ताज़ा खबर
 

आरोपों का घेरा

2002 से यह पद संभाल रहे पचौरी को 2015 में आईपीसीसी से इस्तीफा देना पड़ा, टेरी की एक कर्मचारी का यौन उत्पीड़न करने के आरोपों के चलते।
Author नई दिल्ली | March 3, 2016 01:51 am
पूर्व टेरी प्रमुख आर के पचौरी। (रॉयटर्स फाइल फोटो)

जाने-माने पर्यावरण विज्ञानी और ‘टेरी’ (द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट) के कार्यकारी उपाध्यक्ष आरके पचौरी के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले की अंतिम परिणति क्या होगी यह तो बाद में सामने आएगा, पर यह मामला एक अहम मुकाम पर जरूर पहुंच गया है। दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में आरोपपत्र दायर कर दिया है जिसमें स्त्री की लज्जा भंग करने की मंशा से उस पर आपराधिक बल प्रयोग करने, यौन उत्पीड़न, पीछा करने, धमकी देने, अभद्र सलूक करने जैसे आरोप शामिल हैं। शायद ही कोई दिन हो, जब यौन अपराध की खबरें न आती हों। कार्यस्थल पर उत्पीड़न के भी हर साल बहुत सारे मामले सामने आते हैं। लेकिन पचौरी के खिलाफ मामला बहुत विशिष्ट है। यह अपने आप में बहुत हैरानी का विषय है कि अंतरराष्ट्रीय ख्याति वाले व्यक्ति के दामन पर ऐसे दाग लगे हैं। पचौरी जलवायु संकट पर संयुक्त राष्ट्र की पहल पर गठित अंतर-सरकारी समिति (आईपीसीसी) के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके कार्यकाल में ही आईपीसीसी को शांति का नोबेल पुरस्कार मिला था। 2002 से यह पद संभाल रहे पचौरी को 2015 में आईपीसीसी से इस्तीफा देना पड़ा, टेरी की एक कर्मचारी का यौन उत्पीड़न करने के आरोपों के चलते। जाहिर है, इस मामले से आईपीसीसी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची होगी। कार्रवाई की कुछ पहल टेरी में भी हुई। शिकायत की बिना पर संस्था ने एक आंतरिक जांच समिति बिठाई और उसने पाया कि आरोपों में दम है। इसके फलस्वरूप पचौरी को टेरी से भी हटना पड़ा। लेकिन यह गौरतलब है कि टेरी की संचालन परिषद ने पचौरी के हटने की घोषणा करते हुए उनके योगदान की खूब सराहना की, पर कहीं भी यह नहीं कहा कि किस वजह से उन्हें हटने के लिए कहा गया। ऐसा लगता है कि संचालन परिषद की ज्यादा चिंता संस्था की प्रतिष्ठा बचाने की थी।

इस पूरे मामले में और भी कई बातें गौर करने लायक हैं। एक यह है कि पचौरी पर लगा आरोप क्षणिक आवेश का मामला नहीं है। आरोपों का दायरा दो साल तक फैला हुआ है। फिर, कुछ समय पहले टेरी की एक और पूर्व कर्मचारी ने भी पचौरी के खिलाफ अपने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। ऐसा लगता है कि पचौरी को कहीं न कहीं यह भरोसा रहा होगा कि उनकी हैसियत और पहुंच के कारण उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा। शिकायतों और आरोपों की पूरी कहानी से इसके संकेत भी मिलते हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक उसे धमकी दी गई, भयादोहन करने की भी कोशिश की गई। फिर, अदालत से बाहर ‘समझौता’ कर लेने की पेशकश भी हुई, जैसा कि पुलिस का आरोपपत्र बताता है। अगर पचौरी इस सब में नाकाम रहे और मामला अदालत में आरोपपत्र दाखिल होने तक पहुंच गया, तो इससे शिकायतकर्ता के साहस और संघर्ष का अंदाजा लगाया जा सकता है। मामले को जहां का तहां छोड़ देने के लिए डाले गए तमाम दबावों के बावजूद उसने खुद कानूनी मदद जुटाई, जबकि यह जिम्मेदारी टेरी को उठानी चाहिए थी। यों पुलिस ने जिन तेईस लोगों को अभियोजन पक्ष का गवाह बनाया है उनमें से कई टेरी के मौजूदा और पूर्व कर्मचारी भी हैं। अच्छी बात है कि अंतत: संस्था के भीतर से सहानुभूति और सहयोग के कुछ स्वर उठ सकते हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.