमें छोड़ा और हमने भाभी को नहीं छोड़ा। यह चुनाव हमारे भैय्या सुबोध राकेश भाभी ममता के खिलाफ इसलिए लड़ रहे ताकि उनकी घर वापसी हो सके।ममता की ननद का कहना है कि ममता भाभी चुनाव हारेगी। तो उनकी घर वापसी हो जाएगी। इसलिए सभी बहनें भाई सुबोध का चुनाव प्रचार कर रही है। और उनको पक्का भरोसा है उनका भाई चुनाव जीतेगा। देवर-भाभी के बीच भगवानपुर विधानसभा सीट पर सीधा-सीधा मुकाबला है। बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार रामकुमार राणा देवर भाभी के बीच चल रही लड़ाई का फायदा उठाने की फिराक मे है। वे इस सीट को हथियाने के लिए मायावती के नाम का सहारा लिए हुए है जबकि ममता दलित और मुस्लिम का गठजोड़ बनाकर यह सीट हथियाना चाहती है। ममता केश के पीछे मुख्यमंत्री हरीश रावत का वरदहस्त है। सुबोध राकेश अपने बूते इस सीट को हथियाना चाहते है। इस सीट पर मुसलमान निर्णयक स्थिति में है। वैसे भगवानपुर विधानसभा सीट बसपा का गढ़ मानी जाती है। 2002 से 2015 तक इस सीट पर बसपा का ही कब्जा रहा है। 2015 के उपचुनाव में कांग्रेस ने कब्जा किया। वह भी तब जब इस सीट पर बसपा ने उपचुनाव में अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया।

 

यूपी चुनाव ग्राउंड रिपोर्ट: सूबे में इस बार किसकी बनेगी सरकार

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.