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जानलेवा सड़कें

करीब दो महीने पहले केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि सड़क हादसों में हर रोज औसतन चार सौ लोगों की मौत होती है और इसका मुख्य कारण दोषपूर्ण इंजीनियरिंग है।
Author नई दिल्ली | August 9, 2016 05:08 am
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में एक चलते ट्रैक्टर और उसके पीछे लगी ट्रॉली के अचानक पलट जाने से दस महिलाओं की मौत हो गई और दो दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए। यह घटना भी सड़क हादसों के आंकड़ों में शामिल होकर जल्द ही भुला दी जाएगी। सड़क हादसों में भारत दुनिया में पहले नंबर पर है। देश भर में ऐसी दुर्घटनाएं आए दिन होती हैं। पहली नजर में यह एक सामान्य दुर्घटना लगती है, जिसमें कारण के तौर पर यही सामने आया कि ट्रैक्टर-ट्रॉली अचानक पलट गई। यह ड्राइवर के आकलन की गलती या फिर सड़क के खराब होने का नतीजा हो सकता है। लेकिन दरअसल यह सड़क हादसों के लिए जिम्मेदार कारणों से निपटने में लगातार टालमटोल का उदाहरण ही है। यह किसी से छिपा नहीं है कि सड़क प्रबंधन के प्रति ढीले-ढाले रवैए के चलते वाहन चलाने वाले लोग भी कई नियमों का पालन करना जरूरी नहीं समझते। दरअसल, सड़क हादसों के जितने भी मामले सामने आते हैं उनमें ज्यादातर में चालकों का नियम-कायदों को धता बता कर बेलगाम तरीके से वाहन चलाना सबसे मुख्य कारण के तौर पर दर्ज किया गया है। इस लापरवाही की शक्ल भले अलग-अलग हो, लेकिन अमूमन हर हादसे में ड्राइवर की चूक कई दूसरे लोगों के साथ-साथ खुद उसके लिए भी जानलेवा साबित होती है। खासतौर पर शराब पीकर वाहन चलाने वाले लोग यह भूल जाते हैं कि उनकी बेजा आदत दूसरों के साथ-साथ खुद उनकी जान भी ले सकती है।

यों सड़क हादसे अकेले भारत की नहीं, दुनिया भर के लिए एक गंभीर समस्या बन चुके हैं। लेकिन हमारे यहां लापरवाही और नियमों की अनदेखी के अलावा खराब सड़कें और सड़कों के अनुपात में वाहनों के बढ़ते बोझ ने दुर्घटनाओं की बढ़ोतरी में ज्यादा बड़ी भूमिका निभाई है। भारत में बारह करोड़ से ज्यादा वाहन हैं और रोजाना इनकी संख्या में भारी बढ़ोतरी हो रही है। सुरक्षित सफर के लिए सड़कों का पर्याप्त बुनियादी ढांचा होना, सड़क सुरक्षा के नियमों की आम जानकारी और इनका पालन जरूरी है। करीब दो महीने पहले केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि सड़क हादसों में हर रोज औसतन चार सौ लोगों की मौत होती है और इसका मुख्य कारण दोषपूर्ण इंजीनियरिंग है। प्रधानमंत्री सड़क सुरक्षा योजना के तहत किए गए प्रयास आज भी ठोस नतीजे नहीं दे सके हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम को मंजूरी दी है, ताकि सड़क यातायात के नियमन को लेकर सख्ती बरती जाए और इसका उल्लंघन करने वालों को उचित सजा दी जाए। लेकिन सिर्फ कानून बना कर इस तरह की लापरवाहियों को नहीं रोका जा सकता। इसके लिए इच्छाशक्ति और सक्रियता की जरूरत है। मगर हालत यह है कि सड़क हादसों में हर साल जितने लोगों की मौत होती है, उतने किसी युद्ध, महामारी या आतंकी घटनाओं में नहीं मारे जाते। अस्थायी या स्थायी तौर पर अपंग हो जाने वालों की संख्या भी बहुत ज्यादा है। लेकिन इतने बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान के बावजूद परिवहन विभागों के लिए यह उतना गंभीर मसला नहीं है जितना होना चाहिए, वहीं बहुत-से लोगों को थोड़ा धीरज रखना और नियंत्रित व सुरक्षित रूप से वाहन चलाना जरूरी नहीं लगता।

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