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खेल की जीत

लंदन में चैंपियंस ट्रॉफी क्रिकेट के फाइनल में जहां पाकिस्तान ने भारत को बुरी तरह से हराया, वहीं विश्व हॉकी लीग के सेमीफाइनल में भारत ने पाकिस्तान को ऐसी ही मात दी।
Author June 20, 2017 05:44 am
आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी 2017 के साथ विजेता पाकिस्‍तान क्रिकेट टीम। (Source: PTI)

रविवार खेलों के लिहाज से भारत और पाकिस्तान के लिए बेहद अहम दिन रहा। एक मोर्चे पर पाकिस्तान को शानदार कामयाबी मिली तो दूसरे मोर्चे पर भारत को। लंदन में चैंपियंस ट्रॉफी क्रिकेट के फाइनल में जहां पाकिस्तान ने भारत को बुरी तरह से हराया, वहीं विश्व हॉकी लीग के सेमीफाइनल में भारत ने पाकिस्तान को ऐसी ही मात दी। इधर इंडोनेशिया ओपन पुरुष एकल ट्रॉफी के फाइनल में भारतीय शटलर किदांबी श्रीकांत ने बैटमिंटन का खिताब जीत लिया। जो लोग खेल को खेल-भावना से देखते हैं, उनके लिए यह दो देशों के खिलाड़ियों या उनकी टीमों के बीच जीत की कोशिशों के बाद एक सामान्य नतीजा है। लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जाने वाला कोई भी मैच एक ऐसी प्रतिद्वंद्विता में तब्दील हो चुका है, जिसमें खेल-भावना शायद ही कहीं बची दिखती है। भारतीय और पाकिस्तानी क्रिकेट टीमों के मुकाबले की घोषणा होते ही दोनों देशों में एक तरह के उन्माद का माहौल बनना शुरू हो जाता है और नतीजतन मैच के दिन खेल, खेल नहीं रह जाता। यह विचित्र माहौल बनाने में राजनीतिक हालात और बाजार के साथ-साथ मीडिया का अपना योगदान भी कम नहीं है।

जब तय हो गया कि चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल मैच भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जाना है, तभी से उसके प्रति उन्माद की हालत पैदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। नतीजतन, जब भारत यह मैच बुरी तरह हार गया तो भारतीय दर्शकों के लिए सदमे जैसा था। कई जगह से टीवी तोड़ने जैसी खबरें भी आर्इं। खेलों के प्रति यह कौन-सा रवैया है कि खिलाड़ियों का प्रदर्शन, उनकी महारत वगैरह को देखने और बिना किसी पक्षपात के उनकी सराहना करने के बजाय हर हाल में सिर्फ अपनी टीम की जीत का आग्रह पाल लिया जाए और ऐसा नहीं होने पर मातम मनाया जाए! ठीक इसी दिन पाकिस्तान को हरा कर विश्व हॉकी लीग में भारत की शानदार जीत अधिकतर भारतीयों की नजर से ओझल रह गई। यही बैडमिंटन के मामले में भी हुआ। भारतीय शटलर किदांबी श्रीकांत ने रविवार को फाइनल्स में जापानी क्वालीफायर काजुमासा साकाई पर सीधे गेम में जीत दर्ज कर इंडोनेशिया ओपन पुरुष एकल ट्रॉफी अपने नाम कर ली, जो उनका तीसरा सुपर सीरीज खिताब है।

इन दोनों शानदार सफलताओं पर ध्यान न जाना क्रिकेट के बरक्स दूसरे खेलों के प्रति हमारी अनदेखी को ही दर्शाता है। भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले किसी भी मैच को स्वस्थ खेल भावना से क्यों नहीं देखा जा सकता? दुनिया भर में खेलों को एक जोड़ने वाली गतिविधि के तौर पर देखा जाता है और कई मौकों पर यह दो देशों के बीच तनाव कम करने में सहायक साबित हुआ है। लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच अमूमन सभी खेल प्रतियोगिताओं को तनातनी के बीच सौहार्द के एक नखलिस्तान की तरह नहीं, बल्कि दुश्मन से निपटने के एक मौके की तरह पेश किया जाता है। खासतौर पर दोनों देशों के बीच होने वाले क्रिकेट मैचों को लेकर इस कदर उन्माद पैदा किया जाता है, जिससे इस खेल से जुड़े बाजार को अकूत मुनाफा पीटने का मौका मिलता है। शायद इससे कुछ लोगों के राजनीतिक हित भी सधते हों। लेकिन इससे खेल-भावना और खेल-विवेक का बेड़ा गर्क होता है।

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  1. L
    Lokesh Pal
    Jun 20, 2017 at 11:39 am
    भारत और पाकिस्तान जब खेल के मैदान में एक-दूसरे के आमने-सामने होते हैं, तो यह खेल का मैदान नहीं होता बल्कि रणक्षेत्र बन जाता है। और खासकर क्रिकेट में तो यह चरम पर होता है। जहां खिलाड़ी तो खेल भावना से खेलते हैं, जिसमें हार और जीत दोनों ही सुनिश्चित होती है, लेकिन मैदान के बाहर दर्शकों की जो भावनाएं होती हैं, वह कुछ अलग ही रंग में रंगी होती हैं। किसी को भी हार स्वीकार नहीं होती और इंग्लैंड में संपन्न चैंपियंस ट्राफी में भी यही देखने को मिला। इन सब में सोशल मीडिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है, जिसमें समर्थक जुबानी जंग लड़ते हैं। आज अन्य खेलों के बजाय भारत में क्रिकेट को ज्यादा तवज्जो दी जाती है, जबकि अन्य खेलों में ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता। जबकि उसी दिन हाकी में भारत ने पाकिस्तान को ी तरह ७-१ से हरा दिया, वहीं दूसरी ओर के। श्रीकांत ने बैडमिंटन में खिताब हासिल किया। आज जरूरत है क्रिकेट की ही तरह अन्य खेलों को भी तवज्जों मिले, ताकि ये खिलाड़ी भी प्रोत्साहित हों।
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