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कम दाखिले वाले तकनीकी कॉलेजों पर लगेगा ताला

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) ने पिछले पांच सालों में 30 फीसद से कम दाखिले वाले तकनीकी कॉलेजों को बंद करने का फैसला किया है।
Author नई दिल्ली | August 12, 2017 00:41 am

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) ने पिछले पांच सालों में 30 फीसद से कम दाखिले वाले तकनीकी कॉलेजों को बंद करने का फैसला किया है। एआइसीटीई के अध्यक्ष अनिल डी सहस्रबुद्धे ने शुक्रवार को कहा कि ऐसे कॉलेजों को अगले साल से बंद कर दिया जाएगा। वे दो दिवसीय विश्व शिक्षा सम्मेलन के उद्घाटन के मौके पर बोल रहे थे। गौरतलब है कि देश के विभिन्न तकनीकी कॉलेजों में पिछले तीन सालों में 27 लाख से अधिक सीटें खाली रह गई हैं। एआइसीटीई देश में तकनीकी शिक्षा का नियामक है।
सहस्रबुद्धे ने कहा कि हमने इंजीनियरिंग संस्थानों को बंद करने पर जुर्माना भी घटा दिया है। यह ऐसे कई कॉलेजों को बंद करने से रोका रह था जो घटी मांग की वजह से बंद होना चाहते हैं। एआइसीटीई के आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल 10,361 इंजीनियरिंग संस्थान हैं जिनको एआइसीटीई ने मंजूरी दी है।

उनकी कुल क्षमता 37 लाख छात्रों से ज्यादा की है, इनमें तीन सालों के दौरान 27 लाख सीटें खाली रहीं। सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि कई कॉलेजों को बंद करने के अलावा हमारा लक्ष्य जीवन कौशल और वास्तविक जीवन की मुश्किलों को हल करना है। देश में नौकरियों की संख्या कम हो रही है और इस जगह को भरने के लिए एआइसीटीई ने राष्ट्रीय छात्र स्टार्टअप नीति तैयार की है। उन्होंने कहा कि हमें इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ उन मूल्यों की जानकारी भी दें जिनकी बदौलत एक व्यक्ति, एक समाज आगे बढ़ता है।

सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए राजस्थान की तकनीकी उच्चतर शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने कहा कि इसी शिक्षण सत्र से राजस्थान के करीब 220 सरकारी कॉलेजों में अत्याधुनिक भाषा प्रयोगशालाएं बनाई जाएंगी क्योंकि वैश्वीकरण के इस दौर में भाषा का ज्ञान अनिवार्य है। स्नातक सीटों का असर स्नातकोत्तर सीटों पर एआइसीटीई के एक अधिकारी के मुताबिक, जैसे-जैसे स्नातक सीटों की संख्या में कमी आ रही है, उसका सीधा असर स्नातकोत्तर सीटों पर पड़ रहा है। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज की जा रही है।

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