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Guru Nanak Jayanti ‘Birthday’ 2016: गुरुपर्व से जुड़े कुछ खास शुभकामना संदेश जानिए

सिख धर्म के संस्थापक और प्रथम गुरु नानक देव जी के जन्म के उपलक्ष्य में गुरु पर्व मनाया जाता है।
Author November 14, 2016 06:01 am
सिख धर्म के संस्थापक और प्रथम गुरु नानक देव जी।

सिख धर्म के संस्थापक और प्रथम गुरु नानक देव जी के जन्म के उपलक्ष्य में गुरु पर्व मनाया जाता है। सिख गुरु नानक देव जी के जन्मोत्सव की बेहद खुशी और उत्साह से मनाते हैं। गुरु पर्व को गुरु नानक जयंती या गुरु नानक प्रकाशोत्सव के नाम से भी जाना जाता है। गुरु नानक जी का जन्म 547 साल पहले 15 अप्रैल, 1469 को तलवंडी में हुआ, जिसे अब ननकाना साहिब नाम से जाना जाता है। इस दिन को सिख धर्म के अनुयायी गुरु पर्व के रूप में मनाते हैं। इस दिन सिख धर्म के अनुयायी सोशल मीडिया और फोन से एक दूसरे को गुरुपर्व की बधाई देते हैं। ऐसे में हम आपको बता रहे है कुछ मेसेज जो आप अपने परिचित तो को बधाई देने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

सोशल मीडिया और फोन पर दिए जा सकने वाले बधाई संदेश।
प्रिउ प्रिउ करती सभु जगु फिरी मेरी पिआस न जाइ॥
नानक सतिगुरि मिलिऐ मेरी पिआस गई पिरु पाइआ घरि आइ॥२॥
गुरपुरब की शुभ कामनायें!

ੴ सतिगुर प्रसादि॥
नमसकारु गुरदेव को सति नामु जिसु मंत्र सुणाइआ।
भवजल विचों कढि कै मुकति पदारथि माहि समाइआ।
जनम मरण भउ कटिआ संसा रोगु वियोगु मिटाइआ।
संसा इहु संसारु है जनम मरन विचि दुखु सवाइआ।
जम दंडु सिरौं न उतरै साकति दुरजन जनमु गवाइआ।
चरन गहे गुरदेव दे सति सबदु दे मुकति कराइआ।
भाउ भगति गुरपुरबि करि नामु दानु इसनानु द्रिड़ाइआ।
जेहा बीउ तेहा फलु पाइआ ॥१॥
गुरु नानक देव जी प्रकाश पुरब की आप सब को बधाई!

गुरमुखि धिआवहि सि अम्रित पावहि सेई सूचे होही ॥
अहिनिसि नाम जपह रे प्राणी मैले हछे होही ॥३॥
जेही रुति काइआ सुख तेहा तेहो जेही देही ॥
नानक रुति सुहावी साई बिन नावै रुति केही ॥४॥१॥

जो गुरमुख ध्यान करते हैं, दिव्य अमृत पाते हैं वो पूरी तरह शुद्ध हो जाते हैं,
दिन रात प्रभु का नाम जपो तो तुम्हारी आत्मा भी शुद्ध हो जाती है,
जैसी यह ऋतु है वैसे ही हमारा शरीर अपने आप को ढाल लेता है,
नानक कह रहे हैं कि जिस ऋतु में प्रभु का नाम नहीं उस ऋतु का कोई महत्व नहीं है।
गुरु नानक देव जी के प्रकाश पुरब की शुभ कामनायें!

तुधनो सेवहि तुझ किआ देवहि मांगहि लेवहि रहहि नही ॥
तू दाता जीआ सभना का जीआ अंदरि जीउ तुही ॥२॥

हे प्रभु जो लोग तुम्हारी सेवा करते हैं वो तुम्हें क्या दे सकते हैं, वो तो खुद तुमसे माँगते हैं;
तुम सभी आत्माओं के महान दाता हो, सभी जीवित प्राणियों के भीतर जीवन हो।
गुरु नानक देव जी के आगमन पर्व की शुभ कामनायें!

तन महि मैल नाही मन राता ॥
गुर बचनी सच सबदि पछाता ॥
तेरा ताण नाम की वडिआई ॥
नानक रहणा भगति सरणाई ॥४॥१०॥

जिसका मन प्रभु के अभ्यस्त है, उसके शरीर में कोई प्रदूषण नहीं है;
गुरु के शब्द के माध्यम से सच्चे शब्द का एहसास होता है;
सभी शक्तियां तुम्हारे नाम के माध्यम से तुम्हारी हैं;
नानक अपने भक्तों के अभयारण्य में पालन करता है।
गुरु नानक देव जी के प्रकाश पुरब की शुभ कामनायें!

सिख धर्म के संस्थापक और प्रथम गुरु नानक देव जी। सिख धर्म के संस्थापक और प्रथम गुरु नानक देव जी।

सरम खंड की बाणी रूपु ॥
तिथै घाड़ति घड़ीऐ बहुतु अनूपु ॥
ता कीआ गला कथीआ ना जाहि ॥
जे को कहै पिछै पछुताइ ॥
तिथै घड़ीऐ सुरति मति मनि बुधि ॥
तिथै घड़ीऐ सुरा सिधा की सुधि ॥३६॥

विनम्रता के दायरे में, शब्द सौंदर्य है;
अतुलनीय सौंदर्य के प्रपत्र वहाँ विचारों के हैं;
जिसको वर्णित नहीं किया जा सकता;
जो इसे वर्णित करना चाहे वो पछतायेगा;
मन की सहज चेतना, बुद्धि और समझ वहाँ आकार लेते हैं;
आध्यात्मिक योद्धाओं और सिद्ध, की आध्यात्मिक पूर्णता चेतना वहां आकार लेती है।
गुरु नानक देव जी के प्रकाश पुरब की शुभ कामनायें!

ੴ सतिगुर प्रसादि॥
नमसकारु गुरदेव को सति नामु जिसु मंत्र सुणाइआ।
भवजल विचों कढि कै मुकति पदारथि माहि समाइआ।
जनम मरण भउ कटिआ संसा रोगु वियोगु मिटाइआ।
संसा इहु संसारु है जनम मरन विचि दुखु सवाइआ।
जम दंडु सिरौं न उतरै साकति दुरजन जनमु गवाइआ।
चरन गहे गुरदेव दे सति सबदु दे मुकति कराइआ।
भाउ भगति गुरपुरबि करि नामु दानु इसनानु द्रिड़ाइआ।
जेहा बीउ तेहा फलु पाइआ॥१॥
गुरु नानक देव जी प्रकाश पुरब की बधाई!

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