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उत्तर प्रदेश चुनाव: उन्नाव में बीस साल तक लाल सलाम, अब नहीं किसी की जुबां पर नाम

नई पीढ़ी के मतदाता तो लाल झंडा वाली पार्टी का नाम ही नहीं जानते।
भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी।

 

तहसीलदारी छोड़कर वर्ष 1957 में राजनीति में आए बाबू भीखालाल को हसनगंजविधान सभा क्षेत्र (मौजूदा समय में मोहान विधानसभा क्षेत्र) की जनता ने हाथोंहाथ लिया जिसके कारण उन्हें छह बार चुनाव जीत कर विधानसभा में पहुंचने का अवसर मिला। जिसकी बराबरी आज तक किसी भी राजनैतिक दल का प्रतिनिधि नही कर सका।  यह बात अलग है कि उनकी मृत्यु के बाद कम्युनिस्ट पार्टी का अब यहां कोई नामलेवा तक नहीं बचा है। जिसके कारण नई पीढ़ी के मतदाता तो लाल झंडा वाली पार्टी का नाम ही नहीं जानते। नौकरशाह से नेता बने भीखालाल मौजूदा मोहान विधान सभा क्षेत्र के गांव रामपुर गढौहा के निवासी थे। उन्होंने 1957 में तहसीलदार जैसे ओहदे का मोह त्याग कर जनसेवा के क्षेत्र में उतरने का निश्चय किया तो जनता उनके पीछे चल पड़ी यही कारण रहा कि वह वर्ष 1957 के बाद 1962, 1967, 1969, 1974 व 1980 में विरोधी दलों के प्रत्याशियों को पछाड़ कर विधानसभा में पहुंचते रहे। इसके बाद उनके उत्तराधिकारी बने बाबू मस्तराम भाजपा के बैनर तले तत्कालीन हसनगंज विधानसभा क्षेत्र से ही चार बार चुनाव जीत कर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल का भी हिस्सा बने। लेकिन लाल झंडे का रेकार्ड वह भी तोड़ नहीं पाए।

हसनगंज के अलावा जिले की बांगरमऊ विधानसभा क्षेत्र से जीतकर पांच बार विधानसभा पहुंचे दिवंगत गोपीनाथ दीक्षित प्रदेश मंत्रिमंडल में पंचायतीराज, ऊर्जा, वित्त, उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा व गृह मंत्रालय जैसी जिम्मेदारियों को भी निभाया लेकिन जीत का कारवां लगातार उनका भी नहीं रहा। कांग्रेसीराज में भगवंत नगर विधानसभा क्षेत्र से उन्नाव के गांधी के रूप में विख्यात भगवती सिंह विशारद चार बार विधायक बने। इन सबसे अलग जिले की एकमात्र पुरवा विधानसभा सीट पर बीते सात विधानसभा चुनावों से लगातार समाजवादी पार्टी विजेता बनकर उभरी लेकिन उसे इस उपलब्धि हासिल करने के लिए अपने प्रत्याशियों का चेहरा बदलना पड़ा। उल्लेखनीय हो पुरवा विधानसभा सीट से पहली बार निर्दलीय के रूप में जीते हृदयनारायण दीक्षित बाद में मुलायम खेमे में शामिल होकर जनता दल, समाजवादी जनता पार्टी के बाद समाजवादी पार्टी का हिस्सा रहकर चार बार लगातार विधायक रहे। उनके बाद सपा ने उदयराज यादव को अपना प्रत्याशी बनाया तब से लेकर अब तक उन्हें पांचवी बार समाजवादी पार्टी ने अपना प्रत्याशी घोषित किया है। बाकी बचे दो विधानसभा क्षेत्र सदर, सफीपुर को इस उपलब्धि से भी महरूम रहना पडा है।

हापुड़ सीट पर त्रिकोणा मुकाबला

उत्तर प्रदेश की हापुड़ विधानसभा सीट पर वर्तमान विधायक और उप्र कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष गजराज सिंह के लिए इस बार राह आसान नहीं और उनके सामने त्रिकोणीय मुकाबला है।भाजपा प्रत्याशी विजयपाल आढ़ती हापुड़ विधानसभा सीट से पहली बार किस्मत आजमा रहे हैं। हापुड़ मंडी में आलू की आढ़त चलाने वाले विजयपाल देहात क्षेत्र में खासी पकड़ रखते हैं। परंपरागत दलित वोटों के बल पर चुनावी मैदान में उतरे बहुजन समाज पार्टी के श्रीपाल सिंह ने भी राजनीति में नया होने के बावजूद आम जनता में पैठ मजबूत की है।

हापुड़ विधानसभा सुरक्षित सीट पर इस बार मुकाबला भाजपा, बसपा तथा कांग्रेस के बीच है। सपा से कांग्रेस के गठबंधन के बाद हालांकि गजराज सिंह की स्थिति काफी दृढ़ मानी जा रही थी लेकिन कार्यकर्ताओं की बेरुखी और कांग्रेस के विरोध में पड़ने वाले सपा के मुस्लिम वोटों का झुकाव बसपा की ओर होने तथा सवर्ण मतों का झुकाव भाजपा की ओर होने के कारण गजराज सिंह की राह मुश्किल दिखलाई पड़ रही है। हापुड़ सीट पर होगा तिकोना मुकाबला

 

 

 

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