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UP Polls 2017: मुलायम को पटकनी देने के लिए माया ने लगाया था ‘औरैया दांव’

एक वक्त उत्तर प्रदेश के इटावा जिले का हिस्सा रहे आज के औरैया जिले की सियासी तस्वीर पूरी तरह बदल गई। 2002 के चुनाव में जिले की सभी सीटों पर काबिज हुई बसपा 2012 में एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी जबकि 2007 के चुनाव में भी उसने जिले की दो सीटों पर कब्जा जमाया था।
Author इटावा | January 24, 2017 02:24 am
मुलायम सिंह यादव और मायावती ।

दिनेश शाक्य
एक वक्त उत्तर प्रदेश के इटावा जिले का हिस्सा रहे आज के औरैया जिले की सियासी तस्वीर पूरी तरह बदल गई। 2002 के चुनाव में जिले की सभी सीटों पर काबिज हुई बसपा 2012 में एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी जबकि 2007 के चुनाव में भी उसने जिले की दो सीटों पर कब्जा जमाया था। माजरा विधानसभा चुनाव 2002 और विधानसभा चुनाव 2012 के बीच का है । राजनीतिक जानकार ऐसा मान करके चलते हैं कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने इटावा का काट कर औरैया के रूप मे नए जिले का सृजन मुलायम सिंह यादव की ताकत को कम करने के लिए किया था। 1995 में अपनी सरकार के दौरान मायावती ने इटावा जिले का काट कर के औरया जिला बना दिया हालिक मुलायम सिंह यादव ने इसका विरोध किया था, लेकिन उसका कोई फायदा उनको त्वरित नहीं मिल पाया। हां, दस साल बाद मुलायम सिंह यादव मायावती की ताकत को कम कर पाए।

दस साल के भीतर औरैया के मतदाताओं ने राजनीतिक तस्वीर ही बदल दी । भाजपा संघर्ष में तो थी मगर भाजपा से अलग हुए पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाकर औरैया की तीनों सीटों पर प्रत्याशी खड़े करने से भाजपा को नुकसान हुआ । राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के प्रत्याशी भाजपा के लिए वोटकटवा साबित हुए। ऐसे में भाजपा कुर्सी से दूर हो गई। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के पूर्व हुए परिसीमन में दिबियापुर विधानसभा सीट बनी थी जबकि अजीतमल विधानसभा सीट को खत्म कर दिया गया। अजीतमल की कुछ ग्राम पंचायतें और कस्बे दिबियापुर में शामिल कर दी गई थी। बाकी दिबियापुर को औरैया विधानसभा में शामिल कर औरैया सीट को सुरक्षित कर दिया गया था। आज इस जिले में युवा क्रांति के लिए तैयार है।

यहां के प्रत्याशियों का पहला लक्ष्य भी युवा ही है। उस पर अपना प्रभाव जमाने के लिए सभी दल जुटे हैं। आचार संहिता लागू होने से पहले जिले में जगह-जगह होने वाले क्रिकेट टूर्ना मेंट के साथ ही अन्य खेलों में पार्टियों ने दिल खोलकर भागीदारी की है। विद्यालय और महाविद्यालय के वार्षिकोत्सव में जाना नहीं भूलीें ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं पर अपना प्रभाव छोड़ सकें। आंकड़ों की मानें तो इस बार जिले में नए मतदाताओं की संख्या 42,955 है। इसमें 45 फीसद संख्या ऐसे युवाओं की है जो 18 से 19 साल के हैं। कुल नए मतदाताओं में महिला युवा मतदाताओं की संख्या करीब 33 हजार है। जिस प्रत्याशी को इनका आशीर्वाद मिला वह चुनाव की वैतरणी पार कर सकता है ।

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