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उत्तर प्रदेश चुनाव: बलात्कार के आरोपी गायत्री प्रजापति के प्रचार में पहुंचे अखिलेश यादव

बलात्कार के आरोपी उम्मीदवार की जनसभा में शिरकत करने से मुख्यमंत्री के ‘बेदाग’ शासन के दावे सवालों के घेरे में तो आ ही गए हैं।
Author अमेठी | February 21, 2017 01:14 am
उत्तर प्रदेश में चुनावी रैली को संबोधित करते सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। (PTI PHOTO)

सामूहिक बलात्कार के मामले में मुख्य आरोपी और अमेठी से सपा उम्मीदवार गायत्री प्रजापति के समर्थन में सोमवार को आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री अखिलेश पहुंचे। हालांकि प्रजापति इस जनसभा में मंच से दूर रहे और अखिलेश ने भी एक बार भी उनका नाम नहीं लिया लेकिन बलात्कार के आरोपी उम्मीदवार की जनसभा में शिरकत करने से मुख्यमंत्री के ‘बेदाग’ शासन के दावे सवालों के घेरे में तो आ ही गए हैं।  गायत्री प्रजापति पर जमीन कब्जे, खनन घोटाला, आय से अधिक संपत्ति, बलात्कार और मारपीट के कई आरोप लग चुके हैं। इन्हीं आरोपों की वजह से वे मंत्रिमंडल से बर्खास्त किए गए थे लेकिन मुलायम सिंह यादव के दबाव में अखिलेश को प्रजापति को वापस लाना पड़ा। इसके बाद सपा -कांग्रेस के तालमेल के बाद अमेठी से टिकट पाने में भी गायत्री कामयाब रहे।

सोमवार को अमेठी के रामलीला मैदान में आयोजित जनसभा में अखिलेश ने सुलतानपुर से सपा प्रत्याशी अरुण वर्मा पर हत्या का मुकदमा दर्ज किए जाने का जिक्र करते हुए प्रजापति के बारे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की तरफ भी परोक्ष रूप से इशारा किया और कहा, ‘अभी सुलतानपुर में अरुण वर्मा का मामला हाई कोर्ट में है। उस मामले में भी हमसे सवाल पूछे जाएंगे। हम विश्वास दिलाते हैं कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरा-पूरा पालन किया जाएगा।’सुलतानपुर से सपा प्रत्याशी वर्मा पर एक लड़की की हत्या के आरोप में पिछले दिनों मुकदमा दर्ज किया गया है। अखिलेश की यह जनसभा प्रजापति के समर्थन में आयोजित की गई थी लेकिन प्रजापति मंच पर नजर नहीं आये और न ही अखिलेश ने प्रजापति का नाम लिया। प्रजापति पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सामूहिक बलात्कार का मुकदमा दर्ज किया गया है। कहा जा रहा है कि खुद अखिलेश ने निर्देश दिए थे कि प्रजापति उनके मंच पर न दिखें।

मुख्यमंत्री के सभास्थल पर पहुंचने से पहले प्रजापति अपने संबोधन के दौरान भावुक हो गए और मंच से नीचे उतर गए। प्रजापति ने कहा कि उन पर छह महीने पहले जब बलात्कार का आरोप लगा है, तब उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले की सीबीआइ जांच की बात कही थी, लेकिन उसी वक्त आरोप लगाने वाले महिला ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी, तो मामला लंबित हो गया। उन्होंने दावा किया कि जिस महिला के आरोप पर मुकदमा दर्ज हुआ है, वह पहले भी कई लोगों पर ऐसे इल्जाम लगा चुकी है। चित्रकूट की एक महिला की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गायत्री प्रजापति व अन्य आरोपियों के विरुद्ध धारा 376,376डी,511,504,506 और पाक्सो एक्ट में लखनऊ में मुकदमा दर्ज है। धारा 376 और 376डी में आजीवन कारावास की सजा है। वहीं पाक्सो एक्ट में भी उम्रकैद की सजा का प्रावधान है। पीड़ित महिला का आरोप है कि तीन साल पहले गायत्री ने अपने सहयोगियो के साथ उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। इसके बाद विधायक निवास में पीड़िता की नाबालिक बेटी के साथ भी बलात्कार की कोशिश की।

गायत्री का नाम बलात्कार के मामले में आने के पहले उनका छोटा बेटा अनुराग प्रजापति भी एक महिला के बलात्कार और अपहरण के मामले में फंसा था। प्रजापति पर उनके पैतृक गांव की एक महिला भी बलात्कार का आरोप लगा चुकी है। महिला का आरोप है कि मंत्री ने उसे सपा का बड़ा चेहरा बनाने का झांसा देकर अक्तूबर 2014 से दो साल तक उसके साथ बलात्कार किया। मंत्री व उनके सहयोगियों पर महिला का वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल करने व सामूहिक बलात्कार का आरोप है। महिला का कहना है कि 2016 में मंत्री के जन्मदिन पर उसे बुलाया गया था। उसकी नाबालिग बेटी के साथ भी छेड़छाड़ की गई थी। महिला का आरोप है कि प्रजापति के सरकारी आवास पर उसका आना जाना था। मंत्री के पुराने साथी अशोक तिवारी उसे बुलाकर मंत्री के पास लाते थे। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि गायत्री को चार साल पहले जेल की सलाखों के पीछे होना था मगर मुलायम सिंह मंत्री को बचा रहे थे। लिहाजा अदालत को कानून का डंडा चलाना पड़ा।

 

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