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अरनब गोस्वामी ने चैनल का नाम बदलकर रखा रिपब्लिक टीवी, सुब्रह्मण्यन स्वामी बोले- मेरी आपत्ति के बाद उठाया कदम

बीजेपी सांसद ने रिपब्लिक शब्द पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि इससे प्रतीक अधिनियम, 1950 का उल्लंघन हो सकता है।
रिपब्लिक के ट्विटर अकाउंट से शेयर की गयी अरनब गोस्वामी की तस्वीर। (ट्विटर)

टाइम्स नाउ के पूर्व एडिटर इन चीफ अरनब गोस्वामी ने अपने नए चैनल का नाम रिपब्लिक से बदलकर रिपब्लिक टीवी कर लिया है। हाल ही में उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में इसकी एप्लिकेशन दी है। कुछ हफ्तों पहले बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यन स्वामी ने चैनल के नाम पर सवाल उठाते हुए मंत्रालय को खत लिखा था, जिसमें उन्होंने रिपब्लिक शब्द पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि इससे प्रतीक अधिनियम, 1950 का उल्लंघन हो सकता है।

न्यूज18 ने नई एप्लिकेशन के हवाले से कहा, एआरजी आउटलियर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और एडिटर इन चीफ ने मंत्रालय से अनुरोध किया है कि उनकी पिछली एप्लिकेशन में जो रिपब्लिक शब्द का इस्तेमाल हुआ है उसे अब रिपब्लिक टीवी पढ़ा जाए।
जब गोस्वामी को ई-मेल भेजकर पूछा गया कि क्या उनका यह फैसला स्वामी की आपत्ति के बाद आया है तो उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया। वहीं स्वामी ने दावा किया है कि अरनब ने उनकी आपत्तियों के कारण अपने चैनल का नाम बदला है। स्वामी ने न्यूज18 को बताया, देश जानना चाहता है कि क्या अरनब को कानून पता है। मैं कानून जानता हूं और इसी के कारण उन्हें अपने चैनल का नाम बदलना पड़ा। इससे पहले 13 जनवरी, 2017 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव को भेजे खत में स्वामी ने कहा था कि अनुसूची कानून के अनुसार, आइटम 6 के तहत, वाक्यांश ‘रिपब्लिक’ का उपयोग करना निषेध है।

इससे पहले 9 जनवरी को गोस्वामी ने बेंगलुरु महिला उत्पीड़न पर भारतीय मीडिया के रवैये पर सवाल खड़ा किया था। गोस्वामी ने कहा था कि “भारतीय पत्रकारिता के मठाधीश” बेंगलुरु में हुए महिला उत्पीड़न पर चुप्पी साधे हुए हैं और उत्तर प्रदेश की पारिवारिक कलह फोकस है। अरनब ने कहा था कि भारतीय मीडिया सही और गलत के बीच फर्क भूल चुका है। अरनब ने दिल्ली स्थित पत्रकारों पर निशाना साधते हुए कहा था, “वो इतने समझौतावादी हो चुके हैं, सत्ता से इतने मिल चुके हैं कि उन्हें जनता के प्रतिनिधित्व का अधिकार नहीं है।”
अरनब ने कहा था, “लुटियंस दिल्ली में 10 सालों में रहने के दौरान मैं पत्रकारिता के खूबसूरत पेशे के पतन और लगभग खात्मे का गवाह रहा। हम और आप मिलकर भारतीय पत्रकारिता को लुटियंस दिल्ली के असर से बचाएंगे।”

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