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मिलावट का रोग

राजस्थान के झुंझनू और हरियाणा के कैथल सहित देश के कई इलाकों में मिलावटी मिठाइयों के कारोबारियों के ठिकानों पर छापे के साथ इसके आरोपियों की धड़-पकड़ जारी है।
Author November 9, 2015 22:49 pm

राजस्थान के झुंझनू और हरियाणा के कैथल सहित देश के कई इलाकों में मिलावटी मिठाइयों के कारोबारियों के ठिकानों पर छापे के साथ इसके आरोपियों की धड़-पकड़ जारी है। लेकिन हर साल ऐसी कुछ कार्रवाइयों के बावजूद मिलावटी मिठाई बनाने और खुलेआम उसकी बिक्री को रोकना अभी तक मुमकिन नहीं हो सका है। जबकि इस तरह की मिठाइयों से लोगों के बीमार पड़ने और कई बार गंभीर रोग हो जाने की घटनाएं आम हैं।

किसी भी त्योहार पर मिठाइयां रिवायत का एक जरूरी हिस्सा मानी जाती हैं। दिवाली पर तो शायद ही कोई हो, जो मिठाई न खरीदता हो। भारी मांग का फायदा उठा कर इसका कारोबार करने वाले ऐसी सामग्रियों का उपयोग करके भी मिठाइयां तैयार करते हैं जो इंसानी सेहत के लिए नुकसानदेह और कई बार काफी खतरनाक होती हैं। मुश्किल यह है कि जागरूकता के अभाव में लोग न खरीदते समय यह ध्यान रखना जरूरी समझते हैं, न शायद उन्हें मिलावट वाली मिठाइयों के बारे में जानकारी ही होती है। इस क्रम में बहुत सारे लोग ऐसी मिठाइयां खाते और दूसरों को बांटते हैं, जो किसी को बीमार बना सकती हैं। जाहिर है, त्योहारों को खुशी से मनाने के लिए जिन मिठाइयों का सेवन किया जाता है, वे सेहत के लिए खतरनाक भी साबित हो सकती हैं।

यों कई दूसरे पर्वों पर भी मिठाइयों की बिक्री में तेजी आ जाती है, लेकिन त्योहारों के मौसम में और खासतौर पर दिवाली पर आम दिनों के मुकाबले मिठाइयों की खपत पंद्रह से बीस गुना बढ़ जाती है। लगभग सभी मोहल्लों में स्थायी दुकानों के अलावा भी सड़कों के किनारे मिठाइयों की दुकानें सज जाती हैं। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नुकसानदेह पदार्थों से तैयार मिठाइयों पर रसायन या खतरनाक रंग चढ़ा दिया जाता है।

इन पर नजर रखने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत जरूरी निर्देश तय किए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए जुर्माना और गंभीर मामलों में कारावास की सजा का प्रावधान है। लेकिन इन नियमों का कितना पालन हो पाता है, यह छिपा नहीं है। यूरिया और कास्टिक आदि से तैयार दूध पहले ही एक गंभीर समस्या बन रहा है। इससे भी आगे दूध में उबला हुआ आलू, मैदा आदि मिला कर खोया तैयार किया जाता है और फिर उससे रंग-बिरंगी बर्फी तथा रसायनों को मिला कर उनसे तैयार उत्पादों को मिठाई के नाम पर बेचा जाता है।

ऐसी मिठाइयां खाने से एलर्जी, उलटी, दस्त जैसी सामान्य बीमारियों से लेकर गुर्दे खराब होने तक के मामले हो सकते हैं। विडंबना यह है कि त्योहारी मौसम में यह कारोबार अपने चरम पर होता है, और कोई ऐसा तंत्र नहीं है जो जांच करे तथा निगरानी रखे। दूसरी ओर, त्योहार के फेर में लोग मिठाइयों की शुद्धता के पक्ष की अनदेखी कर देते हैं। जबकि खानपान के मामले में एक बार

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