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मणिपुर चुनाव: समर से पहले ही दावेदारों में घमासान, जुबानी जंग लगातार हो रही है तेज

बीते 15 वर्षों से यहां सरकार चला रही कांग्रेस और अबकी उसे पटखनी देकर सत्ता पर काबिज होने का सपना देख रही भाजपा में जुबानी जंग लगातार तेज हो रही है।
मणिपुर के मुख्यमंत्री ओ इबोबी सिंह

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में विधानसभा चुनावों की न तो अभी अधिसूचना जारी हुई है और न ही ज्यादातर राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों की सूची। लेकिन उससे पहले ही राज्य में सत्ता के दोनों दावेदारों के बीच घमासान शुरू हो गया है। बीते 15 वर्षों से यहां सरकार चला रही कांग्रेस और अबकी उसे पटखनी देकर सत्ता पर काबिज होने का सपना देख रही भाजपा में जुबानी जंग लगातार तेज हो रही है। भाजपा ने जहां राज्य की मौजूदा परस्थिति के लिए कांग्रेस और उसकी गलतियों को जिम्मेदार ठहराया है वहीं मुख्यमंत्री इबोबी सिंह ने भाजपा, नगा संगठन यूनाइटेड नगा कौंसिल (यूएनसी) और उग्रवादी संगठन नेशनल सोशलिस्ट कौंसिल आफ नगालैंड (एनएससीएन) के इसाक-मुइवा गुट को एक ही थैली का चट्टा-बट्टा करार दिया है।

ध्यान रहे कि राज्य में सात नए जिलों के गठन के विरोध में यूएनसी की अपील पर नेशनल हाइवे पर बीते 91 दिनों से जारी आर्थिक नाकेबंदी की वजह से राज्य में जरूरी वस्तुओं की भारी किल्लत हो गई है। इससे आम लोगों को बेहद मुश्किल हालात का सामना करना पड़ रहा है। अब इस समस्या का समाधान तलाशने की बजाय कांग्रेस और भाजपा इसके लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा कर वाकयुद्ध में जुटे हैं। प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता एन.बीरेन सिंह कहते हैं कि मौजूदा विवाद कांग्रेस की ही देन है। वर्ष 1992 में नगा संगठन नगा स्टूडेट्स फोडरेशन (एनएसएफ) और तत्कालीन मुख्यमंत्री रिशांग कीशिंग ने एक करार पर हस्ताक्षर किए थे। उसमें इस बात पर सहममति बनी थी कि नगा बहुल आबादी वाले सेनापति जिले का भी कभी विभाजन नहीं किया जाएगा। इसी जिले से काट कर सदर हिल्स नामक नया जिला गठित करने के विरोध में ही नगा संगठनों ने आर्थिक नाकेबंदी की अपील की थी। नगा तबके के लोग इसे अपने पूर्वजों की जमीन मानते हैं। कभी मुख्यमंत्री इबोबी सिंह के करीबी रहे बीरेन सिंह ने बीते साल दिसंबर में पार्टी से नाता तोड़ कर भाजपा का दामन थाम लिया था। अबकी वे भाजपा के टिकट पर इंफाल पूर्व जिले की हेंगांग सीट से मैदान में हैं।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री इबोबी सिंह ने जवाबी हमला बोलते हुए भाजपा, यूएनसी और एनएससीएन(आई-एम) को एक ही थैली का चट्टा-बट्टा करार दिया है। सिंह ने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि एनएससीएन सदर हिल्स जिले के गठन के खिलाफ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नए जिलों का गठन राज्य सरकार का विशेषाधिकार है और उन्होंने केंद्र को भी यह बात बता दी है। उन्होंने दोहराया कि नए जिलों का गठन प्रशासनिक सहूलियत के लिए किया गया है, किसी राजनीतिक फायदे के लिए नहीं। सरकार की दलील रही है कि सदर हिल्ल जिले के गठन की मांग चार दशक से भी ज्यादा पुरानी है। अब नए जिले का नाम सदर हिल्स से बदल कर कांग्पोक्पी कर दिया गया है।मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय मंत्री विभिन्न परियोजनाओं के शिलान्यास के लिए राज्य का दौरा करते रहे हैं, लेकिन किसी ने स्थानीय समस्याओं को दूर करने पर कोई ध्यान नहीं दिया है। उनका दावा है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद केंद्र ने नाकेबंदी खत्म करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की है।

 

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