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मणिपुर फ्लोर टेस्ट: विधानसभा में बीजेपी ने साबित किया बहुमत, मिला 32 विधायकों का समर्थन

मणिपुर में सोमवार (20 मार्च) को एन. बिरेन सिंह सरकार ने विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर दिया है।
मणिपुर के सीएम पद की शपथ लेते हुए बिरेन सिंह (Source: PTI)

मणिपुर में सोमवार (20 मार्च) को एन. बिरेन सिंह सरकार ने विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर दिया है। बीजेपी के लिए यह पहला मौका है जब मणिपुर में उसकी सरकार बनेगी। बीजेपी को कुल 32 विधयकों का समर्थन मिला है। वहीं बीजेपी ने ध्वनिमत से विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर दिया। बीजेपी ने राज्य की 60 में से 21 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस को 28 सीटों पर जीत मिली थी। सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस सरकार बनाने में असमर्थ रही है। सरकार बनाने के लिए राज्य में 31 विधायकों की जरूरत होती है और बीजेपी ने बहुमत से एक विधायक ज्यादा वोट हासिल किया। वहीं पार्टी को सपोर्ट करने वाले दलों की बात करें तो एनपीएफ और नगा पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के चार-चार विधायकों ने बीजेपी को समर्थन दिया है। इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस और लोजपा के 1-1 विधायक और 1 निर्दलीय विधायक भी बीजेपी के साथ हैं। पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी बिरेन सिंह ने मणिपुर के मुख्यमंत्री पद की शपथ 16 मार्च 2017 को ली थी।

बीजेपी के पास 33 विधायको का समर्थन है। वहीं गठबंधन के बाद राज्य के कैबिनेट में एनपीपी के 4, एपीएफ और एलजेपी के 1-1 और एक बागी कांग्रेस विधायक जो बीजेपी में शामिल हुए हैं, उन्हें जगह दी गई है। बिरेन सिंह का फुटबॉल के लिए प्यार उन्हें बीएसएफ में ले गया। इसके बाद बीएसएफ से इस्तीफा देकर उन्होंने क्षेत्रीय समाचार पत्र ‘नाहरोल जी थुआंग’ शुरू किया। हालांकि उन्होंने पत्रकारिता का कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया था और न ही उन्हें इसका कोई अनुभव था। लेकिन समाचार पत्र सफल रहा। साल 2000 में बिरेन के प्रेस पर पुलिस ने छापा मारा। उन पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 2002 में डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पार्टी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ा था और निर्वाचित हुए थे। बिरेन सिंह मई 2003 में कांग्रेस में शामिल हुए और मंत्री बने। वह बाद के चुनावों में भी अपनी सीट से जीतते रहे। राज्य में महत्वपूर्ण मंत्रालय संभालते हुए वह मणिपुर सरकार के प्रवक्ता बने रहे। उन्हें मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी के संकट मोचक के तौर पर देखा जाने लगा।

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