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मणिपुर चुनाव: नाकेबंदी ने कराई साइकिल सवारी, ज्यादातर उम्मीदवार एसयूवी और मोटरसाइकिल छोड़ने को मजबूर

इससे पहले हुए तमाम चुनावों में एसयूवी और मोटरसाइकिलों के काफिले के साथ प्रचार पर निकलने वाले ज्यादातर उम्मीदवार अबकी साइकिल पर नजर आ रहे हैं।
Author कोलकाता | February 21, 2017 03:51 am
इरोम शर्मिला। (Express Photo by Jasbir Malhi)

प्रभाकर मणि तिवारी

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में अबकी चुनाव प्रचार की तस्वीर बदली सी नजर आ रही है। इससे पहले हुए तमाम चुनावों में एसयूवी और मोटरसाइकिलों के काफिले के साथ प्रचार पर निकलने वाले ज्यादातर उम्मीदवार अबकी साइकिल पर नजर आ रहे हैं। इसकी वजह चुनाव आयोग की आचार संहिता या उम्मीदवारों की सादगी नहीं है। राज्य में बीते साल पहली नवबंर से जारी आर्थिक नाकेबंदी की वजह से पेट्रोल चोरी-छिपे ढाई सौ रुपए लीटर तक बिक रहा है। ऐसे में उम्मीदवारों के सामने साइकिल के सिवा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा है।
पीपुल्स रीसर्जेंस एंड जस्टिस अलायंस (प्रजा) के बैनर तले मुख्यमंत्री इबोबी सिंह के खिलाफ मैदान में उतरी मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला तो शुरू से ही साइकिल से घर-घर जाकर प्रचार कर रही हैं। अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए भी वे 20 किलोमीटर साइकिल चला कर पहुंची थीं। उनके सामने तो धन की कमी का मुद्दा है ही। लेकिन कांग्रेस, भाजपा और दूसरे स्थानीय दलों के उम्मीदवार व कार्यकर्ता भी घर-घर पहुंचने के लिए साइकिल की सवारी को तरजीह दे रहे हैं। ध्यान रहे कि राज्य में सात नए जिलों के गठन के कांग्रेस सरकार के फैसले के खिलाफ यूनाइटेड नगा कौंसिल (यूएनसी) ने बीते साल पहली नवंबर से ही राज्य को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली नेशनल हाइवे-2 और 37 की आर्थिक नाकेबंदी कर रखी है।

नतीजतन जरूरी वस्तुओं से लदे ट्रक राज्य में नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे रसोई गैस और ईंधन समेत दूसरी जरूरी वस्तुओं की भारी किल्लत पैदा हो गई है। केंद्र सरकार ने हालांकि हवाई मार्ग से ईंधन समेत कुछ चीजें जरूर भेजी हैं। मौके को भुनाने का लिए कई लोग पड़ोसी नगालैंड से चोरी-छिपे पेट्रोल और डीजल लाकर मुंहमांगी कीमत पर बेच रहे हैं। रसोई गैस के सिलेंडर की कीमत दो हजार रुपए तक पहुंच गई है।मौजूदा हालात में ज्यादातर राजनीतिक दलों के नेता चुनाव प्रचार में कारों की तादाद में कटौती पर मजबूर हो गए हैं। अबकी सत्ता के प्रमुख दावेदार के तौर पर उभरी भाजपा के एक नेता कहते हैं कि ज्यादातर सीटों पर हमारे उम्मीदवार पैदल या साइकिल से प्रचार कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब तक हम कारों या खुली जीप से प्रचार करते थे लेकिन हमें चुनावी रणनीति बदलने पर मजबूर हैं। कांग्रेस के अलावा तृणमूल कांग्रेस और प्रजा के नेता भी यही बात दोहरा रहे हैं।
कांग्रेस के एक नेता का आरोप है कि यह आर्थिक नाकेबंदी भाजपा और यूएनसी के बीच गोपनीय मिलीभगत का नतीजा है। उस नेता का कहना है कि ईंधन की भारी कमी है।
लेकिन केंद्र के सत्ता में होने की वजह से वह अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा इस नाकेबंदी की जिम्मेदारी कांग्रेस के सिर पर थोप कर इसका सियासी फायदा उठाने का प्रयास कर रही है।

 

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