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संपादकीयः पैलेट का विकल्प

जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शनकारियों और पत्थर फेंकने वाले लोगों पर पैलेट गन के इस्तेमाल पर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं।
Author March 29, 2017 03:55 am
जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शनकारियों और पत्थर फेंकने वाले लोगों पर पैलेट गन के इस्तेमाल पर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शनकारियों और पत्थर फेंकने वाले लोगों पर पैलेट गन के इस्तेमाल पर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं। कई मानवाधिकारवादी संगठन और राज्य की कई संस्थाएं पैलेट गन पर रोक लगाने की मांग करती रही हैं। लेकिन यह मामला अभी तक अनसुलझा पड़ा है। इस बीच सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह कश्मीर घाटी में उपद्रवियों से निपटने के लिए पैलेट गन के बजाय कोई और प्रभावी तरीका इस्तेमाल करे। अदालत ने कहा कि असल में यह मसला जीवन और मृत्यु का है। उसने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट देखी है और उसमें लेजर रेजर, तीव्र गंध वाला पानी या एक खास किस्म की गैस आदि इस्तेमाल करने के सुझाव हैं। प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाले पीठ ने प्रदर्शनों में चोटिल नाबालिग बच्चों को लेकर चिंता जताई और सरकार से पूछा कि ऐसे बच्चों के माता-पिता के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है? क्योंकि अगर बालिग लोग इसमें शामिल होते हैं तो यह पुलिस और उपद्रवियों के बीच का मामला है, लेकिन अगर बच्चों को मानव-कवच के रूप में इस्तेमाल किया जाता तो इसके लिए उनके अभिभावक जिम्मेवार हैं। इस पर अटार्नी जनरल रोहतगी ने दलील दी कि ऐसा करना इसलिए संभव नहीं हो पाएगा कि अव्वल तो किसी माता-पिता के लिए सोलह-सत्रह साल के लड़के पर नजर रखना मुश्किल है और अगर माता-पिता पर कार्रवाई शुरू की जाएगी तो यह काफी उथल-पुथल की स्थिति ला देगी। अदालत का कहना था कि राज्य को अपनी कल्याणकारी भूमिका नहीं भूलनी चाहिए। लोगों के जीवन की रक्षा करना और उन्हें सुरक्षा देना राज्य का कर्तव्य है।

अदालत जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में अदालत से यह निर्देश जारी करने की मांग की गई है कि पैलेट गन के इस्तेमाल को रोका जाए और अगर किसी खास परिस्थिति में इसका उपयोग भीड़ पर करना जरूरी हो तो मजिस्ट्रेट से आदेश लिया जाए। याचिका में कहा गया है कि हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद जुलाई 2016 में घाटी में भड़के उपद्रवों से निपटने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ था, जिसमें पचास लोग मारे गए थे और करीब तीन सौ लोग आंशिक या पूरी तरह से अंधे हो गए हैं। अदालत ने अटार्नी से कहा कि इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। दूसरे कौन-कौन से तरीके हो सकते हैं, इसे बारे में भी सरकार बताए। पीठ ने कहा, ‘हम मानते हैं कि कई तरह के दबाव हैं।

लेकिन, क्या तरीका हो सकता जिसमें किसी निर्दोष नागरिक को कोई हानि न पहुंचे? हम कतई यह मंजूर नहीं करेंगे कि जहां सेना के जवान मारे जा रहे हों, वहां कोई ढील दी जाए। लेकिन, यहां सवाल दोनों पक्षों की हिफाजत का है। यह कोई अदालती मसला भी नहीं है, लेकिन हम खुश होंगे अगर कोई रास्ता निकल आए।’ इससे पहले, दिसंबर में भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सड़कों पर प्रदर्शन करने वालों को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन का अविवेकपूर्ण इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। अदालत के ताजा निर्देश के बाद उम्मीद की जानी चाहिए कि जरूर कोई उचित विकल्प निकलेगा।

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  1. Narendra Batra
    Mar 29, 2017 at 2:03 pm
    suno adalt ke andho desh ki sena par jo pathar barsaye wo kitne saal ka hai usse koi fark nahi padta kyoki wo sena ke kaam karne se rok raha hai us par deshdroh ka mamla banta hai aur cort ko sena ke masle me nahi padna chahiye jab kal 63 senik ghayal hue hai tab cort ko nahi dikha hai dogle majistewd hai ya deshdrohi hai jo sena ke jawano ko marte dekhna chahte hai
    (0)(0)
    Reply
    1. R
      Rajendra Vora
      Mar 29, 2017 at 12:19 pm
      Psedosecular party, media aur nyaytantra sabhi ko ye dikhta he ki pellet gun ka istemal ho raha he. Lekin koi surksha balo ke baare me kuchh nahi kehata. Kya unhe apni jaan bachane ka haq nahi he? Kyo koi un pathhar bajio ke liye koi bayan nahi deta? Kya suraksha rakshak aur fauzi marne ke liye he. Jaise ki ek rajkarni ke kaha tha ki ye to marne ke liye hi sena me bharati hote he.
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