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संपादकीयः जीएसटी की तस्वीर

बहुप्रचारित-बहुप्रतीक्षित जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर कानून पहली जुलाई से लागू हो जाएगा। इसका सीधा मतलब होगा कि अब तक लगने वाले दूसरे किस्म के कर, मसलन सीमा शुल्क व उत्पाद शुल्क, सेवा-कर, प्रवेश-कर, मनोरंजन-कर और वैट वगैरह सब इसी में समाहित हो जाएंगे।
Author May 20, 2017 03:21 am
प्रतीकात्मक फोटो। (फाइल)

बहुप्रचारित-बहुप्रतीक्षित जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर कानून पहली जुलाई से लागू हो जाएगा। इसका सीधा मतलब होगा कि अब तक लगने वाले दूसरे किस्म के कर, मसलन सीमा शुल्क व उत्पाद शुल्क, सेवा-कर, प्रवेश-कर, मनोरंजन-कर और वैट वगैरह सब इसी में समाहित हो जाएंगे। आजादी के बाद इसे देश का सबसे बड़ा कर-सुधार कहा जा रहा है। श्रीनगर में जीएसटी परिषद की संपन्न हुई बैठक के बाद वित्तमंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को जीएसटी की दरों का एलान किया। छह श्रेणी की चीजें रह गई थीं, जिन पर शुक्रवार की शाम फैसला हो गया। इन छह वस्तुओं यानी सोना, ब्रांडेड वस्तुओं, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों वगैरह को छोड़ कर 1205 वस्तुओं की कर की दर और छूट की सूची को अंतिम रूप दे दिया गया था, जिनमें से खाद्यान्न, मोटे अनाज और दूध-दही को कर के दायरे से बाहर रखा गया है। पेट्रोल-डीजल पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि इन पर जीएसटी लागू नहीं होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि पूरे देश में जीएसटी के लागू होते ही शून्य-कर के दायरे वाली उक्त चीजों के दाम अपने आप गिर जाएंगे।

जिन वस्तुओं की सूची जारी की गई है, उनमें से 81 फीसद वस्तुओं की कीमतों पर अठारह फीसद तक कर लगेगा। करों की कई श्रेणियां बनाई गई हैं। एक मोटी अटकल यह है कि रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें, जैसे- केश तेल, साबुन, टूथपेस्ट, गेहूं, चावल, मिठाई, चीनी, खाद्य तेल वगैरह सस्ते हो जाएंगे। इनमें कई ऐसी वस्तुएं हैं, जिन पर अट्ठाईस फीसद कर लगता था, जो अब अठारह फीसद हो जाएगा। बहु-उपयोगी कोयले पर 11.69 फीसद की जगह नई व्यवस्था में कर पांच फीसद होगा, जिस वजह से इसके दामों भी भारी गिरावट होगी। शीतल पेय और कारों को उच्च कर श्रेणी में रखा गया है, जिन पर अट्ठाईस फीसद कर लगेगा। उच्च कर के अलावा छोटी कारों पर एक फीसद उप-कर, मझोली कारों पर तीन फीसद और लक्जरी कारों पर पंद्रह फीसद उप-कर लगेगा।

इसके बावजूद, कहा जा रहा है कि कारों की कीमतें बढ़ेंगी नहीं, बल्कि घटेंगी ही! शुक्रवार को हुई परिषद की बैठक में स्वास्थ्य और शिक्षा को जीएसटी के दायरे से बाहर रखने का फैसला किया गया। हालांकि इसका व्यापक रूप में क्या लाभ होगा, अभी इसका अंदाजा लगाना कठिन है। सिनेमाहॉलों, जुआघरों, होटलों, घुड़दौड़ जैसे उपक्रमों पर उच्चश्रेणी का यानी अट्ठाईस फीसद कर लगेगा। इसमें दंड की भी कड़ी व्यवस्था की गई है। तीन महीने के भीतर कर न जमा करने पर कई तरह की सजा का भी प्रावधान है, जिनमें अर्थदंड से लेकर कारावास तक शामिल है। दूसरी बार या बार-बार गलती मिलने पर पांच साल का कारावास और भारी जुर्माना हो सकता है। अगर गलती करने वाली संस्था या कंपनी हुई तो उसके निदेशक समेत अन्य पदाधिकारियों को दंडित किया जाएगा।

कई चीजों को जीएसटी से बाहर रखने और कई पर रियायती कर लगाने की जरूरत सरकार को क्यों महसूस हुई? क्या उसे यह अंदेशा था कि कीमतें चढ़ जाएंगी, और जीएसटी के महिमामंडन का मुलम्मा जल्दी ही उतर जाएगा? अभी घोषित रियायतें क्या टिकाऊ होंगी, या यह बस एक शुरुआती लोकलुभावन कदम है? जीएसटी से विकास दर तेज होने का भरोसा दिलाया गया है। पर इससे पहले जिन देशों- जापान, कनाडा, सिंगापुर, आस्टेÑलिया और मलेशिया- में जीएसटी लागू हुआ, वहां सकल घरेलू उत्पाद में गिरावट आई है। एक और आशंका राज्यों की राजस्व-कटौती को लेकर है। लेकिन यह सब अभी भविष्य के गर्भ में है।

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