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जेटली के लिए बैटिंग करने उतरी गंभीर-सहवाग की सलामी जोड़ी

भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे दिल्ली व जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के पूर्व अध्यक्ष अरुण जेटली को रविवार को राज्य के दो स्टार क्रिकेटरों वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर का समर्थन मिला..
Author नई दिल्ली | December 21, 2015 01:17 am
वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे दिल्ली व जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के पूर्व अध्यक्ष अरुण जेटली को रविवार को राज्य के दो स्टार क्रिकेटरों वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर का समर्थन मिला। वर्ष 2013 तक 13 साल डीडीसीए के प्रमुख रहे केंद्रीय वित्त मंत्री जेटली पर दिल्ली सरकार ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। दिल्ली सरकार ने मांग की है कि स्वतंत्र जांच के लिए जेटली इस्तीफा दें या उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से ‘हटाया’ जाए।

गंभीर और सहवाग ने हालांकि जेटली का समर्थन किया। गंभीर ने ट्वीट किया कि डीडीसीए में भ्रष्टाचार के लिए अरुण जेटली को दोषी ठहराना बिलकुल अनुचित है। वही वह व्यक्ति हैं जिन्होंने करदाताओं के पैसे के बिना दिल्ली को उपयुक्त स्टेडियम दिलाया। यह देखकर बुरा लगा कि कुछ पूर्व खिलाड़ी डीडीसीए में जो भी गलत है, उसके लिए अरुण जेटली को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। जबकि उन्हीं की बदौलत उन्होंने डीडीसीए में बड़े पद का लुत्फ उठाया है।

इस साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने वाले सहवाग किसी भी तरह का राजनीतिक बयान देने से बचे लेकिन उन्होंने ट्वीट करके खिलाड़ियों की मदद में जेटली की भूमिका के लिए उनकी सराहना की। इस रणजी सत्र में दिल्ली की जगह हरियाणा से खेलने वाले सहवाग ने लिखा, ‘डीडीसीए के साथ जुड़े रहने के दौरान अगर मुझे कभी भी किसी खिलाड़ी के ‘हैरानी भरे’ चयन के बारे में पता चला तो मुझे सिर्फ अरुण जेटली को सूचना देनी होती थी’।

भारत की ओर से 104 टैस्ट खेलने वाले सहवाग ने कहा, ‘और अरुण जेटली तुरंत सुनिश्चित करते थे कि सुधार हो और डीडीसीए में हकदार खिलाड़ी के साथ न्याय हो। डीडीसीए में कुछ अन्य से बात करना बुरे सपने की तरह था लेकिन अरुण जेटली मुश्किल के समय हमेशा खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध रहते थे’। दिल्ली के एक अन्य खिलाड़ी भारतीय तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा ने भी जेटली का समर्थन किया। इशांत ने ट्वीट किया, ‘अरुण जेटली से मैंने जब भी बात की तो वह हमेशा मददगार, निष्पक्ष और विनम्र रहे’।

पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने पूरी तरह जेटली के पक्ष में उतरते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में दिल्ली की क्रिकेट में कई अच्छे काम हुए लेकिन उनके पद छोड़ने के बाद पिछले दो वर्षों में ही स्थिति बदतर हुई। गंभीर ने यहां पत्रकारों से कहा कि जब तक जेटली डीडीसीए के अध्यक्ष थे, तब तक इसमें काफी अच्छे काम हुए। अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक स्टेडियम का निर्माण किया गया। आपने देखा होगा कि पहले कोटला किस तरह का स्टेडियम था और अब कैसा है। ये सब काम तभी हुए जब जेटली अध्यक्ष थे।

दिल्ली रणजी टीम के कप्तान ने कहा कि आज जो भी लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं, वे भी क्रिकेट सुधार समिति का हिस्सा थे। उन्हें शीर्ष पद दिए गए और उन्होंने दिल्ली के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि अब जबकि वे (जेटली) अध्यक्ष नहीं हैं, तब उन पर हर तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। यदि ऐसा मामला है तो फिर उन्हें डीडीसीए में ऐसे पदों पर नहीं होना चाहिए। आज सारे आरोप डीडीसीए पर नहीं बल्कि जेटली पर लगाए जा रहे हैं। मेरा सवाल है कि क्या वे अकेले डीडीसीए को चला रहे थे।

गंभीर ने आगे कहा- मेरा मानना है कि उनके पद छोड़ने के बाद स्थिति खराब हुई। अगर आप इस साल प्रथम श्रेणी सत्र से पूर्व की तैयारियों पर गौर करो तो वहां कोई गेंदबाज नहीं था, कोई विकेट या नेट्स नहीं थे। जब जेटली जी अध्यक्ष थे, तब ऐसा कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि मैं नहीं जानता कि किसी तरह का भ्रष्टाचार हुआ या नहीं, मेरा सिर्फ इतना मानना है कि मौजूदा पदाधिकारी वहां नहीं होने चाहिए क्योंकि उन्होंने कभी क्रिकेट के बारे में नहीं सोचा। पहले स्थिति बहुत अच्छी थी। पिछले दो वर्षों जैसी बुरी स्थिति डीडीसीए में पहले कभी नहीं रही। वहां कोई भी ऐसा नहीं है जिसके पास जाकर अपनी बात रख सकते हो।

गंभीर, वीरेंद्र सहवाग और कुछ अन्य सीनियर खिलाड़ियों ने डीडीसीए की खेल समिति से नाखुश होकर 2009 में प्रशासन के खिलाफ बागी तेवर अपना दिए थे। उस बगावत के बारे में गंभीर ने कहा कि हमारा विरोध जेटली जी के खिलाफ नहीं था, यह डीडीसीए के अन्य अधिकारियों के लिए था। हमने कभी उनका नाम नहीं लिया। हमने हमेशा कहा कि जब भी हमें किसी तरह की परेशानी हुई तो हम हर चीज के लिए जेटली जी के पास गए जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए था।

गंभीर ने नेत्रहीन क्रिकेटरों के लिए एक कार्यक्रम से इतर कहा कि यदि आपको हर काम के लिए जेटली जी के पास ही जाना था तो फिर अन्य अधिकारियों और प्रशासकों का क्या काम था। फिर एक संघ होने का क्या मतलब है। इसलिए तब हमें अन्य अधिकारियों से परेशानी थी और यहां तक कि अब भी हमें अन्य अधिकारियों से परेशानी है। मेरे और सहवाग के हमेशा जेटली जी के साथ बहुत अच्छे संबंध रहे।

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