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अब तक के सबसे अमीर भारतीय का वारिस आज छोटे से फ्लैट में बिता रहा है गुमनामी की जिंदगी

1940 के दशक में उस्मान अली खान की कुल संपत्ति करीब 2 अरब डॉलर थी, जबकि आजाद भारत का कुल रेवेन्यू महज एक अरब डॉलर था।
हैदराबाद के आखिरी निजाम उस्मान अली खान के ग्रैंडसन बुकर्रम जहां।

किसी ने ठीक ही कहा है कि वक्त बड़ा बलवान होता है। वक्त से बड़ा कोई नहीं होता। ये वक्त ही है जो अगर सही चले तो इंसान को फर्श से अर्श तक पहिंचा देता है। और अगर यही वक्त बुरा हो तो राजा को भी रंक की कतार में खड़ा कर देता है। कुछ ऐसी ही दास्तान है हिंदुस्तान के एक शाही परिवार की। एक वक्त था जब इसके पास भारत सरकार से भी ज्यादा दौलत थी लेकिन आज इसी परिवार के वारिस एक छोटे से फ्लैट में अपनी जिंदगी बसर करने को मजबूर है। जी हां ये कहानी है वक्त की मार झेल रहे हैदराबाद के शाही निजाम उस्मान अली खान के परिवार की।

उस्मान अली खान हैदराबाद रियासत के आखिरी निजाम थे। टाइम और फॉर्च्यून जैसी मैग्जीन के आकड़ों के मुताबिक उस्मान अली खान आज तक के सबसे अमीर भारतीय हैं। 1940 के दशक में उस्मान अली खान की कुल संपत्ति करीब 2 अरब डॉलर थी, जबकि आजाद भारत का कुल रेवेन्यू महज एक अरब डॉलर था।

निजाम के पास जितनी अकूत संपत्ति थी वो उतने ही शौकीन मिजाज के भी थे। कहा जाता है कि 20 करोड़ डॉलर यानि 1340 करोड़ रुपए के एक हीरे को पेपरवेट के तौर पर इस्तेमाल करते थे। आजादी के वक्त निजाम के महल में लगभग 6000 सेवक काम करते थे। महल में 38 लोग तो सिर्फ कैंडल स्टैंड की धूल साफ किया करते थे। आप इनके शाही इंतजामात का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि मौजूदा दौर में अपने देश के राष्ट्रपति भवन में सिर्फ 1500 लोगों का ही स्टाफ है।

निजामअपनी विलासिता के लिए भी काफी मशहूर थे। उनके महल का शाही हरमे हमेशां सुंदर सुंदर महारानियों से गुलजार रहता था। जब उस्मान अली खान की मौत हुई तब उनकी दर्जनों बीवियों से 86 बच्चे थे। ऐसा नहीं था कि सिर्फ हरम की बीवियों से ही उनका मन भर जाता था। हरम के बाहर की महिलाओं से भी उनके शारीरिक संबंध थे जिससे 10 से ज्यादा संतानें भी पैदा हुईं।

साल 1990 में हैदराबाद डाइनेस्टी के आखिरी निजाम ने अपनी आखिरी सांसें लीं। जिस समयनिजाम की मौत हुई उस वक्त उनके वारिसों की संख्या लगभग 400 थी। लेकिन निजाम ने अपने सभी वारिसों को खारिज करते हुए अपने ग्रैंडसन मुकर्रम जहां को अपना वारिस घोषित किया। मुकर्रम आज टर्की की राजधानी इस्ताम्बुल में गुमनामी का जीवन बिता रहे हैं। ऐसा नहीं था कि निजाम अपने इस वारिस के लिए कुछ छोड़ कर नहीं गए थे। जिस वक्त उस्मान अली खान पर हैदराबाद की रियासत को भारत में मिलाने के लिए दबाव डाला जा रहा था उस वक्त उन्होंने इंग्लैंड के नेटेवेस्ट बैंक में करीब 10 लाख पाउंड की राशि जमा करवाई थी।

इस राशि पर निजाम के तमाम वारिसों के साथ ही भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने भी अपना अपना दावा ठोक रखा है। लंदन के कोर्ट में इस प्रॉपर्टी के लिए केस चल रहा है।मुकर्रम आज इस्ताम्बुल में एक छओटे से फ्लैट में रह रहे हैं। एक समय के बाद मुकर्रम जहां की आर्थिक हालत इतनी खराब हो गई कि उनके पास वकील को देने के लिए भी पैसे नहीं बचे। अपने आप में शाही राज और विलासिता का इतिहास समेटे निजाम उस्मान अली खान का वारिस आज गुमानाम और साधारण सी जिंदगी बिता रहा है।

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