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जानें कैसे: कमर का बढ़ना माने उम्र का घटना

Health: भारत में मोटापे की समस्या लगातार बढ़ रही है और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के एक अध्ययन में कहा गया है कि यह परेशानी महामारी का रूप ले सकती है।
Author नई दिल्ली | September 14, 2015 09:35 am
हर पांचवां भारतीय मोटा: अध्ययन में कमर के 90 सेमी से अधिक नाप वाले पुरुषों और 80 सेमी से अधिक नाप वाली महिलाओं को सामान्य से अधिक वजन वाले बताया गया है। अध्ययन के मुताबिक कम से कम 8.8 करोड़ भारतीय मोटापे के शिकार हो सकते हैं और जल्द ही उनका वजन सामान्य से अधिक हो सकता है। इसका मतलब है कि हर पांचवे भारतीय का वजन अधिक है।

भारत में मोटापे की समस्या लगातार बढ़ रही है और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के एक अध्ययन में कहा गया है कि यह परेशानी महामारी का रूप ले सकती है।

एक अहम अध्ययन में कहा गया है कि देश की 1.2 अरब की आबादी में से करीब 13 फीसद लोग मोटापे से पीड़ित हो सकते हैं। चेन्नई स्थित मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के डॉक्टर राजेंद्र प्रदीप ने कहा ‘कमर के आकार में वृद्धि उम्र में कमी का संकेत है’।

डॉक्टर प्रदीप अध्ययन के प्रमुख लेखक हैं। आइसीएमआर के वित्त पोषण से किए गए इस अध्ययन में भारत में वजन बढ़ने का मुख्य कारण बढ़ते शहरीकरण, मशीनीकृत परिवहन का उपयोग, फास्ट फूड का सेवन, लंबे समय तक टीवी देखना और ऐसी चीजों का अधिक सेवन है जिनमें पोषक गुण कम होते हैं।

आइसीएमआर की महानिदेशक डॉक्टर सौम्या स्वामीनाथन ने बताया कि वर्तमान में भारत में स्वास्थ्य पर असर डालने वाले मुख्य कारक उच्च रक्तचाप और अत्यधिक रक्त शर्करा आदि हैं। संस्थान के अध्ययन ‘द इंडिया डायबिटीज स्टडी’ (आइएनडीआइएबी) में कहा गया है कि 15.3 करोड़ लोग मोटापे की समस्या से पीड़ित हो सकते हैं। यह संख्या अमेरिका की आबादी की लगभग आधी है।

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इस अध्ययन में कमर के 90 सेमी से अधिक नाप वाले पुरुषों और 80 सेमी से अधिक नाप वाली महिलाओं को सामान्य से अधिक वजन वाले बताया गया है। अध्ययन में कहा गया है कि कम से कम 8.8 करोड़ भारतीय मोटापे के शिकार हो सकते हैं और जल्द ही उनका वजन सामान्य से अधिक हो सकता है। इसका मतलब है कि हर पांचवे भारतीय का वजन अधिक है।

इस बीच, ‘द लैन्सेट’ के नवीनतम अंक में स्वास्थ्य संबंधी खतरों के बारे में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है ‘कुछ ही भारतीयों को बचपन में कुपोषण या असुरक्षित जलस्रोत की वजह से बीमारियों का खतरा है। लेकिन ज्यादातर भारतीयों को उच्च रक्तचाप, अत्यधिक रक्त शर्करा और अधिक कोलेस्ट्रॉल के कारण होने वाली बीमारियों से स्वास्थ्य का खतरा है’। लुधियाना स्थित दयानंद मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के डॉक्टर गौतम आहलुवालिया ने कहा कि यह आसन्न सुनामी की तरह है। अध्ययन के मुताबिक, ‘भारत में 10 फीसद से भी कम लोग शरीर को सक्रिय रखने वाली गतिविधियां करते हैं और यह जीवनशैली संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं का मुख्य कारण है’।

आहलुवालिया ने कहा कि भारत पर दोहरी मार पड़ रही है क्योंकि एक ओर जहां वह संक्रामक बीमारियों से दो-चार होता है वहीं दूसरी ओर उसे जीवनशैली संबंधी समस्याओं जैसे गैर संचारी बीमारियों का सामना करना पड़ता है। अनुसंधानकर्ताओं के 16 सदस्यीय दल ने तमिलनाडु, महाराष्ट्र, झारखंड और चंडीगढ़ में करीब 16,000 लोगों के साथ बातचीत की और अपने काम के पहले चरण के निष्कर्ष भारतीय चिकित्सा अनुसंधान जर्नल (आइजेएमआर) के नवीनतम अंक में प्रकाशित किए।

संपूर्ण अध्ययन तीन साल में पूरा हुआ और सर्वे के दायरे में 124,000 लोग आ गए जिससे यह अपने तरह का सबसे बड़ा अध्ययन बन गया। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में किए गए इस अध्ययन में प्रत्याशित तौर पर ग्रामीण आबादी की तुलना में शहरी आबादी में मोटापे की समस्या अधिक पाई गई। रोज के खाने में गेहूं और चावल का अधिक सेवन करने वालों में मोटापे का स्तर अधिक पाया गया जबकि ज्वार का सेवन करने वालों में यह स्तर कम रहा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, पृथ्वी पर हर छठा व्यक्ति मोटापे से ग्रस्त है और हर साल मोटापे की वजह से करीब 28 लाख लोगों की जान जाती है। आज मोटापा खुद एक बीमारी बनता जा रहा है। गुड़गांव स्थित ‘पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन आॅफ इंडिया’ के अध्यक्ष डॉक्टर के श्रीनाथ रेड्डी ने कहा ‘अस्वास्थ्यकर भोजन, धूम्रपान की आदत के साथ चयापचय संबंधी जोखिम जैसे उच्च रक्तचाप, रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल के कारण भारत में हर साल 52 लाख लोगों की असमय मौत हो जाती है। इन खतरों से बचने के लिए जब तक भारत में प्रभावी ऐहतियात की रणनीतियां नहीं अपनाई जाएंगी तब तक ये खतरे बढ़ते रहेंगे’।

प्रमुख भारतीय मधुमेह विशेषज्ञ और गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल में एंडोक्राइनोलॉजी और डायबिटीज विभाग के प्रमुख डॉक्टर अंबरीश मित्तल ने कहा ‘भारत में सबसे बड़ी समस्या बच्चों में मोटापे की है। संपन्नता और शहरीकरण से जुड़े मोटापे की समस्या के कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप और दिल की बीमारी जैसी गैर संचारी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। युवाओं में बढ़ती मधुमेह की समस्या की जड़ भी मोटापे की बढ़ती समस्या से जुड़ी है। चुनौती बहुत बड़ी है और इससे निपटने के लिए हमें खानपान, अभ्यास और खास तौर पर बच्चों के लिए स्कूलों और कार्य स्थलों में स्वास्थ्यकर आहार विकल्प के बारे में जागरूकता की जरूरत है’।

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