January 22, 2017

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संपादकीयः कार्रवाई के बाद

नियंत्रण रेखा पार कर कई आतंकी शिविर नष्ट करने और घुसपैठ तथा कश्मीर घाटी में वारदात की फिराक में रहे अड़तीस आतंकियों को ढेर कर देने के भारतीय सेना के दावे के साथ जहां देश में उत्साह का माहौल पैदा हुआ वहीं चिंता का सूरते-हाल भी।

Author October 1, 2016 02:46 am

नियंत्रण रेखा पार कर कई आतंकी शिविर नष्ट करने और घुसपैठ तथा कश्मीर घाटी में वारदात की फिराक में रहे अड़तीस आतंकियों को ढेर कर देने के भारतीय सेना के दावे के साथ जहां देश में उत्साह का माहौल पैदा हुआ वहीं चिंता का सूरते-हाल भी। यों भारत ने साफ किया है कि युद्ध छेड़ने का उसका कोई इरादा नहीं था, अब भी नहीं है, उसने सिर्फ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की, यानी एक लक्षित कार्रवाई, जिसका मकसद सिर्फ आतंकियों से निपटना था, किसी देश को या वहां के आम लोगों को नुकसान पहुंचाना नहीं। इस कार्रवाई के बारे में बाद में भारत ने पाकिस्तान को औपचारिक रूप से सूचित भी कर दिया। लेकिन भारत के स्पष्टीकरण को पाकिस्तान उसी रूप में लेगा और उसे सहज रूप से स्वीकार करेगा, इस बारे में आश्वस्त नहीं हुआ जा सकता। दरअसल, भारत की कार्रवाई के बाद नवाज शरीफ सरकार पर पलटवार के लिए घरेलू राजनीति का दबाव बढ़ गया है। इससे फिलहाल युद्ध की पृष्ठभूमि जैसे हालात दिख रहे हैं। भारत सरकार ने राजस्थान और पंजाब के सरहदी इलाकों में दस किलोमीटर तक के दायरे में गांवों को खाली कराना शुरू कर दिया है। हजारों दहशतजदा परिवार अपने घरबार छोड़ कहीं और शरण लेने को विवश हैं। उनके मन में पिछली लड़ाइयों की यादें ताजा हो गई हैं जब उन्हें इसी तरह अपने गांव और घर छोड़ कर जाना पड़ा था। पंजाब के साढ़े चार सौ स्कूल अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। सीमा से दस किलोमीटर के दायरे में धान कटाई का काम भी फिलहाल रुका रहेगा। जो लोग सीमाक्षेत्रों में रहते हैं वे जानते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध या युद्ध जैसी परिस्थितियों का सबसे ज्यादा खमियाजा उन्हें ही भुगतना पड़ता है। इसलिए स्वाभाविक ही जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने आगाह किया है कि टकराव से राज्य के लिए बहुत बड़ी आपदा पैदा हो सकती है। साथ ही उन्होंने अपील की है कि भारत और पाकिस्तान को सीमाओं पर मौजूदा टकराव बढ़ने के खतरनाक परिणामों को महसूस कर संवाद के माध्यम खोलने चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय बिरादरी भी युद्ध छिड़ने के अंदेशे से चिंतित है। अमेरिका पहले ही दोनों देशों को संयम बरतने की नसीहत दे चुका है। अब संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की-मून ने भारत और पाकिस्तान को बातचीत के जरिए मतभेद सुलझाने की सलाह दी है। इन सब चिंताओं का प्रमुख कारण यह है कि आज की दुनिया में लड़ाई के तौर-तरीके और साधन इतने विनाशकारी हो चुके हैं कि असल में कोई हार-जीत नहीं होती, सिर्फ त्रासदी घटित होती है। फिर, भारत और पाकिस्तान, दोनों परमाणु हथियारों से लैस हैं। लड़ाई छिड़ जाने पर नफरत का तूफान उठता है और दूसरे को अधिक से अधिक संकट में डालना ही एकमात्र मकसद हो जाता है। युद्ध के समय के इस मानस और अत्यंत विनाशकारी शस्त्रों की मौजूदगी को देखते हुए कोई भी सोच-समझ वाला व्यक्ति युद्ध की वकालत नहीं करेगा। यही नहीं, युद्ध न हो, पर हर वक्त युद्ध जैसा तनाव बना रहे यह भी ठीक नहीं। ऐसे माहौल में न राज-काज सामान्य रह सकता है न आर्थिक प्रगति हो सकती है। यह तनिक हैरानी का विषय नहीं कि भारत-पाक तनाव से गुरुवार को शेयर बाजार सहम गया और सूचकांक साढ़े चार सौ से भी ज्यादा अंक नीचे आ गया। बहरहाल, फौरी उत्तेजना से उबर कर हालात को सामान्य बनाने के कूटनीतिक उपायों पर ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए।

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First Published on October 1, 2016 2:44 am

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