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दिल्ली नगर निगम चुनाव: कांग्रेस में बगावत की स्थिति, वालिया ने दी इस्तीफे की धमकी, भाजपा के हुए गौतम

डॉ. वालिया ने कहा कि जिस तरह से उनके विधानसभा सीट में उनको बताने के बाद उम्मीदवार बदल दिया गया, उससे वे आहत हैं। उनका कहना था कि ऐसे हालात में पार्टी का भगवान ही मालिक है।
Author नई दिल्ली | April 4, 2017 00:59 am
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन

बगावत के डर से कांग्रेस और भाजपा ने नगर निगमों के अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा नामांकन पत्र भरे जाने के आाखरी दिन सोमवार को घोषित किए लेकिन बगावत फिर भी नहीं रुकी। तीन बार के कांग्रेस विधायक और विधानसभा उपाध्यक्ष अंबरीश गौतम ने टिकटों के बंटवारे से नाराज होकर भाजपा में शामिल होने की घोषणा कर दी। वहीं दिल्ली कांग्रेस के बड़े नामों में से एक और दिल्ली की कांग्रेस सरकार में लगातार 15 साल मंत्री रहे डॉ. अशोक कुमार वालिया ने अपने इलाके में टिकट बदले जाने से नाराज होकर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन और प्रभारी पीसी चाको को पत्र लिख कर भूल सुधार न होने पर पार्टी छोड़ने की चेतावनी दे दी। वैसे शाम तक उन्हें मनाने की कोशिश हो रही थी। उनके समर्थन में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली और हारून यूसुफ जैसे नेता सामने आए। उन्होंने कहा कि डॉ. वालिया जैसे नेताओं का सम्मान होना चाहिए अन्यथा पार्टी का भारी नुकसान होगा। डॉ. वालिया ने कहा कि जिस तरह से उनके विधानसभा सीट में उनको बताने के बाद उम्मीदवार बदल दिया गया, उससे वे आहत हैं। उनका कहना था कि ऐसे हालात में पार्टी का भगवान ही मालिक है।

डॉ. वालिया ने प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन और प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी से अवगत करा दिया है। उन्होंने लक्ष्मी नगर विधानसभा क्षेत्र में जीत की संभावना वाले दावेदारों को नजरंदाज करने की शिकायत करते बाकी पेज 8 परहुए कहा कि पार्टी नेतृत्व अगर टिकट वितरण में हुई भूल को नहीं सुधारेगा तो वे कांग्रेस से इस्तीफा दे देंगे। वैसे बाद में उनके तेवर कमजोर पड़ गए थे। उनके समर्थन में दिल्ली के कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता, दिल्ली के पूर्व मंत्री से लेकर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली समेत अनेक नेताओं का उनके घर तांता लगा रहा। अभी तक उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी है लेकिन शाम को भी इससे वे सोलह आने इनकार नहीं कर रहे थे। उनका कहना था कि पार्टी बाकी पेज 8 पर के मित्रों से सलाह करके कोई कदम उठाएंगे। पूर्व सांसद संदीप दीक्षित समेत कई और बड़े नेताओं के टिकट बंटवारे से नाराज होने की जानकारी मिली है। जबकि टिकट कटने से नाराज मौजूदा पार्षदों ने निगम चुनाव में बतौर निर्दलीय उम्मीदवार अपनी दावेदारी पेश कर दी है। बगावती सुर इसके बावजूद हैं जब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सीधा हस्तक्षेप करते हुए टिकट तय करने के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा की अगुआई में कमेटी बनाई जबकि दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन उनके बेहद करीबी माने जाते हैं।
तीन बार विधायक रहे पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष गौतम ने विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ली। गौतम ने कांग्रेस में टिकट वितरण प्रक्रिया में पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी को अपनी नाराजगी की मुख्य वजह बताया। उधर, कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि वे अपने पुत्र को टिकट न दिला पाने के चलते नाराज होकर भाजपा में शामिल हो गए।

भाजपा में इस तरह के किसी बड़े नेता के बगावत करने की खबर नहीं है लेकिन टिकट बंटवारे से नाराज कई भाजपा नेताओं ने निर्दलीय नामांकन पत्र दाखिल किया है। हालांकि दोनों दलों में बागियों की सही तादाद एक-दो दिन में सामने आएगी। हालात ऐसे लग रहे हैं कि इस बार 272 निगम पार्षदों में बड़ी तादात में निर्दलीय और छोटे दलों के उम्मीदवार चुनाव जीतेंगे। निगम में सत्ता की दावेदार तीसरी पार्टी आम आदमी पार्टी (आप) ने काफी पहले टिकट घोषित कर दिए थे। पंजाब चुनाव में पराजय के बाद आप में टिकट पाने वालों की होड़ कम होने के बावजूद आप को कई उम्मीदवार बदलने पड़े। आप के दावेदारों के बगावत की खबरें भी सार्वजनिक हो रही हैं। आप के ज्यादातर उम्मीदवारों ने तो पहले ही पर्चे दाखिल कर लिए थे लेकिन कांग्रेस और भाजपा समेत अन्य दलों के उम्मीदवारों ने सोमवार को पर्चे दाखिल किए। चुनाव आयोग ने विभिन्न दलों की ओर से नामांकन भरे जाने की तारीख एक दिन बढ़ाने का आग्रह मानने के बजाय नामांकन भरे जाने का समय तीन बजे से बढ़ा कर छह बजे तक कर दिया लेकिन उम्मीदवारों की भीड़ ज्यादा होने से उसके बाद भी पर्चे भरे जाते रहे। वैसे 2007 से सीटों की संख्या 272 होने के बाद निर्दलीय और निजी प्रभाव से चुनाव लड़ने वाले छोटे दलों के उम्मीदवार भी बड़ी तादात में चुनाव जीतते रहे हैं।

कांग्रेस के कई और नेताओं ने बगावती तेवर अख्तियार कर रखा है। रविवार देर रात जारी की गई कांग्रेस उम्मीदवारों की दूसरी सूची से नाम गायब होने से नाराज घोंडली वार्ड से पार्षद इशरत जहां ने भी बागी तेवर अपना लिए हैं। उन्होंने बतौर निर्दलीय उम्मीदवार नामांकन दाखिल करने की घोषणा कर दी जबकि बाबरपुर जनता कॉलोनी से कांग्रेस पार्षद जाकिर खान ने भी टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। दोनों दलों की सूची ही दो दिन से आनी शुरू हुई है लेकिन अंतिम सूची तो नामांकन भरे जाने के आखिरी समय तक आती रही। सभी दावेदारों का पहला प्रयास तो नामांकन पत्र भरने का रहा। सही तस्वीर तो मंगलवार को दिखेगी। कांग्रेस और भाजपा में बगावत के अंदेशे से ही जानबूझकर दिकट देरी से घोषित किए गए हैं। 23 अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए नाम वापसी आठ अप्रैल तक होनी है।

डॉ अशोक कुमार की चिट्ठी

डॉ. अशोक कुमार वालिया ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन और प्रभारी पीसी चाको को पत्र लिख कर भूल सुधार न होने पर पार्टी छोड़ने की चेतावनी दे दी। वालिया ने कहा कि जिस तरह से उनके विधानसभा सीट में उनको बताने के बाद उम्मीदवार बदल दिया गया, उससे वे आहत हैं। उनका कहना था कि ऐसे हालात में पार्टी का भगवान ही मालिक है।
कई नेता उतरे समर्थन में वालिया को मनाने के प्रयास जारी हैं। उनके समर्थन में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली और हारून यूसुफ जैसे नेता सामने आए। उन्होंने कहा कि डॉ. वालिया जैसे नेताओं का सम्मान होना चाहिए अन्यथा पार्टी का भारी नुकसान होगा। उनके समर्थन में दिल्ली के कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं का उनके घर तांता लगा रहा।

कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप
तीन बार विधायक रहे पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष गौतम ने विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ली। गौतम ने कांग्रेस में टिकट वितरण प्रक्रिया में पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी को अपनी नाराजगी की मुख्य वजह बताया। उधर, कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि वे अपने पुत्र को टिकट न दिला पाने के चलते नाराज होकर भाजपा में शामिल हो गए।

 

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