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पांच साल के लम्‍बे सफर के बाद जुपिटर पहुंचा जूनो, 2018 में खुद हो जाएगा तबाह

अगर वैज्ञानिक जुपिटर का इतिहास ढूंढने में कामयाब रहते हैं तो हमें पृथ्‍वी और बाकी सौरमंडल के विकास की प्रकिया का पता चल सकेगा।
Author नई दिल्‍ली | July 5, 2016 14:15 pm
बृहस्‍पति की कक्षा में प्रवेश करता जूनो। (Source: NASA)

भारी रेडिएशन से जूझते हुए NASA का स्‍पेसक्राफ्ट जूनो सोमवार को बृहस्‍पति (जुपिटर) पहुंच गया। जूनो को जुपिटर तक पहुंचने में पांच साल लगे हैं। वहां पहुंचते-पहुंचते जूनो ने अपना रॉकेट दागा ताकि उसकी स्‍पीड कम हो सके और वह जुपिटर की कक्षा में दाखिल हो सके। पृथ्‍वी और जुपिटर के बीच संचार अंतराल होने की वजह से जूनो इस दौरान ऑटोपायलट मोड में था। जुपिटर के पहुंचते ही वहां के कैमरा और अन्‍य उपकरण बंद कर दिए गए। जूनो के जुपिटर की कक्षा में दाखिल होने से घंटों पहले NASA ने पिछले हफ्ते खींची गई तस्‍वीरें रिलीज की हैं। वैज्ञानिकों ने वादा किया है कि जब जूनो जुपिटर के बादलों में दाखिल होगा, तो वे ग्रह की नजदीकी तस्‍वीरें जारी करेंगे। बृहस्‍पति को अभी हाइड्रोजन और हीलियम गैसों के गोले के तौर पर जाना जाता है।

अपने बादलों और रंगीन धारियों के साथ, जुपिटर एक अलग दुनिया माना जाता है। कहा जाता है कि यह सबसे पहले बनने वाला ग्रह था, सूरज के बनने के कुछ ही देर बाद। अगर वैज्ञानिक जुपिटर का इतिहास ढूंढने में कामयाब रहते हैं तो हमें पृथ्‍वी और बाकी सौरमंडल के विकास की प्रकिया का पता चल सकेगा। जूनों का नाम रोम की पौराणिक कथाओं में जुपिटर की बादलों को छेदने वाली पत्‍नी के नाम पर रखा गया है। इससे पहले 1989 में लॉन्‍च किया गया गैलीलियो करीब एक दशक तक जुपिटर के चक्‍कर लगाता रहा। गैलीलियो के जरिए ही हमें पता चला कि बृहस्‍पति के एक चांद यूरोपा के बर्फीले तल के नीचे एक समुद्र के निशान मौजूद हैं, इससे धरती के बाहर जीवन तलाशने की कोशिशों को नया बल मिला।

 

जूनो का मिशन जुपिटर के बादलों से भरे वातावरण के भीतर देखता है। इसके अलावा जूनो कई सवालों के जवाब भी ढूंढेगा जैसे वहां कितना पानी है? क्‍या वहां कोई ठोस कोर है? जुपिटर की उत्‍तरी और दक्षिणी रोशनी पूरे सौरमंडल में सबसे चमकदार क्‍यों है? इसके अलावा जूनो बृहस्‍पति के लाल धब्‍बे के रहस्‍य का भी पता लगाने की कोशिश करेगा, जिसके बारे में हब्‍बल टेलीस्‍कोप ने खुलासा किया था कि सदियों पुराना यह तूफान अब कमजोर हो रहा है।

आने वाले कुछ दिनों में जूनो अपने उपकरणों को फिर से शुरू करेगा। लेकिन असली काम अगस्‍त के आखिरी दिनों में शुरू होगा जब स्‍पेसक्राफ्ट ग्रह के और नजदीक जाएगा। योजना है कि जूनो को जुपिटर के बादलों में 5,000 किलोमीटर तक भेजा जाएगा ताकि ग्रह के गुरुत्‍वाकर्षण और चुंबकीय क्षेत्र का पता लगाया जा सके।

जूनो के कंप्‍यूटर और इले‍क्‍ट्रानिक्‍स टाइटेनियम की एक तिजारी में बंद किए गए हैं ताकि खतरनाक रेडिएशन से बचाया जा सके। इसके बावजूद अगर मिशन के दौरान जूनो 100 मिलियन डेंटल एक्‍स-रे के बराबर या ज्‍यादा रेडिएशन होने पर फट जाएगा। गैलीलियो की तरह जूनो भी 2018 में खुद को नष्‍ट कर लेगा। तब वह बृहस्‍पति के वातावरण में कूदेगा और खो जाएगा। ऐसा करेगा इसलिए जरूरी है ताकि स्‍पेसक्राफ्ट को बृह‍स्‍पति के किसी भी चांद पर दुर्घटनाग्रस्‍त होने से बचाया जा सके।

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