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उत्‍तर प्रदेश की इस सीट का अनोखा कनेक्‍शन, ‘राम’ के नाम वालों को मिलती रही है जीत

1962 में इस सीट पर पहली जीत कांग्रेस के टिकट पर अखंड प्रताप सिंह ने हासिल की थी।
Author फैज़ाबाद | February 15, 2017 11:27 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

सियासी माहौल में जहां राजनेता लोगों को अपने लुभावने वादों से अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं वहीं एक जगह ऐसी भी है जहां पर पिछले 9 बार से प्रत्याशियों को राम के नाम पर वोट दिए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद जिले की बीकापुर सीट से 9 बार ऐसे विधायकों को चुना गया जिनके नाम में राम शब्द था। 1974 से लेकर 2002 तक इस सीट के लिए लोगों ने राम शब्द के नाम वाले विधायकों को चुना। बीकापुर सीट का गठन 1962 में किया गया था और तब से अभी तक यहां पर 15 विधायकों का चुनाव किया जा चुका है, जिसमें कि 9 विधायकों को लोगों ने राम के नाम से जुड़े होने की वजह से वोट दिए। 1962 में इस सीट पर पहली जीत कांग्रेस के टिकट पर अखंड प्रताप सिंह ने हासिल की थी।

राम के नाम पर जीत दर्ज करने वालों में सबसे पहले 1974 में कांग्रेस के टिकट पर लड़ने वाले बीकेड़ी के प्रत्याशी सीताराम निषाद को यहां के लोगों ने जीत दिलाई थी। इसके बाद जनता पार्टी के टिकट पर 1977 में श्रीराम द्विवेदी जीते थे। 1980-85 में हुए चुनावों में फिर से कांग्रेस के टिकट पर सीताराम निषाद ने इस सीट पर कब्जा जमाया। इसके बाद एक बार फिर कांग्रेस ने 1989 और 1991 इस सीट पर जीत हासिल की। वहीं 1993 में सपा के टिकट से परशुराम यादव ने इस सीट पर जीत दर्ज की। आखिर में 1996 और 2002 में फिर से सीताराम निषाद ने इस सीट पर जीत हासिल की। इन तीन दशकों के दौरान पांच बार सीताराम निषाद, तीन बार श्रीराम द्विवेदी, एक बार परशुराम यादव यहां से विधायक बने। आपको बता दें कि इस सीट से केवल एक बार ही महिला प्रत्याशी विधायक बनी है। कांग्रेस के टिकट पर 1969 में रानी मानवती ने इस सीट पर अपनी जीत दर्ज की थी।

इस सबको देखकर ऐसा भी लगता है कि बीकापुर की इस सीट पर कांग्रेस का ज्यादा दबदबा है। अभीतक इस सीट से ज्यादातर कांग्रेस के ही प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। अब यह देखना बहुत ही दिलचस्प होगा की इस बार यह सीट किस पार्टी के खाते में जाती है।

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