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अरविंद केजरीवाल की संगत ‘काफी विषैली’ है: किरण बेदी

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर तीखा प्रहार करते हुए भाजपा के मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी ने उनके प्रभाव को ‘‘काफी विषैला’’ करार दिया और उन्हें ‘‘नकारात्मक’’ व्यक्ति बताया। करीब दो वर्ष पहले अपने रास्ते जुदा करने वाले केजरीवाल और बेदी ने टीम अन्ना के सदस्य के रूप में काम किया […]
Author January 28, 2015 20:39 pm
Delhi Election: पूर्व पुलिस अधिकारी ने कहा कि अन्ना आंदोलन के दौरान भी उन्हें उनकी नकारात्मकता महसूस होती थी।(तस्वीर-पीटीआई)

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर तीखा प्रहार करते हुए भाजपा के मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी ने उनके प्रभाव को ‘‘काफी विषैला’’ करार दिया और उन्हें ‘‘नकारात्मक’’ व्यक्ति बताया।

करीब दो वर्ष पहले अपने रास्ते जुदा करने वाले केजरीवाल और बेदी ने टीम अन्ना के सदस्य के रूप में काम किया था। बेदी ने कहा कि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान भी उनके विचार अलग-अलग थे लेकिन लोकपाल के साझा उद्देश्य के लिए उनसे रिश्ता नहीं तोड़ा।

बेदी ने एनडीटीवी को बताया, ‘‘उनकी संगत विषैली है। मैं जब उनके साथ थी तब भी मुझे महसूस हुआ लेकिन हमारा साझा उद्देश्य था कि देश को घोटालों और भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलनी चाहिए। आप चाहे जो भी हों, हमारा एक उद्देश्य था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मेरी उनसे बहस होती थी कि आप संवाददाता सम्मेलन क्यों बुला रहे हैं, इसकी जरूरत नहीं है। आप धरना क्यों कर रहे हैं, इसकी जरूरत नहीं है।’’

बेदी ने अपने पहले के वादे को तोड़ दिया कि वह चुनावों में निजी हमले नहीं करेंगी। पूर्व पुलिस अधिकारी ने कहा कि अन्ना आंदोलन के दौरान भी उन्हें उनकी नकारात्मकता महसूस होती थी।

केजरीवाल के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि वह काफी नकारात्मक हैं। अन्ना आंदोलन के दौरान भी मैंने इस पर गौर किया।’’

बेदी ने कहा कि इस तरह की नकारात्मकता में संलिप्त होना उनकी प्रकृति नहीं है इसलिए वह केजरीवाल पर टिप्पणी करने से दूर रहीं।

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  1. Santosh Makharia
    Jan 29, 2015 at 3:36 pm
    माननीय किरण बेदी जी को ये बात इतनी देर से क्यों पता चली की अरविंद की संगत विषैली है ?आज वे जिस स्थान पे खड़ी है क्या उन्हें वहां सिर्फ अमृत का कलश दिखाई दे रहा है ?या आनेवाली मुख्यमंत्री की कुर्सी उन्हें वे सभी बात करने को मजबूर कर रही है चंद महीने में ही मोदी जी के दंगो के दाग उन्हें खूबसूरत लगने लगे आखिर देश की जनता उनकी बात पे विस्वास क्यों करे ?
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