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अमेठी: ‘हाथ’ की आंधी में ‘फूल’ खिलाने वाले का पत्ता साफ

कांग्रेस की आंधी में कई बार कमल का फूल खिलाने वाल तेजभान सिंह इस बार के चुनाव में टिकट दौड़ से बाहर हो गए हैं जबकि वे गौरीगंज से चार बार विधायक बन चुके हैं।
Author अमेठी | February 8, 2017 01:48 am
केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी की फाइल फोटो। (PTI Photo by Nand kumar)

अस्सी के दौर में अमेठी के चारो तरफ कांग्रेस थी लेकिन गौरीगंज में कमल का फूल खिला था। कांग्रेस की आंधी में कई बार कमल का फूल खिलाने वाल तेजभान सिंह इस बार के चुनाव में टिकट दौड़ से बाहर हो गए हैं जबकि वे गौरीगंज से चार बार विधायक बन चुके हैं। अब उनका टिकट काटकर स्मृति ईरानी के करीबी को उम्मीदवार बना दिया गया है। तेजभान सिंह ने कहा कि भाजपा ने टिकट वितरण में खुलेआम हेराफेरी की है। लिहाजा गौरीगंज विधानसभा के 80 फीसद पदाधिकारी इस्तीफा दे चुके हैं। इनमें बूथ अध्यक्ष से लेकर जिले के उपाध्यक्ष तक शामिल हैं।

सिंह ने कहाकि गौरीगंज में डमी उम्मीदवार उतारा गया है। जिससे वर्तमान उम्मीदवार के साथ केवल 10 फीसद पदाधिकारी बचे हैं। बाकी उनके सभी समर्थक पद से इस्तीफा दे चुके हैं। इसके बाद अमेठी के आशीष शुक्ल निर्दल चुनाव लड़ने के लिए तैयारी में हैं। इसके लिए वे अमेठी के रामलीला मैदान में एक फरवरी को बड़ी सभा करेंगे। इस सभा में कई हजार कार्यकर्ता बुलाए गए हैं। यही बगावत सलोन, तिलोई और जगदीशपुर में भी चल रही है। बाकी जगदीशपुर सुरक्षित सीट से सुरेश पासी और गौरीगंज सीट से उमाशंकर पांडेय भाजपा के उम्मीदवार हैं। इस चुनाव में भाजपा के सभी चेहरे नए हैं। इससे पुराने चेहरे बगावत के रास्ते पर निकल पड़े हैं। इसमें गौरीगंज और जगदीशपुर के उम्मीदवार संगठन के पदाधिकारी हैं, जबकि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह संगठन से जुड़े लोगों को टिकट देने से मना कर रखा है।

अमेठी में संगठन के जिलाध्यक्ष और महामंंत्री दोनों खुद उम्मीदवार बन गए हैं। इससे विरोध लाजमी है। जगदीशपुर के सुरेश पासी संगठन के महामंत्री हैं। इनका भी चुनावी अनुभव बिलकुल नया है। सलोन के दलबहादुर कोरी भाजपा के विधायक और मंत्री दोनों रह चुके हैं। वह पुराने भाजपाई हैं। प्रतापगढ़ के मोती सिंह पट्टी विधानसभा से भाजपा के उम्मीदवार बने हैं। इसके पहल मोती सिंह दो बार विधायक और उत्तर प्रदेश की सरकार में ताकतवर मंत्री रह चुके हैं। मोती सिंह एक बार फिर जनता की अदालत में हैं। मोती सिंह केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बहुत करीबी हैं।

तेजभान बनाम स्मृति

तेजभान सिंह का टिकट कटने के बाद भाजपा में भगदड़ मच गई है। 80 फीसद पदाधिकारी इस्तीफा दे चुके हैं। इससे अमेठी में भाजपा के लिए खतरे की घंटी बज गई है। अब इस घमासान में भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती परिवार बचाने की है, लेकिन इसके लिए अभी कोई आगे नहीं आया है। तेजभान के समर्थक केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी का पुतला तक फूंक चुके हैं।

रानी गरिमा सिंह

अमेठी राजघराना एक बार फिर सुर्खियों में है। अमेठी राजघराने के राजा डा संजय सिंह कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष हैं। इनकी पहली रानी गरिमा सिंह अमेठी से भाजपा की उम्मीदवार हैं। रानी गरिमा सिंह भाजपा और राजनीति दोनों में बिलकुल नई हैं। इसके बावजूद भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है। सियासत में गरिमा सिंह का नाम आने के बाद अमेठी की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। रानी गरिमा सिंह की भाजपा से उम्मीदवारी के बाद यहां सभी दलों का समीकरण बिलकुल उल्टा हो गया है। अमेठी राजघराने से अब तक आठ विधायक बन चुके हैं।

 मयंकेश्वर शरण सिंह

तिलोई राजघराने के मयंकेश्वर शरण सिंह भाजपा के उम्मीदवार बने हैं। एक महीने पहले सपा छोड़कर वे भाजपा में आए थे। राजा मयंकेश्वर तिलोई से तीन बार विधायक हो चुके हैं। गौरीगंज विधानसभा के भाजपा उम्मीदवार उमाशंकर पांडेय मौजूदा भाजपा के जिलाध्यक्ष हैं। भाजपा के आलाकमान संगठन से जुड़े लोगों के चुनाव लड़ने पर मनाही कर रखा है। लेकिन इन्हें स्मृति ईरानी के करीबी होने का लाभ मिला है। बाकी चुनावी रार में बिलकुल नए हैं। जबकि गौरीगंज विधानसभा से कई बार भाजपा से विधायक रह चुके तेजभान सिंह को टिकट नहीं मिला है।

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