May 29, 2017

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सीए के सिलेबस में बड़ा बदलाव, अब CPT में होंगे 400 अंक, नवंबर 2016 से लागू

सीए करने वाले विद्यार्थियों को अब तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। तकनीकी प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को व्यक्तिगत विकास और सॉफ्ट स्किल आदि के बारे में विस्तार से बताया जाएगा।

नया सिलेबस मई 2017 से लागू हो सकता है।

भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (आईसीएआई) चार्टर्ड अकाउंटेंसी के सिलेबस में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। ये बदलाव नवंबर 2016 से लागू होंगे। संस्थान अब सिलेबस में नए विषय शामिल करने के साथ-साथ ओपन बुक टेस्ट भी शुरू करने जा रहा है। फिलहाल चार्टर्ड अकाउंटेंसी का कोर्स तीन स्तर पर बंटा हुआ है। इसमें पहला है कॉमन प्रोफिसिएंसी टेस्ट जिसे सरल भाषा में लोग सीपीटी कहते हैं। दूसरा है, इंटीग्रेटिड प्रोफेशनल काम्पीटेंसी कोर्स (आईपीसीसी) और तीसरी अंतिम परीक्षा होती है। अब नए सिलेबस के मुताबिक सीपीटी को और कठिन किया जा रहा है। इसके तहत फाउंडेशन कोर्स में दो नए विषय शामिल किए जा रहे हैं। सीपीटी में अब बहुविकल्पीय प्रश्नों के साथ व्याख्यात्मक सवाल भी होंगे। फाउंडेशन कोर्स में दो नए विषय बिजनेस कॉरस्पोंडेंस एंड रिपोर्टिग और बिजनेस एंड कमर्शियल नॉलेज शामिल किए जा रहे हैं। सीए के लिए अब 10वीं की बजाय 12वीं से रजिस्ट्रेशन होगा। विद्यार्थियों को फाउंडेशन परीक्षा के बाद चार माह की पढ़ाई करनी होगी।

इसी तरह आईपीसीसी के स्तर पर इकोनोमिक्स फोर फाइनेंस विषय को जोड़ गया है। इसके अलावा अंतिम परीक्षा में भी विद्यार्थियों को और विकल्प उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें रिस्क मैनेजमेंट, इंटरनेशनल टेक्सेशन, फाईनेंशियल सर्विसेज एंड कैपिटल मार्केट्स, ग्लोबल फाईनेंशियल रिपोर्टिग स्टैंडर्ड, इकोनोमिक्स लॉ एंड मल्टी डिसिप्लीनरी केस शामिल हैं। ये पेपर ओपन बुक टेस्ट पर आधारित होंगे और सवाल केस स्टडीज से पूछे जाएंगे। नए कोर्स के अनुसार अब सीए फाउंडेशन कोर्स का पेपर 200 अंकों की बजाए 400 अंकों का होगा। इसमें ऑब्जेक्टिव और सब्जेक्टिव दो पेपर होंगे,जो 200-200 अंकों के होंगे। पहले केवल 200 अंकों का ऑब्जेक्टिव पेपर होता था।

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आईसीएआई के अध्यक्ष एम. देवराजा रेड्डी के मुताबिक ग्लोबलाइजेशन की वजह से दुनियाभर में टैक्सेशन और फाइनांस के अवसर मिल रहे हैं। हालांकि, यह चार्टर्ड अकाउंटेंसी पेशे के लिए चुनौती बनकर आया है। इसके अतिरक्त देश में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंटरनेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिग स्टैंडर्डस (आईएफआरएस) के कारण भी आईसीएआई को अपने पाठय़क्रम में बदलाव करने की जरूरत महसूस हुई है। उन्होंने कहा कि आईएफआरएस को व्यापार और वित्त मामले की एक कॉमन भाषा के रूप में विकसित किया गया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कंपनियों के अकाउंट की तुलना हो सके। 1 अप्रैल 2016 से आईसीएआई देश में आईएफआरएस को भारत अनिवार्य करने जा रहा है।

सीए करने वाले विद्यार्थियों को अब तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। तकनीकी प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को व्यक्तिगत विकास और सॉफ्ट स्किल आदि के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। इसके अतिरिक्त इंफोर्मेशन सिस्टम कंट्रोल एंड ऑडिट का नाम बदलकर इंफोर्मेशन सिस्टम रिस्क मैनेजमेंट एंड ऑडिट किया जाएगा। यह एडवांस्ड इंटीग्रेटिड कोर्स का हिस्सा होगा। गौरतलब है कि इस साल अप्रैल में ही केन्द्र सरकार ने सीए को सिलेबस में बदलाव को मंजूरी दी थी।

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First Published on October 16, 2016 10:02 am

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