December 04, 2016

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नोट हुए कम तो आॅनलाइन की ओर बढ़े कदम

गाजियाबाद के अजय राम की हर महीने होम लोन की ईएमआइ कटती है। वे अपने सैलरी अकाउंट बैंक से या तो चेक या फिर नकद निकाल कर हर महीने होम लोन बैंक अकाउंट में पैसा जमा करते हैं।

Author November 19, 2016 02:55 am
प्रतीकात्नक तस्वीर

संजय शर्मा

गाजियाबाद के अजय राम की हर महीने होम लोन की ईएमआइ कटती है। वे अपने सैलरी अकाउंट बैंक से या तो चेक या फिर नकद निकाल कर हर महीने होम लोन बैंक अकाउंट में पैसा जमा करते हैं। लेकिन चार साल में पहली बार उनके होश फाख्ता हो गए क्योंकि किस्त की तारीख करीब आ गई थी और नोटबंदी के कारण उनके दोनों बैंकों के सामने लंबी कतारें लगी थीं। बैंकों में दूसरे सभी काम ठप पड़ चुके थे। आखिर उन्होंने इसका तोड़ निकाला और अपने सैलरी बैंक अकाउंट के लिए तुरंत नैट बैंकिंग अकाउंट खोला। 24 घंटे बाद उनका नेट बैंकिंग अकाउंट सक्रिय हो गया और उन्होंने फौरन होम लोन अकाउंट वाले बैंक में सैलरी अकाउंट वाले बैंक से ईएमआइ का अंतरण किया और बेफिक्र हो गए।

अजय राम का उदाहरण बताता है कि नोटबंदी के कारण निश्चित ही नेट बैंकिंग और आॅनलाइन भुगतान में बढ़ोतरी आई होगी। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के एनईएफटी, आरटीजीएस और मोबाइल बैंकिंग के नवंबर 2016 के आंकड़े दिसंबर 2016 में ही मिल पाएंगे। लेकिन अक्तूबर 2016 के आंकड़े बयान कर रहे हैं कि इनका सहारा लेने वालों की संख्या काफी बढ़ी है। अगर हम सिर्फ नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर ( एनईएफटी) की ही बात करें तो तस्वीर काफी साफ हो जाती है। दरअसल एनईएफटी के जरिए कोई भी व्यक्ति एक रुपए से 10 लाख रुपए की रकम मिनटों में एक बैंक से दूसरे बैंक में किसी को भी अंतरित कर सकता है और 10000 रुपए की रकम पर उसे 2.50 रुपए और सर्विस टैक्स ही चुकाना होता है। एनईएफटी इसलिए भी लोकप्रिय माध्यम है क्योंकि आरटीजीएस दो लाख से 10 लाख रुपए के बीच होता है।

रिजर्व बैंक के अनुसार अक्तूबर 2016 में एनईएफटी से 13.321 करोड़ के ट्रांजेक्शन हुए और इनके जरिए 9504.50 अरब रुपए की रकम अंतरित हुई। वहीं, अक्तूबर 2015 में 11.46 करोड़ के ट्रांजेक्शन हुए थे और इनसे 6906.68 अरब रुपए की रकम का अंतरण हुआ था। यहां एक दिलचस्प पहलू भी है। सितंबर 2016 में एनईएफटी से 12.015 करोड़ ट्रांजेक्शन बैंकों में किए गए जो अक्तूबर 2016 के मुकाबले 1.306 करोड़ कम हैं। लेकिन सितंबर में कम ट्रांजेक्शन के बावजूद रकम का अंतरण अक्तूबर के मुकाबले कहीं ज्यादा हुआ। सितंबर 2016 में 9880.17 अरब रुपए का अंतरण हुआ जो अक्तूबर के मुकाबले 375.67 अरब रुपए ज्यादा है। देखा जाए तो आरबीआइ के हवाले मीडिया रिपोर्ट भी आई थी कि सितंबर 2016 में बैंकों में काफी पैसा आया और ऐसा ही सितंबर के आॅनलाइन अंतरण में भी झलक रहा है। भले ही अक्तूबर 2016 के मुकाबले ट्रांजेक्शन कम हुए हैं, लेकिन अक्तूबर के मुकाबले रकम ज्यादा अंतरित की गई है। अक्तूबर 2016 में देशभर के 176 सरकारी, सहकारी और निजी बैंकों के आधार पर ये आंकड़े हैं। वहीं सितंबर 2016 में 175 बैंकों का ब्योरा है।
जहां तक सितंबर 2015 का सवाल है देशभर में 166 बैंकों से 9.854 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए थे और इनके मार्फत 6860.21 अरब रुपए का अंतरण उपभोक्ताओं ने किया था। सितंबर 2016 में अंतरित हुई रकम लगभग दुगनी थी। यानी एनईएफटी का इस्तेमाल सितंबर की एक साल की अवधि में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा। वहीं ट्रांजेक्शन 2.161 करोड़ ज्यादा हुआ।

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First Published on November 19, 2016 2:52 am

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