ताज़ा खबर
 

गहराता संकट

सीरिया में लोकतंत्र की बहाली के नाम पर शुरू हुई लड़ाई से फिलहाल कोई खास उम्मीद पैदा नहीं हो सकी है, लेकिन अब लगता है कि वही एक बड़े युद्ध की भूमिका बना रही है।
Author November 25, 2015 23:39 pm

सीरिया में लोकतंत्र की बहाली के नाम पर शुरू हुई लड़ाई से फिलहाल कोई खास उम्मीद पैदा नहीं हो सकी है, लेकिन अब लगता है कि वही एक बड़े युद्ध की भूमिका बना रही है। मंगलवार को सीरिया की सीमा के आसपास रूस के एक युद्धक विमान को जिस तरह तुर्की ने मार गिराया और उसे लेकर रूस ने जैसी प्रतिक्रिया जाहिर की है, उससे जाहिर है कि तनाव का सिरा कहां तक पहुंच चुका है।

इस घटना की गंभीरता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने कहा कि यह चरमपंथ के खिलाफ चलाए जा रहे रोजमर्रा के संघर्ष से कहीं आगे की बात है; यह चरमपंथियों के साथ मिल कर पीठ में छुरा घोंपने की तरह है और इस घटना का द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर असर होगा। सीरिया और उस इलाके में चल रहे संघर्ष में रूस के दखल देने के बाद से अब तक जो घटनाक्रम सामने आए हैं, उसके मद्देनजर इस मामले में रूस की यह दलील सही लगती है कि उसके विमान और पायलट से तुर्की को कोई खतरा नहीं था।

सवाल है कि अगर अमेरिका या नाटो के दूसरे देशों की तरह तुर्की भी आइएस की चुनौती से लड़ रहा है, तो उसे रूसी विमान को मार गिराने की जरूरत क्यों महसूस हुई! ताजा घटना ने पिछले कुछ समय से दबे हुए तनाव को सतह पर ला दिया है। अगर आने वाले कुछ दिनों में इसे कम करने की पहलकदमी नहीं हुई तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

दरअसल, एक बड़े संकट से जूझ रहे सीरिया को दो मोर्चों पर निपटना पड़ रहा है। एक तरफ आइएस का आतंक है, तो दूसरी ओर अमेरिका समर्थित स्वतंत्रता सैनिकों से उपजी चुनौती। यह बेवजह नहीं है कि मजबूत मदद के अभाव में सीरिया कमजोर पड़ता गया है। इसी स्थिति का फायदा आइएस को मिला, जिसने आज सीरिया के एक बड़े भू-भाग पर कब्जा कर लिया है।

गौरतलब है कि कुछ महीने पहले जब रूस ने इस समूचे मामले में सक्रिय रूप से दखल दिया, तभी से अमेरिका और उसके दूसरे सहयोगी देश उस पर यह आरोप लगा रहे थे कि आइएस के बहाने रूस गलत ठिकानों पर हमले कर रहा है। लेकिन वे गलत ठिकाने शायद उन्हीं कथित स्वतंत्रता सैनिकों के हैं, जो अमेरिका के समर्थन से सीरिया के सामने आइएस के साथ दोहरी मुश्किल पैदा कर रहे हैं।

अब जब रूस एक तरह से खुले तौर पर आइएस के खिलाफ सीरिया की मदद के लिए उतर गया है, तो उसमें आइएस सहित अमेरिका समर्थित कथित स्वतंत्रता सैनिकों के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है। इस बीच अमेरिका और पश्चिमी देशों के रवैए के बाद रूस ने चीन, ईरान और इराक के सहयोग से सीरिया के समर्थन में एक अघोषित मोर्चा बना लिया है तो उधर अमेरिका, यूरोप, तुर्की और खाड़ी देशों की सेनाएं हैं। जाहिर है, अगर मकसद आइएस और उसके आतंक को खत्म करना होगा, तो दोनों मोर्चे के बीच कोई विरोधाभास नहीं होना चाहिए। बेहतर यही होगा कि इसके

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.