December 03, 2016

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डिजिटल इंडिया के दौर में जीआईएस एंड रिमोट सेंसिंग का कोर्स एक बेहतर विकल्प

आधुनिक समय में यह तेजी से विकास करता हुआ क्षेत्र है और करियर के लिहाज से भी इस क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं।

भूगोल, जियोलॉजी, एग्रीकल्चर और इंजीनियरिंग क्षेत्र से संबंधित छात्र इस क्षेत्र में M.Sc., M.Tech.कोर्स चुन सकते हैं।

गूगल मैप्स, सेटेलाइट नेविगेशन सिस्टम या जीपीएस कैब के बारे में लोग दिलचस्पी रखते हैं पर अगर जियोइंफॉर्मेटिक्स के बारे में ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं होती। जियोइंफॉर्मेटिक्स को जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन साइंस (GIS)नाम से भी जाना जाता है। इसका एक दूसरा नाम जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी भी है। आधुनिक समय में यह तेजी से विकास करता हुआ क्षेत्र है और करियर के लिहाज से भी इस क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। ‘फंडामेंटल्स ऑफ जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम’ के लेखक बताते हैं कि जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन साइंस सूचना के स्ट्रक्चर, क्लासिफिकेशन, स्टोरेज, प्रोसेसिंग और इस्तेमाल का विज्ञान है। इसका इस्तेमाल हमारे ग्रह और इसके संसाधनों को एनालाइज और विजुवलाइज करने के लिए किया जाता है। इसके जरिए पृथ्वी की सीमाओं, सागर, प्राकृतिक संसाधन और कई अन्य चीजों का तकनीकी अध्ययन किया जाता है। इसका सबसे महत्वपूर्ण इस्तेमाल भौगोलिक समस्याओं का अध्ययन है। इसमें इमेजेस की रिमोट सेसिंग भी शामिल है। इसके अलावा इसमें मैंपिंग, मॉडलिंग, डाटाबेस डवलपमेंट, इंफॉर्मेशन सिस्टम डिजाइन भी की जाती है। जियोकंप्यूटिंग और जियोविजुवलाइजेशन से जियो इंफॉर्मेशन का विश्लेषण किया जाता है। इन सब चीजों का अध्ययन करके इसे यूजर फ्रेंडली फॉर्मेट का प्रारूप दिया जाता है। जियोइंफॉर्मेटिक्स एक विशेष फील्ड है और इस क्षेत्र में सफल होने के लिए विज्ञान का ज्ञान होना आवश्यक है। इसलिए यह कोर्स करने के लिए विज्ञान बैकग्राउंड अनिवार्य है। भूगोल, जियोलॉजी, एग्रीकल्चर और इंजीनियरिंग क्षेत्र से संबंधित छात्र इस क्षेत्र में M.Sc., M.Tech.कोर्स चुन सकते हैं। इसके अलावा जियोइंफॉर्मेटिक्स और रिमोट सेंसिग क्षेत्र में PhD करना भी एक अच्छा विकल्प है। PhD कोर्स के अलावा इस क्षेत्र में शॉर्टर डिप्लोमा और M.A. भी किया जा सकता है। भारत में यह कोर्स इन कॉलेज में उपलब्ध है।

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग एंड सेंसिंग
इडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) रुड़की, खड़गपुर, कानपुर
बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रांची, कोलकाता
स्पेस एप्लीकेशन सेंटर , अहमदाबाद
इसरो, बैंगलोर
जवाहर लाल नेहरू टेक्निकल यूनीवर्सिटी

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First Published on November 8, 2016 2:16 pm

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