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संदेश और सुरंग

प्रधानमंत्री ने कहा कि कश्मीर में चालीस साल से खून बह रहा है और इससे किसी का फायदा नहीं हुआ है।
Author April 4, 2017 05:47 am
जम्मू एवं कश्मीर की चेनानी-नाशरी सुरंग को भारत की सबसे लंबी सुरंग के साथ-साथ सर्वाधिक सुरक्षित सुरंग बताया गया है। (Photo:PTI)

यह विडंबना ही है कि जम्मू-कश्मीर में रविवार की शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीरी युवाओं को टेररिज्म (आतंकवाद) छोड़ कर टूरिज्म (पर्यटन) को तवज्जो देने का आह्वान किया। इसके दो घंटे बाद ही श्रीनगर क्षेत्र में आतंकियों ने ग्रेनेड से हमला करके एक कांस्टेबल की हत्या कर दी और पंद्रह से अधिक सुरक्षाकर्मियों को घायल कर दिया। इस हिंसा ने एक अच्छे-भले मौके को दुखदायी रंगत दे दी है। आतंकवादी भी जानते हैं कि उनके छोटे-मोटे हमलों से कुछ होने-जाने वाला नहीं है, लेकिन इससे एक तरह का विघ्नसंतोष उन्हें जरूर मिल जाता होगा। जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि कितनी ही मांओं ने अपने बच्चे खोए हैं, लेकिन अंतिम क्षति तो हमारी ही हुई है।

प्रधानमंत्री ने जम्मू और कश्मीर को जोड़ने वाली देश की सबसे लंबी सुरंग के उद्घाटन के मौके पर अगर कश्मीर के गुमराह युवाओं को हिंसा छोड़ कर विकास के पथ पर लौटने का आह्वान किया तो यह जरूरी भी था और स्वाभाविक भी। इस मौके पर एक रैली को संबोधित करने के दौरान उन्होंने जो कुछ कहा, उसे महज रस्म अदायगी तक सीमित करना गलत होगा। बल्कि कहना चाहिए कि प्रधानमंत्री की अपील में एक तकलीफ, एक इशारा और एक सही संदेश शामिल था। राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर 2519 करोड़ रुपए की लागत से पांच साल में बन कर तैयार हुई इस सुरंग को अगर प्रधानमंत्री ने राज्य की ‘भविष्यरेखा’ बताया तो इसमें दम है।

यह सुरंग जम्मू और कश्मीर घाटी के बीच की दूरी को इकतीस किलोमीटर कम कर देगी, जिससे करीब सत्ताईस लाख रुपए की रोजाना बचत होगी। यह धनराशि राज्य के विकास को गति देने के काम आएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि कश्मीर में चालीस साल से खून बह रहा है और इससे किसी का फायदा नहीं हुआ है। इसलिए जरूरी है कि युवक आतंकवाद छोड़ पर्यटन को तवज्जो दें, क्योंकि यह राज्य सूफी परंपरा का वाहक रहा है। जो इस परंपरा को छोड़ देंगे वे अपना भविष्य ही अंधकारमय करेंगे। अगर पिछले चार दशक से खूनखराबा नहीं हो रहा होता तो आज यह राज्य विश्व-स्तर के पर्यटन-क्षेत्र में शामिल होता।

प्रधानमंत्री ने जहां सुरंग बनाने में पांच साल तक योगदान देने वाले कश्मीरी युवाओं की खुले मन से तारीफ की, वहीं सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी करने वालों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को पत्थर की ताकत समझनी चाहिए। कुछ युवा हैं जो पत्थर फेंकने में लगे हैं और दूसरी तरफ ऐसे भी युवा हैं तो पत्थर तराश कर निर्माण में लगे हैं। प्रधानमंत्री ने इशारों में पाकिस्तान पर भी कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, ‘वे खुद अपनी ही देखभाल नहीं कर सकते।’ इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता अटलजी कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत की बातें करते थे और उनकी सरकार भी इसी पर आगे बढ़ रही है।

विकास की गति को कोई रोक नहीं सकता। इच्छाशक्ति और युवाशक्ति इस लक्ष्य को हासिल करेगी। उन्होंने कहा कि यह सुरंग सिर्फ बुनियादी ढांचे का नेटवर्क नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर के बीच दिलों को जोड़ने वाली भी है। पीडीपी-भाजपा गठबंधन से यही आस लगाई गई थी कि जम्मू और कश्मीर के बीच मेल-मिलाप बढ़ेगा। पर बेहद अफसोस की बात है कि गठबंधन के एजेंडे की दिशा में अभी तक कोई खास पहल नहीं हुई है।

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