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संपादकीयः विराट उपलब्धि

यों क्रिकेट की दुनिया में समय-समय पर ऐसे नाम उभरते रहे हैं, जिन्होंने अपने खेल से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा और पहले से दर्ज रिकॉर्ड के बरक्स नए कीर्तिमान गढ़े।
Author February 11, 2017 02:04 am
इस मैच में विराट कोहली ने पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग का एक रिकॉर्ड भी तोड़ा है।

यों क्रिकेट की दुनिया में समय-समय पर ऐसे नाम उभरते रहे हैं, जिन्होंने अपने खेल से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा और पहले से दर्ज रिकॉर्ड के बरक्स नए कीर्तिमान गढ़े। इसलिए टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली को अगर न सिर्फ भारतीय परिदृश्य में, बल्कि दुनिया भर के क्रिकेट में एक मजबूत दीवार के रूप में देखा जाने लगा है तो यह उसी की अगली कड़ी है। यह भारत के लिए फिर से एक सुनहरा दौर है जिसमें इसका कोई खिलाड़ी विश्व क्रिकेट में अपनी चमक बिखेर रहा है। दरअसल, विराट का यहां तक का सफर लगातार उनके नाम पर दर्ज होने वाले नए रिकॉर्ड के रास्ते आगे बढ़ता रहा है। इसलिए अगर उन्हें मैदान पर रिकॉर्ड के भूखे खिलाड़ी के तौर पर देखा जाने लगा है तो यह कोई हैरानी की बात नहीं है। इसका उदाहरण शुक्रवार को एक बार फिर सामने आया, जब हैदराबाद में भारत और बांग्लादेश के बीच टैस्ट मैच के दूसरे दिन विराट ने अपने रनों के स्कोर को दो सौ पर पहुंचा दिया। इसके साथ ही वे टैस्ट क्रिकेट में लगातार चार सिरीज में चार दोहरे शतक लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बन गए। उनसे पहले सर डोनल्ड ब्रेडमैन और राहुल द्रविड़ ने तीन लगातार शृंखला में दोहरे शतक लगाए थे। लेकिन विराट दोहरे शतक में सबसे आगे निकल गए।

बांग्लादेश से पहले विराट कोहली ने वेस्टइंडीज, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड से टैस्ट मैच खेलते हुए दोहरे शतक बनाए थे। इसके अलावा, इस मैच की एक और उपलब्धि उनके नाम यह रही कि पहले दिन ही वे एक सीजन में टैस्ट मैचों में एक हजार रन बनाने वाले तीसरे बल्लेबाज बन गए। इससे पहले सुनील गावसकर और वीरेंद्र सहवाग के नाम यह रिकॉर्ड दर्ज था। विराट कोहली आज क्रिकेट में चर्चा के केंद्र में हैं तो इसके पीछे उनकी गहरी प्रतिबद्धता और लगन रही है। इसके उदाहरण क्रिकेट में उनके शुरुआती दौर के खेल से ही देखे जा सकते हैं। 2008 में जब भारत उन्नीस वर्ष से कम उम्र वाले विश्वकप का विजेता बना था, तब उस टीम के कप्तान विराट कोहली ही थे। फिर 2011 में विश्वकप जीतने वाली टीम इंडिया में भी वे मौजूद थे।
एकदिवसीय और टी-20 मैचों में उन्होंने जिस तरह अपने बल्ले का लोहा मनवाया, शायद उसी को देखते हुए कुछ क्रिकेट समीक्षकों ने एक समय कहा था कि वे टैस्ट मैचों के लिए उपयुक्त नहीं हैं। मगर पिछले साल से लेकर अब तक उन्होंने जितने टैस्ट मैच खेले हैं, उनसे उन्होंने अपने बारे में बनाई गई उस धारणा को तोड़ा और उन समीक्षकों को करारा जवाब दिया है। फिलहाल वे भारतीय क्रिकेट टीम के तीनों प्रारूपों के कप्तान हैं। उन्हें अजेय कप्तान के तौर पर भी देखा जाता है। जाहिर है, उन्होंने तीनों प्रारूपों में अपनी काबिलियत साबित की है। यह बेवजह नहीं है कि दुनिया के महान क्रिकेट खिलाड़ियों ने उनकी क्षमता की तारीफ की है। आज हालत यह है कि जिस मैच में विराट मैदान में उतरते हैं तो आंकड़े दर्ज करने वाले लोग उनके बल्ले से निकले किसी नए रिकॉर्ड का इंतजार करने लगते हैं।

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