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जेब में थे सिर्फ 6 हजार डॉलर और खरीद डाली 60 लाख डॉलर की कंपनी, आज हैं अरबों के मालिक

आज 70 साल के राहुल शुक्ला उस कंपनी के प्रेजिडेंट और सीईओ हैं, जहां से कभी उन्होंने क्वॉलिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर के तौर पर शुरुआत की थी।

न्यू जर्सी की एक कंपनी एसएस वाइट टेक्नॉलजीज में बतौर डायरेक्टर (रिसर्च) काम करने वाले राहुल शुक्ला साल 1988 में एक दिन घर लौट आए और पत्नी मीना को बताया कि कंपनी बिकने वाली है। नौकरी जाने की बात सुनकर वह चिंता में पड़ गईं और शुक्ला से आगे की प्लानिंग पूछी। उन्होंने पत्नी को हैरान करते हुए कहा, मैं उस कंपनी को खरीदना चाहता हूं। टाइम्स अॉफ इंडिया को शुक्ला ने बताया कि कंपनी खरीदने के लिए 60 लाख डॉलर की जरूरत थी और मेरी पत्नी ने बताया कि सेविंग्स में सिर्फ 6 हजार डॉलर ही हैं। उन्होंने पत्नी से कहा हम करीब हैं, बस कुछ जीरो और जोड़ने हैं। आज 70 साल के शुक्ला उस कंपनी के प्रेजिडेंट और सीईओ हैं, जहां से कभी उन्होंने क्वॉलिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर के तौर पर शुरुआत की थी।

यह बिल्कुल भी आसान नहीं था, क्योंकि शुक्ला को अलग-अलग बैंकों को आइडिया बेचने और फंड जुटाने में करीब 9 महीने का समय लगा। लेकिन आज यह हाई टेक कंपनी फ्लेक्सिबल रोटरी शाफ्ट्स बनाती है, जो 98 प्रतिशत हवाई जहाजों और स्पेस प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल किया जाता है। शुक्ला कहते हैं कि अहमदाबाद के सुरेंद्रनगर जिले के वाधवान में मैं पैदा हुआ था। मेरी पढ़ाई वाधवान, भावनगर और अहमदाबाद से हुई थी। मैंने 1971 में अमेरिका आकर इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की ओर इसके बाद एसएस वाइट में अस्थायी नौकरी कर ली।
वह बताते हैं कि आज एसएसडब्ल्यूटी की भारत, ब्रिटेन और अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग और मार्केटिंग सुविधाएं मौजूद हैं।

शुक्ला बताते हैं कि कंपनी को टेकओवर करने के बाद उनका ध्यान इनोवेशन और टेक्नॉलजी पर था। उन्होंने बताया कि हमने अपने पूरे पोर्टफोलियो में बदलाव किया और नई पीढ़ी के रिसर्च में पैसा लगाया। आज ज्यादातर हवाई जहाजों में एसएसडब्ल्यूटी द्वारा बनाए गए सिस्टम यूज होते हैं, जो लैंडिंग के दौरान काम आते हैं।

शुक्ला को उनका गुजराती ख्वाब अलग बनाता है। वह कहते हैं कि हम बिजनेस को और फैलाने की प्लानिंग कर रहे हैं। हमारे सामने भारत और चीन विकल्प हैं। भारत स्वभाविक तौर पर पसंद है और यहां नोएडा में साल 2008 में प्लांट लगाया गया था। लेकिन मेरे पिता ने कहा कि मुझे अपनी पैतृक जगह के लिए भी कुछ करना चाहिए। इसके बाद रोटली शाफ्ट्स और मेडिकल उपकरण बनाने वाली पूरी यूनिट सुरेंद्रनगर शिफ्ट कर दी गई।

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