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संसद: भाजपा-कांग्रेस में जंग

अब तो यही लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजनाबद्ध तरीके से संसद के दोनों सदनों में कांग्रेस पर हमला कर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कई मुद्दों को नए सिरे से उठा दिया है।
Author नई दिल्ली | February 11, 2017 02:49 am

अब तो यही लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजनाबद्ध तरीके से संसद के दोनों सदनों में कांग्रेस पर हमला कर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कई मुद्दों को नए सिरे से उठा दिया है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में जिन दलों की दिलचस्पी नहीं थी, वे भी सरकार को ठीक से नहीं घेर पाए। संख्या बल के आधार पर सत्ता पक्ष ने जो चाहा वह किया। सबसे पहले चुनाव की घोषणा के बीच में बजट पेश करने पर सवाल उठा। लेकिन सरकार ने चुनाव आयोग की मंजूरी लेकर बजट पेश किया। चुनाव वाले राज्यों के लिए विशेष घोषणा तो सरकार ने नहीं किया लेकिन पहली बार आम बजट के साथ रेल बजट मिलाने के प्रयोग के साथ-साथ मध्यम वर्ग को प्रसन्न करने के लिए कई घोषणाएं की। ईमानदार दिखने के लिए चुनावी चंदे पर अंकुश लगाने का भी सरकार के फैसला लोगों को बताया।  बजट सत्र का पहला चरण 31 जनवरी से शुरू होकर 9 फरवरी तक चला। दूसरा चरण नौ मार्च से 12 अप्रैल तक चलेगा। इसमें बजट पास कराने के अलावा दूसरे सरकारी कामकाज होंगे।

बजट पहली फरवरी को पेश हुआ। चार फरवरी को पंजाब और गोवा विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ। बजट का जो लाभ इन राज्यों में होना था वह भाजपा को मिला ही होगा। राष्ट्रपति के अभिभषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री ने सात फरवरी को लोकसभा और आठ फरवरी को राज्यसभा में भाषण दिया। दोनों ही सदनों में उन्होंने कांग्रेस पर आक्रामक रुख अपनाया। लोकसभा में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर टिप्पणी की लोकिन हंगामा राज्यसभा में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर की गई टिप्पणी से हुआ। कांग्रेस के ज्यादातर वरिष्ठ नेता राज्यसभा में हैं। भाजपा का राज्यसभा में बहुमत नहीं है। ऐसे में कांग्रेस ने मनमोहन सिंह पर टिप्पणी को मुद्दा बनाया। प्रधानमंत्री अपने भाषण पर कोई सफाई देने को तैयार नहीं हैं। कांग्रेस प्रधानमंत्री का संसद में बायकाट पर अड़ी है। ठीक वैसे ही जैसे शीतकालीन सत्र में नोटबंदी के मुद्दे पर मत विभाजन के साथ चर्चा कराने पर अड़ी रही।
भाजपा इसी बहाने कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप नए सिरे से मढ़ने में लगी है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, चौधरी चरण सिंह, वीपी सिंह, चंद्रशेखर, इंद्र कुमार गुजराल से लेकर पीवी नरसिंह राव तक की कांग्रेस में उपयोग के बाद उपेक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में दो विधान हैं, एक परिवार (नेहरू-गांधी) के लिए और दूसरा अन्य लोगों के लिए। इसी बहाने यूपीए शासन के तमाम घोटालों को नए सिरे से उठाने की कोशिश कर। मोदी सरकार के ढाई साल के कार्यकाल की तुलना उस शासन से करने का प्रयास किया जा रहा है। ठीक इसी तरह कांग्रेस प्रधानमंत्री के आचरण को मुद्दा बना रही है। वैसे तो दोनों दल सभी पांच राज्यों में चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन दोनों के लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का चुनाव ज्यादा महत्त्व का है। उत्तर प्रदेश में पहले चरण का चुनाव 11 फरवरी को और उत्तराखंड में 15 फरवरी को होना है। उस चुनाव से पहले इस तरह के विवाद को भी चुनाव में फायदे के लिए उठाने की दोनों दलों में होड़ सी लगी हुई है।

कायदे से यह सत्र उन दलों के लिए महत्त्वपूर्ण है, जो इन विधानसभा चुनावों से प्रभावित नहीं थे। जिन दलों का काफी कुछ इन राज्यों में दांव पर है उनके अलावा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), एआइएडीएमके, तेलंगाना राष्ट्र समिति, बीजू जनता दल और तेलगू देशम के पास भाजपा कांग्रेस के बाद ज्यादा सांसद हैं। उनमें से कुछ दलों को तो भाजपा अपने करीब लाने में लगी है, लेकिन टीएमसी के दो सांसदों की गिरफ्तारी अकेले में इतना बड़ा मुद्दा था कि लोकसभा एक दिन भी नहीं चल पाती। उसके सांसद भी पहले दिन से आखिर तक गिनती में आकर विरोध की औपचारिकता निभाते रहे। यही हाल एआइएडीएमके का था। वे तो ज्यादा समय गायब ही रहे। अंतिम दिन शशिकला को मुख्यमंत्री की शपथ दिलाने की मांग करते रहे। उनका आरोप था कि केंद्र सरकार राज्यपाल के माध्यम से इसमें अडंगा लगा रही है। परंपरा से हट कर लोकसभा उपाध्यक्ष थंबीदुरई अपने सदस्यों को हंगामे के लिए उकसाते दिखे। जो दल विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं, उनके तो ज्यादातर सदस्य लोकसभा से गायब ही रहे।

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