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नरेंद्र मोदी के आरोप में दम? दो साल बराबर, पर चुनावी साल में अखिलेश यादव ने रखा कब्रिस्‍तान के लिए श्‍मशान से दोगुना बजट

यूपी की अखिलेश यादव सरकार ने साल 2016-17 में श्मशान के लिए 400 करोड़ रुपये और श्मशान के लिए 227 करोड़ रुपये आवंटित किया था।
यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (बाएं) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश के बहराइच में रविवार 19 (फरवरी) को एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की अखिलेश यादव सरकार पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा था कि “अगर गांव में कब्रिस्तान बनता है तो गांव में श्मशान भी बनना चाहिए….भेदभाव नहीं होना चाहिए।” पीएम मोदी के बयान पर विवाद होना स्वाभाविक था लेकिन क्या आंकड़े कब्रिस्तान और श्मशान के बारे में क्या कहते हैं? यूपी की अखिलेश यादव सरकार ने पिछले वित्त वर्ष (2016-17) में अपने बजट में कब्रिस्तान के लिए श्मशान से करीब दोगुना बजट आवंटित किया था। अखिलेश सरकार ने साल 2016-17 में श्मशान के लिए 400 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था। वहीं उसी वित्त वर्ष में श्मशान के लिए 227 करोड़ रुपये (127 करोड़ रुपये ग्रामीण और 100 करोड़ रुपये शहरी) आवंटित किया था।

यूपी सरकार के साल 2016-17 के बजट में अल्पसंख्यक कल्याण के मद आवंटित बजट के अनुसार राज्य सरकार ने कब्रिस्तानों के चारों तरप दीवार बनाने के लिए 400 करोड़ आवंटित किए थे। सरकार ने बजट में इस बात का उल्लेख भी किया था कि ये राशि पिछले वित्त वर्ष से दोगुनी की जा रही है। यूपी सरकार ने 2016-17 में 10वीं से  नीचे की कक्षाओं में पढ़ने वाले अल्पसंख्यकों की छात्रवृत्ति के लिए 537 करोड़ आवंटित किए थे। वहीं 10वीं से बाद की छात्रवृत्ति के लिए 153 करोड़ और फीस माफी के लिए 150 करोड़ आवंटित किया था। अखिलेश यादव सरकार ने 2016-17 में मदरसों/मकतबों में आधुनिक शिक्षा देने के लिए 395 करोड़ रुपये और आजमगढ़ की दार-उल-मुसलमीन में पुस्तकालय बनवाने के लिए पांच लाख रुपये आवंटित किए थे।

यूपी की अखिलेश यादव सरकार ने 2014-15 में कब्रिस्तान के लिए 200 करोड़ रुपये का बजट और श्मशान के लिए 200 करोड़ रुपये (100 करोड़ रुपये ग्रामीण और 100 करोड़ रुपये शहरी) आवंटित किया था। वहीं साल 2015-16 में कब्रिस्तान के लिए 200 करोड़ रुपये का बजट और श्मशान के लिए 200 करोड़ रुपये (100 करोड़ रुपये ग्रामीण और 100 करोड़ रुपये शहरी) आवंटित किए गया था। यूपी में अल्पसंख्यकों की कुल आबादी 19.33 प्रतिशत है। सूबे में मुसलमानों की आबादी करीब 18.49 प्रतिशत है। यानी राज्य के अल्पसंख्यकों में 95 प्रतिशत आबादी मुसलमानों की है। यूपी में हिन्दुओं की आबादी करीब 80 प्रतिशत है। साल 2011 की जनगणना के अनुसार यूपी की कुल आबादी करीब 19.98 करोड़ है। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने एक नीजी समाचार चैनल की रिपोर्ट का क्लिप ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा, “इन तथ्यों से कब्रिस्तान बनाम श्मशान पर अखिलेश यादव सरकार का असली चेहरा सामने ला दिया है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का विवादित अंश-

पीएम मोदी ने बहराइच की चुनावी रैली में परोक्ष रूप से राज्य की अखिलेश यादव सरकार पर धार्मिक आधार पर भेदभाव का आरोप लगाया था। पीएम मोदी ने अपने भाषण के दौरान कहा था, “….भाइयों बहनों गांव में अगर कब्रिस्तान बनता है तो गांव में श्मशान भी बनना चाहिए। अगर रमजान में बिजली मिलती है तो दिवाली में भी बिजली मिलनी चाहिए। अगर होली पर बिजली मिलती है तो ईद पर भी बिजली मिलनी चाहिए। भेदभाव नहीं होना चाहिए। सरकार का काम है भेदभाव मुक्त शासन चलाना। किसी के संग अन्याय नहीं होना चाहिए। धर्म के आधार पर तो बिल्कुल नहीं होना चाहिए। जाति के आधार पर बिल्कुल नहीं होना चाहिए। ऊंच-नीच के आधार पर नहीं होना चाहिए…” पीएम के बयान के बाद जहां सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी बहस होने लगी वहीं विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग में इसके खिलाफ शिकायत की। विपक्षी दलों का आरोप है कि पीएम मोदी का बयान सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश के तहत दिया गया है। वहीं भाजपा ने विपक्ष के इन दावों को खारिज किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक हालिया फैसले में धर्म और जाति के नाम पर वोट मांगने को गैर-कानूनी बताया था। ऐसे में अगर चुनाव आयोग किसी नेता को इसका दोषी पाता है तो उस पार्टी और नेता की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इससे पहले चुनाव आयोग भाजपा नेता और सांसद साक्षी महाराज के एक बयान पर जवाबतलब कर चुका है। चार फरवरी से आठ मार्च के बीच यूपी, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में विधान सभा चुनाव हो रहे हैं। यूपी में 11 फरवरी से आठ मार्च के बीच सात चरणों में मतदान होना जिनमें से तीन तरण के मतदान हो चुके हैं। चुनाव के नतीजे 11 मार्च को आएंगे।

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  1. अलफ्रेड
    Feb 21, 2017 at 5:21 pm
    उत्तर प्रदेश में लोग गंगा और यमुना के किनारे जलाए जाते हैं। गुजरात की तरह हर गांव में श्मशान नहीं होता है। अधिकांश हिंदू अपने गांव में लाश जलाते नहीं हैं।
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    1. N
      nikhil
      Feb 22, 2017 at 7:27 am
      दंगो का सच - बाटने की राजनीती - दो समुदायों में मतभेद पैदा करना ! यही इनकी विकास का एजेंडा है
      Reply
      1. S
        sach
        Feb 21, 2017 at 3:53 pm
        तो ठीक है न, फ़कीर बाबा.. हिन्दू धर्म में तो फ़कीर को दरिद्र/भिखारी कहा जाता है...और मारने के बाद दरिद्र/भिखारियों को शमशान में ले जाया जाता है...आप खुद हिंदुत्व की बातें करते हैं फिर भी खुद को फ़कीर बताते हैं... इसलिए आपके लिए कोई दिक्कत नहीं है.....आप कब्रिस्तान में भी बुकिंग करवा लीजिये...टिकट कटने उम्र तो हो ही गई है....
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        1. R
          Rajendra Vora
          Feb 22, 2017 at 5:45 am
          बुकिंग तो तुम करवा के लिखो क्योंकि जल जल के मरोगे. शायद तुम्हे कब्र में नहीं जलाके ही मरना चाहिए.
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        2. S
          Shrikant
          Feb 24, 2017 at 4:18 am
          Chu
          Reply
          सबरंग