December 04, 2016

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संपादकीयः पसरती धुंध

देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण से मचा हाहाकार थमा नहीं था कि उत्तर प्रदेश सरकार को भी असामान्य धुंध पर अदालत ने तलब कर लिया।

Author November 11, 2016 02:31 am
प्रदूषण।

देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण से मचा हाहाकार थमा नहीं था कि उत्तर प्रदेश सरकार को भी असामान्य धुंध पर अदालत ने तलब कर लिया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से लखनऊ समेत कई शहरों में छाई धुंध से निपटने के उपायों के बारे में जानकारी मांगी है। दीवाली के बाद दिल्ली में धुंध और कोहरे की ऐसी घनी परत छा गई कि नागरिकों का सांस लेना दूभर हो गया था। केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार ने इससे निपटने के लिए छोटे-मोटे फौरी उपाय भी किए। इसे मौसम की मेहरबानी ही कहना चाहिए कि धुंध की परत पूरी तरह तो नहीं, लेकिन आंशिक रूप से छंटी है। अनुमान है कि दिल्ली से सटे राज्य उत्तर प्रदेश में हवाओं के रुख में तबदीली होने की वजह से कई शहर घनी धुंध की चपेट में आ गए हैं। ऐसे में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लोगों की सेहत का खयाल रखते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव से संबंधित विभागों को समुचित निर्देश देने और इस संकट से निपटने के उपायों पर फौरन जानकारी देने को कहा है तो इस चिंता का स्वागत किया जाना चाहिए। जाहिर है कि सरकार के ढुलमुल रवैए की वजह से अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा है। दो याचिकाएं दाखिल करके अदालत से आदेश पारित करने की मांग की गई थी।

 

 

याचिकाओं के मुताबिक लखनऊ समेत कई शहर इस समय बुरी तरह धुंध की चपेट में हैं, जिससे लोग सांस संबंधी तकलीफें झेल रहे हैं। आंखों में जलन और गले में खराश महसूस हो रही है। अदालत ने भी माना है कि प्रदेश में इस तरह का संकट ‘अपूर्व’ है, इसीलिए उसने राज्य सरकार को फौरी उपचारात्मक कदम उठाने के लिए कहा है। इस संबंध में दिल्ली की सरकार हो या उत्तर प्रदेश की, फिलहाल कोई ठीकठाक अध्ययन नहीं कराया है, लेकिन मोटा अनुमान यह है कि फसलों के ठूंठ (अवशेष) और उपले जलाने की वजह से धुंध की परत की मोटाई बढ़ गई है। इसमें वाहन प्रदूषण, धूल-धक्कड़, कारखानों और भट्ठों से निकलने वाले धुएं आदि मिलकर कोढ़ में खाज का काम कर रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि शीतकाल में हवा की गति मंद होती है, जिसकी वजह से वायु में घुलमिल गए किसी भी तरह के कण जम जाते हैं। इससे हवा भारी हो जाती है और उसमें शामिल धूलकण सांस लेने पर इंसान के फेफड़ों में जाकर मुश्किल पैदा करते हैं।
उच्च न्यायालय के आदेश का इतना असर जरूर हुआ है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बहुमंजिला इमारतों के निर्माण-कार्य और स्टोन क्रशर चलाने पर दो दिन के लिए रोक लगा दी है, साथ में वाहन और जेनरेटर आदि नियमानुसार चलाने तथा कूड़े आदि के निस्तारण में सख्ती बरतने के लिए कहा है। ठंड में कोहरे का होना कोई नई बात नहीं है, पर यह पता लगाया

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First Published on November 11, 2016 2:31 am

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